अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव गहराने लगा है। अमेरिकी मानक वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट यानी डब्ल्यूटीआई के भाव में लगातार चौथे कारोबारी सत्र में कमजोरी देखी गई है। सोमवार को एशियाई व्यापारिक घंटों के दौरान यह $96.55 से $96.60 के दायरे में मामूली बढ़त के साथ खुला था, लेकिन जल्द ही बिकवाली के दबाव में फिसलकर एक सप्ताह से अधिक के निचले स्तर पर आ गया। यह जिंस लगभग 1.50 प्रतिशत की दैनिक गिरावट के साथ $94.00 के स्तर से ठीक नीचे कारोबार करता दिखा। आपूर्ति से जुड़े संकट के शांत होने के शुरुआती संकेतों ने बाजार पर सीधा दबाव बनाया है।
हालिया लाइव मार्केट आंकड़ों के मुताबिक क्रूड ऑयल फ्यूचर्स का भाव $94.52 पर दर्ज किया गया, जबकि इसका पिछला बंद भाव $100.30 था, जो 5.76 प्रतिशत की गिरावट दर्शाता है। इसका 52 हफ्तों का दायरा $54.98 से $119.48 के बीच रहा है और मौजूदा कारोबारी सत्र में वॉल्यूम 20-दिवसीय औसत का 0.14 गुना रहा है। बाजार के तकनीकी संकेतकों को देखें तो 14-दिवसीय आरएसआई 53 पर संतुलित स्थिति में है, जबकि एमएसीडी 4.45 पर सिग्नल लाइन 4.36 से ऊपर 0.09 के हिस्टोग्राम के साथ सकारात्मक बना हुआ है। मूविंग एवरेजेस के मोर्चे पर 20-दिवसीय ईएमए $94.78, 50-दिवसीय ईएमए $89.32 और 200-दिवसीय ईएमए $79.48 पर स्थित है, जो 50-दिवसीय एसएमए $86.86 और 200-दिवसीय एसएमए $80.86 के साथ दीर्घकालिक तेजी के रुझान की पुष्टि करते हैं। बोलिंगर बैंड्स का दायरा $78.04 से $108.39 के बीच है, जिसका मध्य स्तर $93.21 पर है। इसके साथ ही 33 के एडीएक्स स्तर से बाजार में मजबूत ट्रेंड की पुष्टि होती है, जबकि स्टोकेस्टिक पर फास्ट लाइन 41 और सिग्नल लाइन 64 पर है।
सऊदी अरब की पाइपलाइन और यमन संकट की जमीनी स्थिति
ऊर्जा बाजार में इस ताजा बिकवाली की मुख्य वजह सऊदी अरब की ओर से आपूर्ति बहाल होने की उम्मीदें हैं। सऊदी अरब ने स्पष्ट किया है कि ड्रोन हमले के बाद बंद की गई उसकी पूर्व-पश्चिम पाइपलाइन कुछ ही दिनों के भीतर अपनी लगभग आधी क्षमता पर वापस लौटने लगेगी। इसके अलावा, सऊदी अरब से कच्चे तेल के शिपमेंट में सुधार दर्ज किया गया है, जिसने बाजार में तेल की भारी कमी की चिंताओं को काफी हद तक कम कर दिया है। आपूर्ति की यह आसान स्थिति सीधे तौर पर कच्चे तेल की कीमतों को नीचे खींचने का काम कर रही है।
दूसरी तरफ, भू-राजनीतिक मोर्चे पर जोखिम अभी पूरी तरह टला नहीं है। यमन में ईरान समर्थित हूती समूह और सऊदी अरब के बीच तेज होती लड़ाई के कारण जियोपॉलिटिकल रिस्क प्रीमियम बाजार में मजबूती से बना हुआ है। जब तक क्षेत्रीय तनाव बना रहता है, तब तक कच्चे तेल में बहुत बड़ी गिरावट की संभावना सीमित मानी जा रही है, क्योंकि आपूर्ति व्यवस्था को कभी भी नया झटका लग सकता है।
तकनीकी स्तर और महत्वपूर्ण मूल्य दायरे
कारोबारियों के लिए चार्ट पर कई अहम समर्थन और प्रतिरोध स्तर बने हुए हैं। गिरावट की स्थिति में शुरुआती समर्थन 38.2 प्रतिशत फिबोनाची रिट्रेसमेंट के तहत $91.13 के स्तर पर मौजूद है। यदि बिकवाली और बढ़ती है, तो 50.0 प्रतिशत का स्तर $87.80 के करीब और 61.8 प्रतिशत रिट्रेसमेंट $84.47 के पास सहारा दे सकता है। इसके अलावा, $85.14 के आसपास स्थित 100-दिवसीय एसएमए इस व्यापक मांग क्षेत्र को मजबूत करता है।
