ब्रिटेन में उपभोक्ताओं की ओर से होने वाली खरीदारी में सुस्ती देखने को मिली है। जुलाई के महीने में देश की कुल खुदरा बिक्री में महीने दर महीने आधार पर 0.5 प्रतिशत की गिरावट आई है। यह आंकड़ा आर्थिक विश्लेषकों के अनुमानों के बिल्कुल अनुरूप है। इससे पहले जून के महीने में खुदरा बिक्री में 0.7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई थी, जिसे पहले जारी किए गए 1.0 प्रतिशत के आंकड़े से संशोधित किया गया था। सरकारी एजेंसी ऑफिस फॉर नेशनल स्टैटिस्टिक्स की ओर से जारी ताजा आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि ब्रिटेन की घरेलू अर्थव्यवस्था में उपभोक्ताओं का खर्च फिलहाल सीमित बना हुआ है। इसके बावजूद अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में पॉउंड स्टर्लिंग ने अपनी मजबूती बनाए रखी है और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 1.3645 के आसपास कारोबार कर रहा है।
जुलाई खुदरा बिक्री में गिरावट: हेडलाइन और कोर आंकड़ों का विस्तृत विश्लेषण
खुदरा बिक्री के विस्तृत आंकड़ों पर नजर डालें तो ईंधन बिक्री को हटाकर मापी जाने वाली कोर खुदरा बिक्री में जुलाई के दौरान और अधिक बड़ी गिरावट देखने को मिली है। जुलाई में कोर खुदरा बिक्री महीने दर महीने आधार पर 0.9 प्रतिशत गिर गई। जून में इसमें 0.9 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई थी, जिसे प्राथमिक आंकड़े 1.1 प्रतिशत से घटाकर संशोधित किया गया था। बाजार को जुलाई में कोर खुदरा बिक्री में केवल 0.5 प्रतिशत की गिरावट का अनुमान था, लेकिन वास्तविक आंकड़े इस अनुमान से ज्यादा कमजोर रहे हैं।
सालाना आधार पर तुलना करने पर भी सुस्ती का यह रुझान साफ दिखाई देता है। जुलाई में वार्षिक खुदरा बिक्री वृद्धि घटकर 1.6 प्रतिशत पर आ गई, जबकि जून में यह 3.8 प्रतिशत रही थी। जून के आंकड़े को पहले 4.2 प्रतिशत बताया गया था। बाजार ने जुलाई के लिए 2.2 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि का अनुमान लगाया था। इसी तरह वार्षिक कोर खुदरा बिक्री जुलाई में 2.3 प्रतिशत की दर से बढ़ी, जो जून में दर्ज की गई 5.0 प्रतिशत (संशोधित 5.4 प्रतिशत) की वृद्धि दर से काफी कम है। विश्लेषकों का अनुमान था कि वार्षिक कोर खुदरा बिक्री 3.3 प्रतिशत रहेगी, लेकिन आंकड़े उम्मीद से कमजोर साबित हुए हैं।
बैंक ऑफ इंग्लैंड की मौद्रिक नीति और आर्थिक संकेतकों का असर
ब्रिटेन की राष्ट्रीय मुद्रा पॉउंड स्टर्लिंग के मूल्य को तय करने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका बैंक ऑफ इंग्लैंड की मौद्रिक नीति की होती है। बैंक ऑफ इंग्लैंड का मुख्य लक्ष्य अर्थव्यवस्था में मूल्य स्थिरता बनाए रखना है, जिसके तहत वह मुद्रास्फीति को 2 प्रतिशत के आसपास बनाए रखने का प्रयास करता है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए केंद्रीय बैंक का प्राथमिक हथियार ब्याज दरों में बदलाव करना होता है। जब देश में महंगाई दर बहुत अधिक हो जाती है, तो बैंक ऑफ इंग्लैंड ब्याज दरें बढ़ाकर ऋण को महंगा कर देता है ताकि खर्च पर लगाम लगाई जा सके। ऊंची ब्याज दरें वैश्विक निवेशकों को देश में पूंजी निवेश के लिए आकर्षित करती हैं, जिससे पॉउंड मजबूत होता है।
दूसरी ओर जब मुद्रास्फीति अत्यधिक नीचे गिर जाती है, तो यह आर्थिक सुस्ती का संकेत होता है। ऐसे समय में केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में कटौती करता है ताकि व्यापारिक गतिविधियों को प्रोत्साहन मिल सके। खुदरा बिक्री के अलावा देश का सकल घरेलू उत्पाद, विनिर्माण और सेवा क्षेत्र का PMI, रोजगार के आंकड़े और व्यापार संतुलन भी मुद्रा के उतार-चढ़ाव को तय करते हैं। सकारात्मक व्यापार संतुलन देश में निर्यात मांग को बढ़ाता है, जिससे मुद्रा को सीधा समर्थन मिलता है। कमजोर आंकड़े जारी होने पर पॉउंड में आमतौर पर नरमी देखने को मिलती है।
