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भारतीय रिजर्व बैंक बढ़ा सकता है ब्याज दरें, सोसाइट जेनेराल ने 75 बेसिस पॉइंट बढ़ोतरी का जताया अनुमानबाज़ार
2 सित॰ 2026, 1:28 pm (2 घंटे पहले)· 3

भारतीय रिजर्व बैंक बढ़ा सकता है ब्याज दरें, सोसाइट जेनेराल ने 75 बेसिस पॉइंट बढ़ोतरी का जताया अनुमान

सोसाइट जेनेराल के अनुसार मजबूत आर्थिक वृद्धि और महंगाई के दबाव को देखते हुए भारतीय रिजर्व बैंक रेपो रेट को 5.25% से बढ़ाकर 6.00% तक कर सकता है। वहीं मध्य पूर्व में तनाव के चलते वैश्विक बाजारों और मुद्राओं पर दबाव देखा जा रहा है।

भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूत रफ्तार और खाद्य तथा ईंधन कीमतों में जारी तेजी के बीच भारतीय रिजर्व बैंक पर ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख बनाए रखने का दबाव बढ़ता दिख रहा है। सोसाइट जेनेराल के एक नए आकलन के मुताबिक भारत का केंद्रीय बैंक अपनी मौद्रिक नीति को और कड़ा करते हुए रेपो रेट में 25-25 बेसिस पॉइंट की तीन क्रमिक बढ़ोतरी कर सकता है। इस संभावित बढ़ोतरी के बाद रेपो रेट 5.25% से बढ़कर शुरुआती 2027 तक 6.00% के स्तर पर पहुंच जाएगा। वित्तीय विश्लेषकों का मानना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था में उम्मीद से अधिक मजबूती के कारण दरों में बढ़ोतरी से विकास दर पर पड़ने वाला प्रतिकूल प्रभाव कम रहेगा। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय मोर्चे पर मध्य पूर्व में बढ़ता सैन्य तनाव, कच्चे तेल की चढ़ती कीमतें और अमेरिकी डॉलर की मजबूती से वैश्विक मुद्रा बाजार और डिजिटल परिसंपत्तियों पर नकारात्मक असर पड़ रहा है।

सोसाइट जेनेराल का अनुमान: आरबीआई करेगा 75 बेसिस पॉइंट की संचयी बढ़ोतरी

वित्तीय संस्था सोसाइट जेनेराल ने भारतीय रिजर्व बैंक की नीतिगत ब्याज दरों को लेकर अपने पूर्व अनुमान को संशोधित किया है। पहले जहाँ केवल दो बार 25-25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी की बात कही गई थी, वहीं अब कुल तीन बार 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी की संभावना जताई गई है। यदि यह अनुमान सही साबित होता है, तो मौजूदा 5.25% की रेपो दर बढ़कर शुरुआती 2027 तक 6.00% हो जाएगी। इस फैसले के पीछे का मुख्य कारण भारतीय अर्थव्यवस्था की गतिविधियों में देखा जा रहा मजबूत प्रदर्शन है। जब आर्थिक गतिविधियां मजबूत रहती हैं, तो ब्याज दरों में वृद्धि से होने वाला नुकसान सीमित हो जाता है। इसका एक सीधा अर्थ यह भी है कि भारतीय अर्थव्यवस्था वर्तमान में रिजर्व बैंक के वित्त वर्ष 2027 के लिए तय 6.7% के वृद्धि अनुमान की तुलना में कम स्पेयर कैपेसिटी के साथ काम कर रही है।

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अर्थशास्त्रियों का यह भी मानना है कि लगातार मजबूत बनी हुई आर्थिक रफ्तार के कारण खाद्य पदार्थों, ईंधन और औद्योगिक इनपुट लागतों का दबाव अंततः मुख्य मुद्रास्फीति यानी कोर इन्फ्लेशन में तब्दील हो सकता है। जब घरेलू उत्पादन शुरुआती अनुमानों से बेहतर प्रदर्शन कर रहा हो, मुद्रास्फीति का जोखिम ऊपर की ओर झुका हो और वैश्विक मौद्रिक परिस्थितियां भी कम मददगार साबित हो रही हों, तब केवल 50 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी पर्याप्त नहीं मानी जा सकती। इतना सीमित कदम वास्तविक नीतिगत दर का एक उचित सुरक्षा बफर तैयार करने में विफल रहेगा। इसलिए विश्लेषकों का अनुमान है कि आरबीआई अक्टूबर, दिसंबर और फरवरी में होने वाली अपनी लगातार तीन बैठकों में 25-25 बेसिस पॉइंट की नपी-तुली बढ़ोतरी कर कुल 75 बेसिस पॉइंट की संचयी बढ़ोतरी करेगा।