ऊपरी स्तरों की बात करें तो तुरंत प्रतिरोध 23.6 प्रतिशत रिट्रेसमेंट के अनुसार लगभग $95.25 पर बना हुआ है। यदि इस बाधा को पार कर कीमत इसके ऊपर टिकने में सफल रहती है, तो यह तेजी के रुख वाले निवेशकों के लिए नया संकेत होगा और हाल के उच्चतम स्तर $101.91 की तरफ दोबारा बढ़ने का रास्ता खोल देगा। मौजूदा तकनीकी आंकड़ों के अनुसार पिवट बिंदु $95.11 पर है, जिसमें पहला प्रतिरोध आर1 $96.63 और दूसरा प्रतिरोध आर2 $98.75 पर है, जबकि पहला समर्थन एस1 $92.99 और दूसरा समर्थन एस2 $91.47 पर आंका गया है। 14-दिवसीय एटीआर 4.44 पर है जो दैनिक उतार-चढ़ाव को दर्शाता है, जबकि 20-दिवसीय समर्थन $79.62 और प्रतिरोध $106.75 के करीब आंका गया है।
डब्ल्यूटीआई क्रूड की प्रकृति और अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसका स्थान
वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बेचे जाने वाले कच्चे तेल की प्रमुख किस्मों में से एक है। वैश्विक बाजार में ब्रेंट और दुबई क्रूड के साथ डब्ल्यूटीआई शीर्ष तीन बेंचमार्क में शामिल है। इसे अपनी अपेक्षाकृत कम ग्रेविटी और कम सल्फर मात्रा के कारण 'लाइट' और 'स्वीट' श्रेणी का तेल कहा जाता है। यह बेहद उच्च गुणवत्ता वाला कच्चा तेल माना जाता है, जिसे रिफाइन करना काफी आसान होता है।
इस तेल का स्रोत संयुक्त राज्य अमेरिका में है और इसका वितरण कुशिंग हब के माध्यम से किया जाता है। ओक्लाहोमा स्थित इस कुशिंग केंद्र को पाइपलाइनों का वैश्विक चौराहा कहा जाता है। डब्ल्यूटीआई पूरी दुनिया के तेल उद्योग के लिए मूल्य निर्धारण का मानक है और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय मीडिया में इसके भाव को लगातार कोट किया जाता है।
मूल्य निर्धारण के आधार: मांग, डॉलर और ओपेक की नीतियां
अन्य संपत्तियों की तरह डब्ल्यूटीआई क्रूड की कीमतें भी बुनियादी तौर पर आपूर्ति और मांग के संतुलन पर निर्भर करती हैं। जब वैश्विक आर्थिक वृद्धि मजबूत होती है, तो उद्योगों और परिवहन में ईंधन की मांग बढ़ती है, जिससे कीमतें चढ़ती हैं। इसके विपरीत सुस्त आर्थिक विकास मांग को घटा देता है। इसके साथ ही राजनीतिक अस्थिरता, युद्ध और व्यापारिक प्रतिबंध आपूर्ति बाधित करके कीमतों में उछाल लाते हैं।
कच्चे तेल की दिशा तय करने में अमेरिकी डॉलर की विनिमय दर भी निर्णायक भूमिका निभाती है। चूंकि वैश्विक तेल का अधिकांश व्यापार अमेरिकी डॉलर में तय होता है, इसलिए कमजोर डॉलर गैर-अमेरिकी खरीदारों के लिए तेल को अधिक किफायती बना देता है, जिससे मांग बढ़ती है। वहीं मजबूत डॉलर खरीद लागत को बढ़ा देता है। इसके अलावा 12 सदस्य देशों वाले तेल निर्यातक देशों के संगठन ओपेक के फैसले भी उत्पादन कोटा तय करते हैं। ओपेक देशों की द्विवार्षिक बैठकों में जब उत्पादन कोटा घटाया जाता है, तो आपूर्ति तंग होने से कीमतें बढ़ती हैं, जबकि कोटा बढ़ाने पर विपरीत असर होता है। ओपेक समूह में जब रूस समेत दस अतिरिक्त गैर-ओपेक देश जुड़ते हैं, तो इस विस्तारित गठबंधन को ओपेक प्लस कहा जाता है।
