घरेलू इक्विटी बाजारों में गुरुवार का कारोबारी दिन उतार-चढ़ाव से भरा रहा, जहां दोनों प्रमुख बेंचमार्क सूचकांक अलग-अलग दिशाओं में बंद हुए। अंतिम दौर के ऑक्शन सत्र के बाद मुख्य सूचकांकों में परस्पर विरोधी रुझान दिखा। एक तरफ बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का संवेदी सूचकांक मामूली नुकसान के साथ लाल निशान में फिसला, तो वहीं दूसरी तरफ नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के पचास प्रमुख शेयरों वाले सूचकांक ने अपनी गति बनाए रखी और एक महत्वपूर्ण तकनीकी आंकड़े के ऊपर टिकने में कामयाबी हासिल की।
प्रमुख सूचकांकों की चाल और इंडिया VIX में भारी नरमी
दिन की समाप्ति पर 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 21.86 अंकों के हल्के दबाव के साथ 74,314.59 के स्तर पर बंद हुआ। इसके विपरीत, एनएसई निफ्टी 50 में 53 अंकों की बढ़त दर्ज की गई और यह 23,270.60 के आंकड़े पर पहुंच गया। इस कारोबारी सत्र में सबसे उल्लेखनीय बात अस्थिरता के पैमाने पर दर्ज हुई। बाजार में भय और घबराहट के स्तर को मापने वाला सूचकांक इंडिया VIX लगभग 7 फीसदी लुढ़क गया, जिससे साफ संकेत मिलता है कि बाजार के सहभागी आने वाले समय में तेज झटकों की कम आशंका देख रहे हैं।
तेजी वाले शेयर: जीवन बीमा कंपनियों का दबदबा
कारोबार के दौरान चुनिंदा लार्जकैप और मिडकैप शेयरों में जोरदार लिवाली देखी गई, जिसमें बीमा क्षेत्र की कंपनियों ने बढ़त का नेतृत्व किया
- एचडीएफसी लाइफ: 5.05 प्रतिशत के तगड़े उछाल के साथ लाभ कमाने वालों की सूची में शीर्ष पर रहा।
- टीएमपीवी: 4.49 प्रतिशत चढ़कर बंद होने में सफल रहा।
- एसबीआई लाइफ: 4.06 प्रतिशत की ठोस छलांग लगाने में कामयाब रहा।
- डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज: 3.07 प्रतिशत की बढ़त के साथ मजबूत बंद हुआ।
- भेल: 2.51 प्रतिशत की तेजी दिखाने में सफल रहा।
- इंटरग्लोब एविएशन (इंडिगो): 2.36 प्रतिशत चढ़कर हरे निशान में रहा।
- टाटा स्टील: 2.34 प्रतिशत की मजबूती के साथ बंद हुआ।
- जियो फाइनेंशियल सर्विसेज: 1.98 प्रतिशत का इजाफा दर्ज करने में सफल रहा।
- इटर्नल एवं श्रीराम फाइनेंस: क्रमशः 1.69 प्रतिशत तथा 1.63 प्रतिशत ऊपर बंद हुए।
- एशियन पेंट्स: 1.55 प्रतिशत की तेजी दर्ज करने में कामयाब रहा।
इन कंपनियों के अतिरिक्त ऑटोमोबाइल निर्माता मारुति में 1.41 प्रतिशत, टाटा कंज्यूमर में 1.36 प्रतिशत और दवा कंपनी सिप्ला में 1.35 प्रतिशत की ठोस मजबूती दर्ज की गई। इसके विपरीत, कुछ दिग्गज शेयरों पर बिकवाली का असर दिखा। ओएनजीसी 1.85 प्रतिशत टूटकर बंद हुआ, जबकि टाइटन में 1.38 प्रतिशत की गिरावट आई। निजी क्षेत्र के सबसे बड़े ऋणदाता एचडीएफसी बैंक में 1.18 प्रतिशत का नुकसान रहा। वहीं हिंदुस्तान यूनिलीवर और कोल इंडिया दोनों 1.01-1.01 प्रतिशत गिरकर बंद हुए।
ब्रॉडर मार्केट में तेजी और सेक्टोरल रुझान
दिग्गज शेयरों की सुस्त चाल के मुकाबले व्यापक बाजार का प्रदर्शन काफी उत्साहजनक रहा। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में 0.92 प्रतिशत और स्मॉलकैप इंडेक्स में 0.71 प्रतिशत का उछाल दर्ज किया गया। बाजार के कुल रुझान को देखें तो लिवाली का पलड़ा भारी रहा। कुल 2,480 शेयर बढ़त हासिल करने में सफल रहे, जबकि इसके मुकाबले 1,487 कंपनियों के शेयर गिरावट के साथ बंद हुए।
क्षेत्रवार सूचकांकों में रियल्टी और फार्मास्यूटिकल सेक्टर सबसे आगे रहे, जिनमें 1.5 प्रतिशत से अधिक की बढ़त देखने को मिली। मीडिया सेक्टर 1.35 प्रतिशत ऊपर चढ़ा। ऑटोमोबाइल और मेटल सूचकांकों में भी करीब 1-1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई। हालांकि, बैंकिंग और सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) कंपनियों के शेयरों पर बिकवाली का दबाव देखा गया और ये लाल निशान में बंद हुए।
अमेरिकी केंद्रीय बैंक के कदम से आईटी और बैंकिंग पर असर
ग्लोबल स्तर पर मौद्रिक नीतियों का प्रभाव भी घरेलू बाजार के कुछ हिस्सों पर स्पष्ट रूप से दिखा। अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व ने तीन वर्ष से अधिक समय के बाद पहली बार नीतिगत ब्याज दरों में 25 बेसिस प्वाइंट्स (0.25 प्रतिशत) की बढ़ोतरी की है। इस फैसले ने आईटी और बैंकिंग काउंटरों के सेंटिमेंट को प्रभावित किया। इसके साथ ही, फेडरल रिजर्व के 18 नीति-निर्माताओं में से 16 अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि चालू वर्ष के अंत से पहले कम से कम एक और बार ब्याज दरों में वृद्धि की जा सकती है, जिससे विदेशी पूंजी प्रवाह और विकासोन्मुख शेयरों पर सतर्कता बनी हुई है।

















