घरेलू वायदा बाजार में गुरुवार के कारोबारी सत्र के दौरान कीमती धातुओं पर भारी बिकवाली का दबाव देखा गया। अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की घोषणा के बाद भारतीय बाजार में सर्राफा कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी एमसीएक्स पर सोने के भाव में 1,300 रुपये से अधिक की गिरावट आई, जबकि चांदी की कीमतों में करीब 2,000 रुपये का बड़ा गोता लगा। बाजार में निवेशक अमेरिकी केंद्रीय बैंक के कड़े मौद्रिक रुख और वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की चाल का आकलन कर रहे हैं।
एमसीएक्स पर सर्राफा बाजार में गिरावट का रुख
घरेलू कमोडिटी एक्सचेंज एमसीएक्स पर शुरुआती कारोबार में सोना और चांदी शीर्ष नुकसान वाले सौदों में शामिल रहे। एमसीएक्स पर 10 ग्राम सोने का भाव 1,300 रुपये से अधिक गिरकर 1,51,150 रुपये के आसपास संघर्ष करता दिखा। दिन के कारोबार के दौरान सोने ने 1,50,483 रुपये प्रति 10 ग्राम का निचला स्तर भी छुआ था। इसके साथ ही चांदी के अनुबंधों में भी भारी बिकवाली दर्ज की गई। 1 किलोग्राम चांदी की कीमत लगभग 2,000 रुपये टूटकर 2,32,846 रुपये के स्तर पर कारोबार कर रही थी, जबकि सत्र के दौरान चांदी ने 2,30,221 रुपये प्रति किलोग्राम का निचला स्तर छू लिया था।
कमोडिटी बाजार के अन्य क्षेत्रों में मिला-जुला रुझान देखने को मिला। जहां सीसा यानी लेड में उतार-चढ़ाव बना रहा, वहीं कच्चे तेल के भाव पिछले दिन की तेज गिरावट के बाद संभलते नजर आए। बेस मेटल्स और ऊर्जा सेगमेंट में तांबा, जस्ता और प्राकृतिक गैस लाभ दर्ज करने वाली शीर्ष वस्तुओं में शामिल रहे।
अमेरिकी केंद्रीय बैंक ने तीन साल में पहली बार बढ़ाई ब्याज दरें
कीमती धातुओं में इस उथल-पुथल की मुख्य वजह अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति समिति यानी एफओएमसी का फैसला रहा। केविन वार्श के नेतृत्व वाली एफओएमसी ने सर्वसम्मति से 12-0 के मत से नीतिगत फेड दरों में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी कर दी। इस निर्णय के बाद फेड फंड्स दर बढ़कर 3.75% से 4% के दायरे में पहुंच गई है। यह पिछले तीन वर्षों में अमेरिकी केंद्रीय बैंक द्वारा की गई पहली ब्याज दर वृद्धि है।
फेडरल रिजर्व ने स्पष्ट संकेत दिया है कि यदि महंगाई का दबाव बना रहा, तो 2026 के अंत से पहले एक और दर वृद्धि पर विचार किया जा सकता है। एफओएमसी इस समय ऊंची महंगाई से जूझ रही है, जिसे कच्चे तेल की हालिया तेजी ने और जटिल बना दिया है। इस फैसले के औचित्य को स्पष्ट करते हुए केविन वार्श ने कहा, "The plain fact is that inflation is too high and has been for too long." वार्श ने दोहराया कि एफओएमसी का सबसे प्रमुख ध्यान अपने अधिदेश के तहत मूल्य स्थिरता बहाल करने पर केंद्रित है। हालांकि, अमेरिकी केंद्रीय बैंक के इस कड़े कदम की आलोचना व्हाइट हाउस ने की है।
बाजार विश्लेषकों का नजरिया और ट्रेजरी यील्ड की स्थिति
