अमेरिकी डॉलर के भविष्य और वैश्विक मुद्रा बाजारों की दिशा को लेकर निवेशकों की नजरें अब पूरी तरह से फेडरल रिजर्व के आगामी कदमों और उसके अधिकारियों के बयानों पर टिकी हुई हैं। बाजार के जानकारों का मानना है कि केंद्रीय बैंक किस तरह से अपनी बात रखता है, उसी से तय होगा कि आने वाले दिनों में डॉलर की चाल कैसी रहने वाली है। हाल के दिनों में महंगाई के मोर्चे पर राहत मिलने के बाद जुलाई के महीने में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका घटकर मात्र 10 प्रतिशत तक आ गई थी, लेकिन कच्चे तेल के दाम बढ़ने के कारण मुद्रास्फीति को लेकर चिंताएं एक बार फिर गहरा गई हैं, जिसके चलते यह संभावना दोबारा बढ़कर 35 प्रतिशत तक पहुंच गई है।
बाजार में इस बदलाव का सीधा असर देखने को मिल रहा है। जहां पहले निवेशक जुलाई के महीने में दरों में किसी भी तरह की बढ़ोतरी को एक बहुत दूर की संभावना मानकर चल रहे थे, वहीं अब हालात बदल चुके हैं और इसे एक वास्तविक जोखिम के रूप में देखा जा रहा है। यदि फेडरल रिजर्व दरों को स्थिर रखता है, जिसकी उम्मीद अधिकांश विश्लेषक कर रहे हैं, तो ऐसी स्थिति में बाजार की पूरी प्रतिक्रिया इस बात पर निर्भर करेगी कि केंद्रीय बैंक अपनी बात किस लहजे में दुनिया के सामने रखता है।
यदि नीतिगत दरों में कोई बदलाव नहीं किया जाता है लेकिन बैंक का रुख आक्रामक बना रहता है, तो इससे भविष्य में दरों में होने वाली बढ़ोतरी की उम्मीदें आगे के महीनों की ओर खिसक सकती हैं। हालांकि इससे साल 2027 के मध्य तक तयशुदा कुल लगभग 55 आधार अंकों की कसक पर कोई बड़ा असर पड़ने की संभावना नहीं है। इस परिस्थिति में अमेरिकी डॉलर को पर्याप्त समर्थन मिलने की पूरी उम्मीद है और वह मजबूत स्थिति में बना रह सकता है।
सोमवार को सप्ताह के पहले कारोबारी दिन यूरोपीय सत्र के दौरान विदेशी मुद्रा बाजार में विभिन्न मुद्राओं की चाल में खास हलचल देखने को मिली। ब्रिटिश पाउंड और अमेरिकी डॉलर के जोड़े यानी GBP/USD में पिछले शुक्रवार को तीन हफ्ते के निचले स्तर से आई मामूली रिकवरी का सिलसिला आगे भी जारी रहा और इसमें मजबूत तेजी दर्ज की गई। यह लगातार दूसरा दिन है जब इस जोड़े में बढ़त देखने को मिल रही है और यह यूरोपीय कारोबार के दौरान 1.3350 के आसपास के स्तर पर कारोबार कर रहा है।
इस तेजी के पीछे मुख्य वजह मध्य पूर्व के संघर्ष में कुछ समय के लिए ठहराव आना और अमेरिकी डॉलर का बड़े पैमाने पर कमजोर होना है। इस बीच व्यापारी इस सप्ताह के अंत में आने वाले फेडरल रिजर्व और बैंक ऑफ इंग्लैंड की नीतिगत घोषणाओं का इंतजार कर रहे हैं और उनके लिए तैयारी कर रहे हैं।
दूसरी ओर, यूरो और अमेरिकी डॉलर का जोड़ा यानी EUR/USD भी सोमवार को यूरोपीय सत्र के दौरान 1.1400 के आंकड़े के करीब काफी बढ़त के साथ टिका हुआ है। दिन के कारोबार में आई इस मजबूती के पीछे मुख्य रूप से अमेरिकी डॉलर का कमजोर होना है, जिस पर पांच महीने पुराने अमेरिका-ईरान संघर्ष के कूटनीतिक समाधान की उम्मीदों से नया दबाव पड़ा है और आशावाद बढ़ा है।



















