क्रिस्टोफर वोंग के विश्लेषण के अनुसार, न्यूजीलैंड डॉलर (NZD) में हालिया बढ़त रिजर्व बैंक ऑफ न्यूजीलैंड (RBNZ) द्वारा ब्याज दरों में आक्रामक बढ़ोतरी के फैसले के बाद दर्ज की गई है। हालांकि, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल कीवी डॉलर के लिए एक बड़ी बाधा बना हुआ है, जो इसकी तेजी को रोक रहा है। केंद्रीय बैंक द्वारा सख्त मौद्रिक नीति अपनाने की शुरुआत और साल 2026 की दूसरी छमाही में आर्थिक विकास में सुधार की उम्मीदों के चलते, विशेषज्ञों का मानना है कि AUD/NZD का स्तर अपने शीर्ष के करीब पहुंच रहा है। फिर भी, इस मुद्रा जोड़ी में गिरावट तभी संभव है जब न्यूजीलैंड की अर्थव्यवस्था में मजबूत विकास के स्पष्ट संकेत मिलें और ऊर्जा बाजार की स्थितियां अधिक अनुकूल हों।
ब्याज दरों में बढ़ोतरी का असर
RBNZ ने आधिकारिक नकद दर को 25bps बढ़ाकर 2.50% कर दिया है। यह मई 2023 के बाद से केंद्रीय बैंक का पहला रेट हाइक है। हालांकि बैंक ने आगे के लिए आक्रामक संकेत दिए हैं, लेकिन उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि भविष्य के निर्णय डेटा पर निर्भर करेंगे। केंद्रीय बैंक ने संकेत दिया है कि महंगाई को लक्ष्य के दायरे में लाने के लिए दरों में और बढ़ोतरी की जरूरत पड़ सकती है। ऊर्जा का आयात करने वाली अर्थव्यवस्था होने के कारण, न्यूजीलैंड के लिए तेल की कीमतों में गिरावट काफी मददगार साबित हो सकती है।
वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता
अन्य प्रमुख मुद्राओं और संपत्तियों की बात करें तो, GBP/USD अपनी तीन सप्ताह की ऊंचाई से नीचे खिसक कर 1.3400 के करीब ट्रेड कर रहा है। यूके में राजनीतिक अनिश्चितता कम होने से पाउंड को कुछ सहारा मिल रहा है, लेकिन मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण इस जोड़ी के लिए बढ़त बनाना मुश्किल हो रहा है। इसी तरह, EUR/USD जो पहले 1.1450 के स्तर तक पहुंचा था, अब 1.1400 के आसपास संघर्ष कर रहा है। निवेशकों की सतर्कता और डॉलर की मांग ने यूरो की चाल को सीमित कर दिया है।
सोना और बिटकॉइन पर दबाव
लगातार तीन दिनों की गिरावट के बाद सोने की कीमतों में मामूली रिकवरी देखी गई है, जो अब $4,100 के करीब है। मध्य-पूर्व में संघर्षों के कारण वैश्विक स्तर पर महंगाई बढ़ने का डर पैदा हो गया है, जिससे प्रमुख केंद्रीय बैंक मौद्रिक नीति में ढील देने से कतरा रहे हैं। वहीं, बिटकॉइन $63,000 पर स्थिर है। $64,000 के स्तर पर रिजेक्शन झेलने के बाद, बिटकॉइन को भू-राजनीतिक अनिश्चितता के चलते जोखिम लेने वाली पूंजी की कमी का सामना करना पड़ रहा है।
केंद्रीय बैंकों का रुख
लंबे समय से केंद्रीय बैंक बाजार को भविष्य के कदमों के बारे में संकेत देते रहे हैं, लेकिन अब व्यापारी यह देख रहे हैं कि केंद्रीय बैंक फॉरवर्ड गाइडेंस यानी भविष्य की नीतियों पर कम जानकारी साझा कर रहे हैं। चाहे वह फेडरल रिजर्व हो, यूरोपीय सेंट्रल बैंक हो या बैंक ऑफ इंग्लैंड, नीति निर्माता भविष्य के लिए स्पष्ट मार्गदर्शन देने से बच रहे हैं, जिससे बाजार में अनिश्चितता का माहौल है।











