वैश्विक मुद्रा बाजारों में अमेरिकी डॉलर की तेज मजबूती ने कई प्रमुख मुद्राओं पर दबाव बना दिया है, जिसमें ब्रिटिश पाउंड सबसे आगे दिख रहा है। दो दिन पहले 1.3465 से 1.3501 के सीमित दायरे में कारोबार करने वाला पाउंड एशियाई सत्र के शुरुआती घंटों में 1.3480 पर ट्रेड कर रहा था, लेकिन न्यूयॉर्क कारोबारी सत्र के दौरान इसमें अचानक भारी गिरावट दर्ज की गई। पाउंड अपने 1.3410 के अहम सपोर्ट स्तर को तोड़ते हुए सीधे 1.3375 के निचले स्तर तक लुढ़क गया। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि इतनी तेज गिरावट अल्पकालिक रूप से काफी आक्रामक जरूर लग रही है, लेकिन स्थिरता आने से पहले पाउंड का रुख 1.3350 के स्तर का परीक्षण करने की ओर झुक सकता है। हालांकि, मौजूदा रुझान के बीच यह संभावना कम मानी जा रही है कि अगला बड़ा सपोर्ट स्तर 1.3300 तुरंत सामने आ जाएगा। अगर पाउंड में कोई भी तकनीकी सुधार देखने को मिलता है, तो उसे 1.3435 के नीचे बने रहना होगा, जबकि 1.3410 का स्तर अब एक मामूली रुकावट यानी रेजिस्टेंस बन चुका है।
मध्यम अवधि में पाउंड का तकनीकी ढांचा और प्रमुख रुकावटें
एक से तीन हफ्तों के व्यापक तकनीकी दृष्टिकोण से देखा जाए तो पाउंड पर पिछले शुक्रवार से ही नकारात्मक रुख बना हुआ है। 15 सितंबर को जब स्पॉट मूल्य 1.3500 के आसपास था, तब मूल्य व्यवहार ने आगे और कमजोरी के स्पष्ट संकेत दिए थे। उस समय यह अनुमान था कि 1.3410 का स्तर इतनी जल्दी नहीं टूटेगा, लेकिन न्यूयॉर्क सत्र की तेज बिकवाली ने इस धारणा को गलत साबित कर दिया। लगातार कमजोर हो रहे मूल्य व्यवहार से यह संकेत मिलता है कि पाउंड 1.3350 की ओर और खिसक सकता है। बाजार में इस स्तर के टूटने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। हालांकि, बेहद ओवरसोल्ड परिस्थितियों को देखते हुए यह देखना अहम होगा कि क्या पाउंड में अगले तकनीकी लक्ष्य 1.3300 तक पहुंचने की पर्याप्त गति बची है या नहीं। तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक पाउंड 1.3460 के मजबूत रेजिस्टेंस से नीचे कारोबार करता रहेगा, तब तक इसके प्रति नकारात्मक दृष्टिकोण बरकरार रहेगा, जबकि यह अहम रेजिस्टेंस स्तर पहले 1.3540 पर स्थित था।
ऑस्ट्रेलियाई डॉलर में लौटी खरीदारी और जोखिम धारणा में सुधार
दूसरी तरफ, ऑस्ट्रेलियाई डॉलर में गुरुवार के एशियाई सत्र के दौरान नए सिरे से लिवाली देखने को मिली। अमेरिकी फेडरल रिजर्व के सख्त मौद्रिक रुख के बाद अमेरिकी डॉलर जुलाई के अंत के बाद के अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गया था, लेकिन इस तेजी के थमते ही एयूडी/यूएसडी (AUD/USD) जोड़ी ने 0.7100 का आंकड़ा दोबारा हासिल कर लिया। रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की अटकलों और अमेरिका तथा ईरान के बीच कूटनीतिक प्रयासों की उम्मीदों ने वैश्विक जोखिम धारणा को सहारा दिया है। जोखिम के प्रति संवेदनशील मानी जाने वाली ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा को इन भू-राजनीतिक और केंद्रीय बैंक से जुड़ी उम्मीदों से सीधा फायदा पहुंचा है, जिससे डॉलर के मुकाबले इसे जरूरी समर्थन मिला।
बैंक ऑफ जापान की बैठक से पहले येन की स्थिति और नीतिगत बदलाव
यूएसडी/जेपीवाई (USD/JPY) जोड़ी गुरुवार को एशियाई सत्र में 156.00 के स्तर से नीचे की संक्षिप्त गिरावट से उबरने की कोशिश करती दिखी। पिछले दिन करीब दो हफ्ते के उच्चतम स्तर को छूने के बाद यह जोड़ी अपनी तीन दिनों की लगातार बढ़त के सिलसिले को थामने की कगार पर है। फेडरल रिजर्व की बैठक के बाद अमेरिकी डॉलर सात हफ्तों के उच्च स्तर पर पहुंचकर ठहरा हुआ है, जबकि बैंक ऑफ जापान द्वारा अपनी मौद्रिक नीति को सामान्य बनाने की दिशा में सख्त रुख अपनाने की संभावना ने जापानी येन को सहारा दिया है। इससे यूएसडी/जेपीवाई की बढ़त सीमित हो गई है और अब वित्तीय बाजारों का पूरा ध्यान शुक्रवार को आने वाले बैंक ऑफ जापान के नीतिगत फैसले पर टिक गया है। जापान की बेहद कम ब्याज दरों ने एक दशक से अधिक समय तक दुनिया भर में खरबों डॉलर के वैश्विक निवेश को फाइनेंस करने में मदद की थी, जिससे जापानी येन दुनिया के सबसे सस्ते फंडिंग स्रोतों में से एक बन गया था। चूंकि अधिकांश प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं ने ब्याज दरें बढ़ाई थीं, तब भी जापान वैश्विक स्तर पर एक अपवाद बना रहा। अब बैंक ऑफ जापान द्वारा इस सप्ताह नीति सख्त किए जाने की संभावनाओं के साथ ही यह पुराना फायदा एक नए दौर में प्रवेश कर सकता है।
सोने में बिकवाली का दबाव और फेडरल रिजर्व का असर
कीमती धातुओं के बाजार में सोना गुरुवार सुबह 4,300 डॉलर के स्तर से ऊपर नए सिरे से बिकवाली के दबाव का सामना कर रहा है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व के सख्त मौद्रिक नीति बयानों के तुरंत बाद सोना 4,235 डॉलर के छह हफ्तों के निचले स्तर तक फिसल गया था। उस निचले स्तर से शुरू हुई रिकवरी अब 4,300 डॉलर से ऊपर अटक गई है और निवेशकों में मुनाफावसूली का रुख देखा जा रहा है। अमेरिकी केंद्रीय बैंक की ब्याज दरों को लेकर आक्रामक रणनीति ने गैर-ब्याज वाली संपत्तियों पर दबाव बनाए रखा है, जिससे सोने की आगे की तेजी सीमित दायरे में फंसी नजर आ रही है।


