पॉउंड स्टर्लिंग का इतिहास और वैश्विक मुद्रा बाजार में स्थिति
पॉउंड स्टर्लिंग दुनिया की सबसे पुरानी मुद्रा मानी जाती है, जिसकी शुरुआत 886 ईस्वी में हुई थी। यह यूनाइटेड किंगडम की आधिकारिक मुद्रा है और अंतरराष्ट्रीय विदेशी मुद्रा बाजार में चौथी सबसे ज्यादा कारोबार की जाने वाली करेंसी है। 2022 के आंकड़ों के अनुसार, वैश्विक विदेशी मुद्रा लेनदेन में पॉउंड की हिस्सेदारी 12 प्रतिशत है और इसका दैनिक औसत कारोबार 630 अरब डॉलर का है।
वैश्विक मुद्रा बाजार में पॉउंड के सबसे प्रमुख ट्रेडिंग पेयर्स में GBP/USD शामिल है, जिसे ट्रेडर्स की भाषा में केबल कहा जाता है। यह कुल मुद्रा कारोबार का 11 प्रतिशत हिस्सा रखता है। इसके अलावा GBP/JPY (जिसे ड्रैगन के नाम से जाना जाता है) 3 प्रतिशत और EUR/GBP 2 प्रतिशत हिस्सेदारी रखते हैं। इन सभी करेंसी पेयर्स में होने वाले उतार-चढ़ाव ब्रिटेन की आर्थिक नीतियों से सीधे प्रभावित होते हैं।
अमेरिकी डॉलर की कमजोरी, ट्रेजरी बायबैक और वैश्विक बाजार का रुख
यूके से आए कमजोर खुदरा बिक्री आंकड़ों के बावजूद पॉउंड स्टर्लिंग के मजबूत बने रहने का मुख्य कारण अमेरिकी डॉलर में बनी व्यापक कमजोरी है। अमेरिकी वित्त विभाग ने हाल ही में तरलता सहायता योजना के तहत बॉन्ड बायबैक की सीमा को दोगुना करने का निर्णय लिया है। 9 सितंबर से लागू होकर 4 नवंबर तक चलने वाले इस कार्यक्रम के तहत 10 से 20 साल और 20 से 30 साल की परिपक्वता वाले सरकारी बांडों के बायबैक की अधिकतम सीमा को 2 अरब डॉलर से बढ़ाकर कम से कम 4 अरब डॉलर प्रति ऑपरेशन कर दिया गया है।
इसके साथ ही अमेरिका का राष्ट्रीय ऋण 40 ट्रिलियन डॉलर के ऐतिहासिक स्तर के बेहद करीब पहुंच गया है। वित्तीय विश्लेषक माइक महैरी ने मनी मेटल्स मिडवीक मेमो में इस बढ़ते कर्ज संकट और 1.4 ट्रिलियन डॉलर वाले प्राइवेट क्रेडिट मार्केट के खतरों की ओर इशारा किया है। इन परिस्थितियों ने अमेरिकी डॉलर पर दबाव डाला है। इसके चलते EUR/USD 1.1700 के स्तर की ओर बढ़ रहा है, जबकि सोना 200-दिवसीय सिंपल मूविंग एवरेज से ऊपर निकलकर 4,544 डॉलर प्रति औंस के नए उच्च स्तर पर पहुंच गया है।
GBP/USD का तकनीकी विश्लेषण और लाइव मार्केट आउटलुक
लाइव मार्केट आंकड़ों के अनुसार, GBP/USD की कीमत वर्तमान में 1.36 के स्तर पर कारोबार कर रही है, जो पिछले बंद भाव के मुकाबले 0.31 प्रतिशत की बढ़त दर्शाती है। पिछले 52 हफ्तों के दौरान यह करेंसी पेयर 1.30 से 1.38 के दायरे में रहा है। तकनीकी संकेतकों की बात करें तो 14-दिवसीय RSI 69 पर है, जो ओवरबॉट स्थिति के करीब मजबूती का संकेत देता है। MACD सूचकांक 0.01 पर है, जो सिग्नल लाइन 0.00 से ऊपर रहकर बुलिश रुझान दिखा रहा है।
मूविंग एवरेज विश्लेषण में EMA20 1.35 पर, EMA50 1.34 पर और EMA200 1.34 पर स्थित हैं। 50-दिवसीय EMA का 200-दिवसीय EMA से ऊपर होना एक गोल्डन क्रॉस पैटर्न की पुष्टि करता है, जो दीर्घकालिक तेजी का प्रतीक है। बोलिंजर बैंड्स 1.33 से 1.37 के बीच बने हुए हैं। ADX 30 के स्तर पर एक मजबूत ट्रेंड को दर्शाता है, जबकि स्टोकेस्टिक इंडिकेटर 93 पर ट्रेड कर रहा है। दिन के ट्रेडिंग स्तरों के लिए 1.36 मुख्य पिवट पॉइंट है, जिसमें पहला और दूसरा प्रतिरोध स्तर (R1 और R2) 1.37 पर तथा समर्थन स्तर (S1 और S2) 1.36 पर बने हुए हैं।



