साप्ताहिक इन्वेंट्री डेटा का बाजार पर प्रभाव
अमेरिकी ऊर्जा बाजार में तेल के भंडारों के आंकड़े कीमतों में नियमित उतार-चढ़ाव लाते हैं। अमेरिकन पेट्रोलियम इंस्टीट्यूट यानी एपीआई और एनर्जी इंफॉर्मेशन एजेंसी यानी ईआईए की ओर से जारी साप्ताहिक इन्वेंट्री रिपोर्ट बाजार के लिए बेहद अहम होती हैं। यदि डेटा तेल भंडारों में गिरावट दिखाता है, तो यह बढ़ती मांग या घटती आपूर्ति का संकेत होता है, जिससे कीमतें ऊपर जाती हैं। इसके विपरीत भंडारों में बढ़ोतरी अतिरिक्त आपूर्ति को दर्शाती है और कीमतों को नीचे गिराती है।
एपीआई अपनी रिपोर्ट हर मंगलवार को जारी करता है, जबकि सरकारी एजेंसी ईआईए अपनी रिपोर्ट उसके अगले दिन बुधवार को प्रस्तुत करती है। दोनों रिपोर्टों के परिणाम आमतौर पर एक जैसे होते हैं और 75 प्रतिशत मौकों पर इनके आंकड़े एक-दूसरे के 1 प्रतिशत के भीतर रहते हैं। ईआईए एक सरकारी संस्था है, इसलिए वित्तीय विश्लेषक और कारोबारी इसके आंकड़ों को अधिक प्रामाणिक और विश्वसनीय मानते हैं।
वैश्विक वित्तीय बाजारों की अन्य हलचलें
कमोडिटी के साथ-साथ मुद्रा और परिसंपत्ति बाजारों में भी मिलाजुला रुख देखा गया। एशियाई सत्र में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 0.7100 के ऊपर बना रहा, क्योंकि भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच अमेरिकी डॉलर ने जुलाई के अंत के बाद के अपने उच्चतम स्तर से वापसी की रफ्तार थाम ली। पीबीओसी द्वारा लोन प्राइम रेट में कोई बदलाव न करने का असर ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा पर पड़ा, लेकिन ट्रंप-शी शिखर सम्मेलन से पहले आरबीए द्वारा ब्याज दर में एक और बढ़ोतरी के दांव इसे सहारा दे रहे हैं।
डॉलर के मुकाबले जापानी येन में मामूली मजबूती आने से यूएसडी/जेपीवाई एशियाई कारोबार में 157.00 से नीचे फिसल गया। शुक्रवार को बैंक ऑफ जापान द्वारा दर जांच के बाद आधिकारिक हस्तक्षेप का जोखिम बढ़ गया है। इसके अलावा जापान में अवकाश होने और यूक्रेन तथा पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने से कारोबारी सतर्क रहे। सोने की बात करें तो शुक्रवार को $4,400 के पास विफल होने के बाद नया सप्ताह नरमी के साथ शुरू हुआ और यह $4,350 के करीब कारोबार करता दिखा। निवेशक मध्य पूर्व के संकट और महंगाई पर इसके असर का आकलन कर रहे हैं। क्रिप्टोकरेंसी बाजार में सोलाना ने पिछले सप्ताह 12 प्रतिशत की छलांग लगाने के बाद $111.70 के ऊपर बढ़त बनाए रखी। अमेरिकी घरेलू आंकड़ों में इस सप्ताह गुरुवार को आने वाले नए घरों की बिक्री के आंकड़ों पर नजर रहेगी, जहां जुलाई में तेज गिरावट के बाद अगस्त में 2.6 प्रतिशत की बढ़त के साथ 623 हजार की गति रहने का अनुमान है। वहीं बैंक ऑफ जापान ने 7-2 के बहुमत से अपनी अल्पकालिक ब्याज दर का लक्ष्य 1.00 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत कर दिया है, जो मौद्रिक नीति को सामान्य बनाने की दिशा में एक कदम है।














