अंतरराष्ट्रीय जिंस बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई हालिया उछाल ने वैश्विक अर्थव्यवस्था में मुद्रास्फीति की चिंताओं को एक बार फिर से हवा दे दी है। इसके परिणामस्वरूप अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती की संभावनाओं पर ब्रेक लगता दिख रहा है, जिसका सीधा असर सोने की कीमतों पर पड़ा है। वैश्विक बाजार में सोने का भाव फिसलकर 4,300 डॉलर प्रति औंस के दो सप्ताह के निचले स्तर से नीचे आ गया। हालांकि, शुरुआती गिरावट के बाद यूरोपीय सत्र में कारोबार के दौरान सोने में मामूली सुधार देखा गया और यह 4,320 डॉलर प्रति औंस से ऊपर कारोबार करने में सफल रहा। निवेशकों की नजर अब अमेरिकी अर्थव्यवस्था से जुड़े प्रमुख आंकड़ों पर टिकी हुई है, जो बाजार की भावी दिशा तय करेंगे।
आईएनजी का विश्लेषण: मुनाफावसूली के बावजूद बना रहेगा सहारा
आईएनजी के जिंस रणनीतिकार वॉरेन पैटरसन और ईवा मन्थे के अनुसार, सोने में हालिया गिरावट अगस्त महीने की शानदार तेजी के बाद देखने को मिली है। अगस्त में सोने की कीमतों में लगभग 10% की बढ़त दर्ज की गई थी, जो जनवरी के बाद से इसका सबसे बेहतरीन मासिक प्रदर्शन था। इस जोरदार बढ़त के बाद बाजार में मुनाफावसूली होना एक स्वाभाविक प्रक्रिया है। रणनीतिकारों का तर्क है कि अल्पकालिक मुनाफावसूली का दौर जारी रह सकता है, लेकिन सोने के मौलिक कारक अब भी बेहद मजबूत बने हुए हैं।
वॉरेन पैटरसन और ईवा मन्थे ने स्पष्ट किया कि मध्यम अवधि में ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदें, दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों द्वारा लगातार सोने की खरीदारी और बनी हुई भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं सोने के भाव को एक मजबूत आधार प्रदान करेंगी। बाजार में आने वाली किसी भी बड़ी गिरावट को निवेशक नए सिरे से खरीदारी करने के अवसर के रूप में देख सकते हैं। सुरक्षित निवेश की मांग और अमेरिकी वित्तीय स्थिरता को लेकर बढ़ती चिंताओं ने निवेशकों का ध्यान सोने जैसी सख्त संपत्तियों की ओर आकर्षित बनाए रखा है।
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और अमेरिकी फेड का रुख
कच्चे तेल के बाजार में आई मजबूती ने बुलियन मार्केट के समीकरणों को प्रभावित किया है। बेंचमार्क वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड ऑयल में लगातार तीसरे दिन तेजी दर्ज की गई। पिछले छह कारोबारी सत्रों में से पांच में सकारात्मक रुख देखने को मिला है, जिससे एशियाई सत्र के दौरान बुधवार को कच्चा तेल 24 जुलाई के बाद के अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गया।
मध्य पूर्व में गहराते संघर्ष ने कच्चे तेल की आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं, जिससे तेल की कीमतें नई ऊंचाइयों को छू रही हैं। तेल की बढ़ती लागत से वैश्विक बाजार में मुद्रास्फीति का खतरा बढ़ गया है। इसी कारण वित्तीय बाजार में यह अटकलें तेज हो गई हैं कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व सितंबर की बैठक में ब्याज दरों में बढ़ोतरी का फैसला कर सकता है। फेड द्वारा कड़े मौद्रिक रुख के संकेतों ने अमेरिकी डॉलर को मजबूती दी है, जिससे सोने की बढ़त सीमित हो गई है।
डीजल क्रैक स्प्रेड ने बनाया नया ऐतिहासिक रिकॉर्ड
भले ही कच्चे तेल का ऊपरी बाजार शांत नजर आ रहा हो, लेकिन ईंधन बाजार में डीजल के आंकड़े कुछ अलग ही कहानी बयां कर रहे हैं। अमेरिका में अल्ट्रा-लो सल्फर डीजल फ्यूचर्स और WTI के बीच का अंतर, जिसे डीजल क्रैक स्प्रेड कहा जाता है, इतिहास में पहली बार 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गया। कारोबार के दौरान यह अंतर 102.00 डॉलर प्रति बैरल के सर्वकालिक उच्च स्तर तक पहुंच गया, जो रिफाइनिंग मार्जिन में भारी तनाव और ऊर्जा क्षेत्र में अंतर्निहित अनिश्चितता को दर्शाता है।
करेंसी मार्केट में उथल-पुथल: यूरो और पाउंड पर दबाव
अमेरिकी डॉलर में आई मजबूती का सीधा असर विदेशी मुद्रा बाजार पर पड़ा है। EUR/USD जोड़ी लगातार बिकवाली के दबाव में है। मंगलवार को नकारात्मक दायरे में बंद होने के बाद बुधवार को यह दो सप्ताह के निचले स्तर 1.1600 से नीचे कारोबार कर रही थी। मध्य पूर्व में तनाव के चलते निवेशकों ने सुरक्षित पनाहगाह मानी जाने वाली अमेरिकी मुद्रा का रुख किया है, जिससे यूरो बैकफुट पर आ गया है। बाजार प्रतिभागी अब अमेरिका के निजी क्षेत्र के रोजगार आंकड़ों की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
इसी तरह, GBP/USD जोड़ी बुधवार को शुरुआती यूरोपीय कारोबारी घंटों के दौरान 1.3500 के करीब आ गई। ब्रिटिश पाउंड के मुकाबले अमेरिकी डॉलर को सुरक्षित निवेश मांग का समर्थन मिल रहा है। विदेशी मुद्रा व्यापारी अब शुक्रवार को आने वाली अमेरिकी अगस्त रोजगार रिपोर्ट पर अपना ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, जो फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति के भावी कदमों को स्पष्ट करने में मदद करेगी।
बैंक ऑफ कनाडा का नीतिगत फैसला
अंतरराष्ट्रीय केंद्रीय बैंकिंग परिदृश्य में बैंक ऑफ कनाडा द्वारा बुधवार को अपनी नीतिगत ब्याज दर को 2.25% पर स्थिर रखने की व्यापक संभावना जताई जा रही है। यदि केंद्रीय बैंक दरों में कोई बदलाव नहीं करता है, तो यह लगातार सातवीं ऐसी बैठक होगी जिसमें नीतिगत दरों को यथावत रखा जाएगा। इससे पहले जुलाई की बैठक में भी बैंक ऑफ कनाडा ने उम्मीद के मुताबिक ब्याज दर को 2.25% पर ही बनाए रखा था।



