अर्थ भारत ग्लोबल मल्टीप्लायर फंड के फंड मैनेजर नचिकेत सावरिकर के अनुसार, फेडरल रिजर्व द्वारा दरों में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी की उम्मीद वित्तीय बाजार पहले से ही कर रहे थे। उन्होंने कहा कि मुद्रास्फीति फेड के 2% के तय लक्ष्य से काफी ऊपर बनी हुई है, आर्थिक वृद्धि मजबूत है और श्रम बाजार अपेक्षाकृत स्थिर है, ऐसे में केंद्रीय बैंक को मूल्य स्थिरता बहाल करने की अपनी प्रतिबद्धता दिखानी ही थी।
नचिकेत सावरिकर ने रेखांकित किया कि वित्तीय बाजारों के लिए असली सवाल लंबी अवधि की ब्याज दरों के रुख को लेकर है। 10 साल की अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड फरवरी के निचले स्तरों से लगभग 100 आधार अंक ऊपर आ चुकी है, जिसमें जुलाई के बाद से ही करीब 50 आधार अंकों की वृद्धि दर्ज की गई है। उन्होंने राय व्यक्त की कि उच्च मुद्रास्फीति को देखते हुए कुछ हद तक यील्ड में बढ़ोतरी स्वाभाविक थी, लेकिन हालिया वृद्धि के एक बड़े हिस्से से बचा जा सकता था यदि फेडरल रिजर्व ने जून या जुलाई में ही अल्पकालिक ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर दी होती।
वैश्विक बाजार में हाजिर सोने और चांदी का हाल
अंतरराष्ट्रीय बाजार में गुरुवार के शुरुआती घंटों के दौरान हाजिर सोना और चांदी करीब 1% उछलकर क्रमशः लगभग 4,300 डॉलर और 64 डॉलर प्रति औंस के करीब पहुंचे थे। हालांकि, अमेरिकी केंद्रीय बैंक द्वारा दरों में बढ़ोतरी और साल के अंत तक एक और संभावित बढ़ोतरी के संकेत देने के बाद पिछले सत्र की बढ़त गंवाकर हाजिर सोना 4,300 डॉलर के स्तर से नीचे आ गया।
इसी तरह हाजिर चांदी में 1% की तेजी के बावजूद यह धातु अंतरराष्ट्रीय बाजार में 64 डॉलर प्रति औंस के स्तर से थोड़ा नीचे कारोबार करती नजर आई। बहुमूल्य धातुओं को निचले स्तरों पर उस समय कुछ समर्थन मिला जब मध्य पूर्व में आपूर्ति बाधाओं को लेकर चिंताएं कम होने से कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आई।
कच्चे तेल की कीमतें और मध्य पूर्व आपूर्ति परिदृश्य
कच्चे तेल के अंतरराष्ट्रीय मोर्चे पर अमेरिकी डब्ल्यूटीआई क्रूड और ब्रेंट क्रूड में मामूली गिरावट देखी गई, फिर भी वे क्रमशः 102 डॉलर और 106 डॉलर प्रति बैरल के ऊंचे स्तरों पर मजबूती से बने रहे। ऊर्जा बाजार में आई हालिया तेजी के बीच मध्य पूर्व से आपूर्ति बहाली के सकारात्मक घटनाक्रम सामने आए हैं।
सऊदी अरब अपनी ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन क्षमता के लगभग आधे हिस्से को कुछ ही दिनों के भीतर बहाल करने और अगले छह हफ्तों में इसे पूरी तरह से चालू करने के लक्ष्य पर काम कर रहा है। इसके साथ ही अमेरिकी ऊर्जा सचिव क्रिस राइट ने जानकारी दी कि इस सप्ताह की शुरुआत में होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर 1.8 करोड़ बैरल कच्चा तेल और पेट्रोलियम उत्पाद सुरक्षित गुजरे हैं। इन घटनाक्रमों से तेल आपूर्ति पर तात्कालिक जोखिम घटा है, जिससे कमोडिटी और मुद्रा बाजार दोनों पर गहरा असर पड़ रहा है।


