वैश्विक मुद्रा बाजार में हलचल, डॉलर को मिला सेफ-हेवन का सहारा

एशियाई बाजारों में दरों को लेकर लगाई जा रही अटकलों के बीच अंतरराष्ट्रीय विदेशी मुद्रा बाजार में भी काफी उथल-पुथल देखी जा रही है। मध्य पूर्व में लगातार गहराते तनाव और अमेरिका में ब्याज दरों के प्रति बदलते दृष्टिकोण ने मुद्रा बाजार को प्रभावित किया है। बुधवार को शुरुआती यूरोपीय कारोबारी घंटों के दौरान ब्रिटिश पाउंड के मुकाबले अमेरिकी डॉलर मजबूत हुआ और GBP/USD की जोड़ी गिरकर 1.3500 के करीब आ गई। मध्य पूर्व में बने अनिश्चितता के माहौल ने निवेशकों को सुरक्षित निवेश के विकल्पों की तरफ धकेला है, जिससे अमेरिकी डॉलर की मांग को समर्थन मिला है। पाउंड में कारोबार करने वाले निवेशकों की नजरें अब शुक्रवार को जारी होने वाली अमेरिका की अगस्त गैर-कृषि रोजगार रिपोर्ट पर टिकी हैं।

दूसरी ओर, यूरो पर भी भारी बिकवाली का दबाव देखा जा रहा है। मंगलवार को गिरावट के साथ बंद होने के बाद बुधवार को EUR/USD की जोड़ी घटकर 1.1600 से नीचे आ गई, जो पिछले दो हफ्तों का सबसे निचला स्तर है। मध्य पूर्व के संघर्ष में आई तेजी के कारण बाजार में जोखिम लेने की क्षमता घटी है, जिससे डॉलर को मजबूती मिली है। इसके साथ ही अमेरिका के फेडरल रिजर्व द्वारा दरों में सख्ती बनाए रखने की आशंकाओं ने यूरो को और कमजोर किया है। निवेशक अमेरिका के निजी क्षेत्र के रोजगार आंकड़ों का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं, जो श्रम बाजार की दिशा तय करने में मदद करेंगे।

कच्चा तेल और डीजल क्रैक स्प्रेड रिकॉर्ड स्तर पर, सोने में मामूली सुधार

कमोडिटी बाजार भी अंतरराष्ट्रीय तनाव और आपूर्ति संबंधी चिंताओं से अछूता नहीं है। हफ्ते के शुरुआती सत्र में चार सप्ताह के निचले स्तर पर जाने के बाद सोने की कीमतों में कुछ सुधार देखा गया। यूरोपीय सत्र की शुरुआत में सोना $4,320 प्रति औंस के पार कारोबार कर रहा था। अमेरिकी डॉलर में आई मामूली गिरावट ने सोने को सहारा दिया, लेकिन फेडरल रिजर्व की ओर से सख्त रुख की आशंकाओं के कारण सोने की बड़ी तेजी सीमित बनी हुई है। उच्च ब्याज दरों के माहौल में निवेशक बिना ब्याज वाली संपत्तियों में आक्रामक खरीदारी से बच रहे हैं।

ऊर्जा बाजार में वेस्ट टेक्सस इंटरमीडिएट यानी WTI कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तीसरे दिन तेजी दर्ज की गई। एशियाई सत्र के दौरान कच्चा तेल पिछले छह कारोबारी दिनों में पांचवीं बार बढ़त बनाते हुए 24 जुलाई के बाद के अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। मध्य पूर्व के संघर्ष के कारण आपूर्ति ठप होने का डर बना हुआ है, जिससे कच्चे तेल की कीमतें बढ़ रही हैं। ईंधन महंगा होने से वैश्विक मुद्रास्फीति की चिंताएं फिर गहरा गई हैं, जिससे सितंबर में अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा दरें बढ़ाए जाने की संभावना मजबूत हुई है।

रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों के बाजार में एक दुर्लभ और ऐतिहासिक रिकॉर्ड देखने को मिला है। कच्चे तेल का बाजार भले ही पिछले कुछ महीनों की तुलना में शांत लगे, लेकिन डीजल बाजार एक अलग ही कहानी बयां कर रहा है। अल्ट्रा-लो सल्फर डीजल फ्यूचर्स और WTI क्रूड के बीच के अंतर को दर्शाने वाला अमेरिकी डीजल क्रैक स्प्रेड इतिहास में पहली बार $100 प्रति बैरल के स्तर को पार कर गया। दिन के कारोबार के दौरान यह रिफाइनिंग मार्जिन $102.00 प्रति बैरल के सर्वकालिक उच्च स्तर को छू गया, जो रिफाइनिंग क्षमता की कमी और डीजल आपूर्ति के संकट को दर्शाता है।

अगस्त की रैली के बाद क्रिप्टो बाजार में आई सुस्ती

पारंपरिक वित्तीय बाजारों में दिख रही अनिश्चितता की झलक अब डिजिटल एसेट बाजार में भी साफ नजर आ रही है। अगस्त के महीने में शानदार बढ़त हासिल करने के बाद शीर्ष क्रिप्टो परिसंपत्तियों में बिकवाली का दबाव देखा जा रहा है। बिटकॉइन (BTC), एथेरियम (ETH) और रिपल (XRP) जैसे प्रमुख टोकन में तेजी का गतिज प्रवाह अब धीमा पड़ता दिखाई दे रहा है।

बिटकॉइन में तकनीकी स्तर पर शुरुआती मंदी के संकेत मिल रहे हैं क्योंकि उच्च स्तरों पर खरीदारी का रुझान सुस्त पड़ा है। एथेरियम की बात करें तो $2,500 के मनोवैज्ञानिक स्तर के पास कड़ा प्रतिरोध मिलने के बाद इसमें गिरावट का सिलसिला आगे बढ़ा है। वहीं रिपल (XRP) अपने महत्वपूर्ण सपोर्ट स्तर से नीचे बना हुआ है, जिससे निवेशकों का दृष्टिकोण सतर्क बना हुआ है। विश्लेषकों का कहना है कि उच्च वैश्विक ब्याज दरों और व्यापक आर्थिक अनिश्चितता के कारण क्रिप्टो बाजार में फिलहाल दबाव बने रहने की संभावना है।

सवाल-जवाब

सोसाइट जेनेराल के अनुसार आरबीआई रेपो रेट कितना बढ़ा सकता है?
सोसाइट जेनेराल के मुताबिक आरबीआई रेपो रेट में कुल 75 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी कर सकता है, जिससे दर 5.25% से बढ़कर 6.00% हो जाएगी।
दरों में बढ़ोतरी की यह प्रक्रिया कब तक पूरी होने का अनुमान है?
यह बढ़ोतरी तीन बैठकों (अक्टूबर, दिसंबर और फरवरी) में 25-25 बेसिस पॉइंट की किश्तों में पूरी होकर शुरुआती 2027 तक प्रभावी हो सकती है।
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का मुख्य कारण क्या है?
मध्य पूर्व में बढ़ते सैन्य तनाव के कारण आपूर्ति बाधित होने की चिंताओं से कच्चा तेल 24 जुलाई के बाद के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है।
डीजल क्रैक स्प्रेड में क्या रिकॉर्ड बना है?
अल्ट्रा-लो सल्फर डीजल फ्यूचर्स और WTI क्रूड के बीच अमेरिकी डीजल क्रैक स्प्रेड इतिहास में पहली बार $100 प्रति बैरल पार करते हुए $102.00 के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया।
क्रिप्टोकरंसी बाजार में गिरावट क्यों आ रही है?
अगस्त में हुई बड़ी तेजी के बाद उच्च ब्याज दरों की संभावना और वैश्विक अनिश्चितता के चलते बिटकॉइन, एथेरियम और रिपल में तकनीकी सुस्ती और बिकवाली देखी जा रही है।
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