सोने की 2026 की तेजी अब एक नए दौर में पहुंच गई है और सोसाइटी जेनराल के मुताबिक यह अब सिर्फ छोटी अवधि के सट्टेबाजी वाले सौदों पर टिकी नहीं है। बैंक के विश्लेषकों का कहना है कि इस वक्त बाजार के हर हिस्से से एक साथ खरीदारी हो रही है, गोल्ड ईटीएफ, पेशेवर फंड मैनेजर और फ्यूचर्स-ऑप्शंस बाजार के ट्रेडर, तीनों एक साथ सोने की तरफ झुके हैं। बैंक इसे सोने को लेकर भरोसे में आए एक गहरे और टिकाऊ बदलाव का संकेत मानता है।
सोसाइटी जेनराल के मुताबिक इस तेजी की शुरुआत इस साल की शुरुआत में हुए एक भू-राजनीतिक झटके से हुई थी। इसके बाद के महीनों में यह झटका धीरे-धीरे भौतिक सोना, फ्यूचर्स और ऑप्शंस, तीनों में एक साथ बढ़ते निवेश में बदल गया। आसान शब्दों में कहें तो अब मांग किसी एक तरह के खरीदार या किसी एक घटना की प्रतिक्रिया तक सीमित नहीं रह गई है। रिटेल निवेशक सिक्कों, बार और ईटीएफ यूनिट्स के जरिए सोना खरीद रहे हैं, बड़े फंड मैनेजर फ्यूचर्स पोजिशन बना रहे हैं और ऑप्शंस ट्रेडर भी इसी दौरान सक्रिय हैं।
अगस्त में गोल्ड ईटीएफ में रिकॉर्ड के करीब पहुंचा निवेश
सोसाइटी जेनराल के मुताबिक अगस्त में गोल्ड-बैक्ड ईटीएफ में 201 टन का शुद्ध निवेश आया, जो टन के हिसाब से रिकॉर्ड में अब तक का तीसरा सबसे बड़ा मासिक आंकड़ा है। इससे बड़ा मासिक निवेश सिर्फ दो बार देखा गया है, फरवरी 2009 में, जब अमेरिका में नई-नई शपथ लेने वाले ओबामा प्रशासन ने बड़ा प्रोत्साहन पैकेज घोषित किया था, और मार्च 2020 में, जब दुनियाभर में कोविड-19 को लेकर लॉकडाउन शुरू हुआ था। बैंक की नजर में यही दोनों घटनाएं अब भी वह पैमाना हैं, जिनसे गोल्ड ईटीएफ में आने वाले हर बड़े उछाल को मापा जाता है।
अगस्त के आंकड़े में दिलचस्प बात यह है कि यह किन आंकड़ों से आगे निकल गया। यह निवेश मार्च 2022 में आए ईटीएफ प्रवाह से भी ज्यादा रहा, यानी रूस के यूक्रेन पर हमले के ठीक बाद वाले हफ्तों से भी बड़ा, और सितंबर 2012 में हुए निवेश से भी ज्यादा, जब फेडरल रिजर्व ने अपने तीसरे क्वांटिटेटिव ईजिंग कार्यक्रम, यानी क्यूई3 का ऐलान किया था। क्यूई3 जैसे कार्यक्रमों में केंद्रीय बैंक बड़ी मात्रा में पैसा वित्तीय व्यवस्था में डालते हैं, जिससे मुद्रा की कीमत घटने का डर बढ़ता है और निवेशक परंपरागत रूप से इससे बचाव के लिए सोने का रुख करते हैं। इसी तरह रूस-यूक्रेन जैसी पूरी तरह की जंग सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ाती है, तो प्रोत्साहन पैकेज और लॉकडाउन जैसी घटनाएं मुद्रा और अर्थव्यवस्था को लेकर अनिश्चितता पैदा करती हैं, दोनों ही सोने की मांग बढ़ाने वाले कारण माने जाते रहे हैं। सोसाइटी जेनराल का कहना है कि अगस्त 2026 अब इन दोनों घटनाओं से भी आगे निकल चुका है, वह भी बिना किसी एक बड़े, सुर्खियां बटोरने वाले ट्रिगर के।
