घरेलू शेयर बाजार में सोमवार, 21 सितंबर के कारोबारी सत्र की शुरुआत शानदार बढ़त के साथ हुई, जहाँ प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी50 मजबूती के साथ हरे निशान पर कारोबार करते दिखे। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में नरमी, एशियाई बाजारों से मिले सकारात्मक संकेतों और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की नई लिवाली ने बाजार में निवेशकों का भरोसा मजबूत किया। हाल के दिनों में देखी गई तेज उतार-चढ़ाव की स्थिति के बाद यह उछाल घरेलू निवेशकों के लिए राहत लेकर आया है। बाजार प्रतिभागी अब आगे की दिशा तय करने के लिए कच्चे तेल की चाल, वैश्विक शेयर बाजारों के रुझान और विदेशी संस्थागत प्रवाह की स्थिरता पर करीबी नजर बनाए हुए हैं।
सेंसेक्स और निफ्टी50 के कारोबारी आंकड़े
सुबह 11:39 बजे तक बंबई स्टॉक एक्सचेंज का संवेदी सूचकांक बीएसई सेंसेक्स 454.43 अंक अथवा 0.61 प्रतिशत की मजबूती लेकर 74,749.39 अंक के स्तर पर कारोबार कर रहा था। सेंसेक्स का पिछला बंद स्तर 74,294.96 अंक था, जिसके मुकाबले यह आज सुबह 74,535.18 अंक पर खुला। कारोबार के दौरान इसने 74,790.21 अंक का ऊपरी स्तर छुआ, जबकि इसका निचला स्तर 74,454.18 अंक दर्ज किया गया।
वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के मानक सूचकांक एनएसई निफ्टी50 में भी शुरुआती तेजी का माहौल बना रहा। निफ्टी 52.15 अंक या 0.22 प्रतिशत की बढ़त के साथ 23,398.55 अंक के स्तर पर पहुंच गया। निफ्टी की शुरुआत 23,330.20 अंक पर हुई थी और सत्र के दौरान इसने 23,410.75 अंक का उच्च स्तर तथा 23,314.80 अंक का निचला स्तर देखा। बाजार में बने इस रुझान ने बेंचमार्क इंडेक्स को महत्वपूर्ण स्तरों के पार टिके रहने में मदद की है।
कच्चे तेल में गिरावट से अर्थव्यवस्था और बाजार को राहत
बाजार की इस तेजी का सबसे प्रमुख कारक अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी रहा। ब्रेंट क्रूड 2.25 प्रतिशत गिरकर 101.5 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर आ गया। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए तेल आयात पर काफी हद तक निर्भर है, इसलिए कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट घरेलू अर्थव्यवस्था के लिए सीधा सहारा बनती है। कच्चे तेल के सस्ता होने से महंगाई के दबाव में कमी आने, कंपनियों की लागत घटने और देश के चालू खाता घाटे पर दबाव कम होने की उम्मीद बंधी है। इन मैक्रोइकोनॉमिक कारणों से घरेलू शेयर बाजार में खरीदारी का माहौल तैयार हुआ।
तेल की कीमतों में आई इस गिरावट से उन कंपनियों के शेयरों में विशेष चमक देखने को मिली जो कच्चे माल या ऊर्जा लागत के प्रति अत्यधिक संवेदनशील हैं। पेंट्स, विमानन और सीमेंट क्षेत्र की कंपनियों के उत्पादन खर्च में कच्चे तेल का बड़ा हिस्सा होता है। तेल सस्ता होने के कारण शुरुआती कारोबार में एशियन पेंट्स, इंटरग्लोब एविएशन और अल्ट्राटेक सीमेंट जैसी प्रमुख कंपनियों के शेयरों में जोरदार लिवाली देखी गई और निवेशकों ने इन क्षेत्रों में अपनी स्थिति मजबूत की।
विदेशी संस्थागत निवेशकों की वापसी से मिला सहारा
बाजार की तेजी में विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी एफआईआई की वापसी ने भी अहम भूमिका निभाई। पिछले कुछ समय से बिकवाली के दबाव के बाद विदेशी संस्थागत निवेशकों ने शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार में 599.54 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की। विदेशी फंडों की यह खरीदारी बेंचमार्क सूचकांकों और लार्ज-कैप शेयरों में स्थिरता लाने के लिए बेहद अहम मानी जाती है।
विदेशी निवेशकों का प्रवाह बाजार के उन क्षेत्रों को सीधे प्रभावित करता है जिनका सूचकांकों में भारी भारांक है, जिनमें वित्तीय सेवाएं, प्रौद्योगिकी और ऊर्जा क्षेत्र शामिल हैं। विदेशी पूंजी के प्रवाह ने घरेलू बाजार के मूड को सकारात्मक बना दिया है। हालांकि, बाजार विश्लेषकों का मानना है कि तेजी को टिकाऊ बनाए रखने के लिए यह देखना जरूरी होगा कि विदेशी संस्थागत निवेशक आने वाले कारोबारी सत्रों में भी अपनी शुद्ध खरीदारी का सिलसिला जारी रखते हैं या नहीं।
वैश्विक बाजारों से मिले अनुकूल संकेत और तकनीकी स्थिति
सप्ताह के पहले दिन एशियाई बाजारों से मिले सकारात्मक संकेतों ने भी भारतीय बाजार को मजबूती दी। दक्षिण कोरिया का कोस्पी, शंघाई का एसएसई कंपोजिट और हांगकांग का हैंग सेंग बढ़त के साथ कारोबार कर रहे थे। इससे पहले शुक्रवार को अमेरिकी शेयर बाजार भी ज्यादातर बढ़त के साथ बंद हुए थे, जिससे वैश्विक स्तर पर निवेशकों की जोखिम उठाने की क्षमता में सुधार आया। इन सबके बीच निवेशक अमेरिका और चीन के बीच होने वाली आगामी वार्ताओं और पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव पर भी नजर रख रहे हैं, क्योंकि ये घटनाक्रम भविष्य में बाजार और कच्चे तेल की कीमतों को फिर से प्रभावित कर सकते हैं।
तकनीकी विश्लेषण के मोर्चे पर बाजार के जानकारों ने चार्ट पर सुधार के संकेत देखे हैं। बजाज ब्रोकिंग रिसर्च के अनुसार, सूचकांक ने एक छोटी बुलिश कैंडल बनाई है जिसमें हायर हाई और हायर लो पैटर्न दिखा है, जो अत्यधिक ओवरसोल्ड दायरे से पुलबैक जारी रहने का संकेत देता है। इसके अलावा 22,182 से 24,774 के हालिया स्विंग के 61.8 प्रतिशत रिट्रेसमेंट जोन के आसपास जारी कंसॉलिडेशन निचले स्तरों पर बेस बनने की संभावना को दर्शाता है। दैनिक और साप्ताहिक ऑसिलेटर ओवरसोल्ड जोन में बने रहने से आने वाले सत्रों में पुलबैक के और आगे बढ़ने की गुंजाइश खुली हुई है।