फंड मैनेजरों की रिकॉर्ड के करीब पहुंची लॉन्ग पोजिशनिंग
सिर्फ ईटीएफ प्रवाह ही पूरी तस्वीर नहीं है। सोसाइटी जेनराल फ्यूचर्स और ऑप्शंस बाजार की तरफ भी इशारा करता है, जहां पेशेवर फंड मैनेजरों ने सोने को लेकर एक बहुत बड़ा तेजी वाला दांव बना रखा है। नोशनल एक्सपोजर के हिसाब से, यानी कॉन्ट्रैक्ट्स की संख्या को सोने की कीमत और हर कॉन्ट्रैक्ट के आकार से गुणा करके निकाले गए आंकड़े में, फंड मैनेजरों की नेट लॉन्ग पोजिशनिंग अब रिकॉर्ड में दूसरी सबसे बड़ी है। इससे बड़ा आंकड़ा सिर्फ जनवरी 2026 में देखा गया था, जब सोना 5,400 डॉलर प्रति औंस के पार जाकर अपने सर्वकालिक उच्चतम स्तर पर पहुंचा था।
इस महीने के आंकड़े को खास बनाने वाली बात कीमतों का फासला है। इस वक्त सोना जनवरी के उस उच्चतम स्तर से करीब 1,000 डॉलर प्रति औंस नीचे कारोबार कर रहा है, फिर भी फंड मैनेजरों की तेजी वाली पोजिशनिंग की डॉलर वैल्यू अपने रिकॉर्ड स्तर के करीब बनी हुई है। सोसाइटी जेनराल के मुताबिक यह फासला बताता है कि इतनी बड़ी पोजिशनिंग को सिर्फ कीमतों के हिसाब से नहीं समझाया जा सकता। बैंक ने साफ शब्दों में कहा, "यह अब सिर्फ कीमतों की कहानी नहीं रह गई है।"
बैंक इसे व्यापक बदलाव क्यों मानता है
ईटीएफ के आंकड़ों और फ्यूचर्स पोजिशनिंग को साथ रखकर देखें तो सोसाइटी जेनराल के विश्लेषकों को एक ऐसा बाजार नजर आता है, जहां रिटेल निवेशक, संस्थागत फंड मैनेजर और डेरिवेटिव्स ट्रेडर, तीनों एक साथ सोने पर तेजी का दांव लगा रहे हैं। इतने अलग-अलग तरह के निवेशकों का एक साथ इस तरह झुकना आम बात नहीं है, और बैंक इसे इस बात का सबसे साफ संकेत मानता है कि सोने की 2026 की तेजी अब किसी एक घटना पर आधारित छोटी अवधि की सट्टेबाजी से आगे निकल चुकी है। इसके बजाय बैंक मौजूदा दौर को एक ऐसे चरण के तौर पर देखता है, जहां हर तरह के निवेशक ने अपने-अपने तौर पर यह नतीजा निकाला है कि सोना सिर्फ ट्रेड करने लायक नहीं, बल्कि रखने लायक संपत्ति है।
ईटीएफ में रिकॉर्ड के करीब पहुंचा निवेश और डेरिवेटिव्स में रिकॉर्ड के करीब पहुंची लॉन्ग पोजिशनिंग, दोनों का एक साथ होना, वह भी तब जब कीमतें जनवरी के सर्वकालिक उच्चतम स्तर से काफी नीचे हैं, यही वजह है कि सोसाइटी जेनराल का कहना है कि साल जैसे-जैसे आगे बढ़ा है, इस तेजी की बुनियाद संकरी नहीं बल्कि और चौड़ी होती गई है।



















