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अमरीकी ट्रेजरी ने बॉन्ड बायबैक बढ़ाकर $4 बिलियन किया, $40 ट्रिलियन कर्ज के बीच डॉलर पर बढ़ा दबावबाज़ार
21 अग॰ 2026, 12:11 pm (1 घंटे पहले)· 1

अमरीकी ट्रेजरी ने बॉन्ड बायबैक बढ़ाकर $4 बिलियन किया, $40 ट्रिलियन कर्ज के बीच डॉलर पर बढ़ा दबाव

अमरीकी ट्रेजरी ने लंबी अवधि के बॉन्ड बायबैक को दोगुना कर कम से कम $4 बिलियन प्रति ऑपरेशन कर दिया है। $40 ट्रिलियन तक पहुंचते राष्ट्रीय कर्ज के बीच इस फैसले से अमरीकी डॉलर में गिरावट देखी जा रही है।

वैश्विक वित्तीय बाजारों में उस समय एक नया मोड़ देखने को मिला, जब अमरीकी ट्रेजरी विभाग ने अपने तय कैलेंडर से इतर जाते हुए लिक्विडिटी सपोर्ट बायबैक ऑपरेशन्स के बड़े विस्तार का ऐलान कर दिया। सरकार ने लंबी अवधि वाले सरकारी बॉन्ड्स की खरीदारी की अधिकतम सीमा को $2 बिलियन से बढ़ाकर कम से कम $4 बिलियन प्रति ऑपरेशन करने का फैसला किया है। बुधवार को भारतीय समयानुसार देर शाम (12:32 GMT) आए इस अप्रत्याशित फैसले का सीधा असर 10 से 20 साल और 20 से 30 साल की मैच्योरिटी वाले बॉन्ड सेक्टर्स पर पड़ेगा। यह विस्तारित कार्यक्रम 9 सितंबर से शुरू होकर 4 नवंबर तक चलेगा। इस फैसले के सामने आते ही अंतरराष्ट्रीय विदेशी मुद्रा बाजार और कमोडिटी मार्केट में हलचल तेज हो गई, जहां अमरीकी डॉलर में लगातार कमजोरी दर्ज की गई और यूरो, ब्रिटिश पाउंड के साथ-साथ सोने की कीमतों में मजबूती देखने को मिली।

अमरीकी ट्रेजरी का अप्रत्याशित कदम और बॉन्ड बायबैक का गणित

ट्रेजरी विभाग द्वारा 12:32 GMT पर ली गई यह नीतिगत पहल अमरीकी कर्ज बाजार के दीर्घकालिक हिस्से को सीधे सहारा देने की कोशिश है। 10 से 20 वर्ष और 20 से 30 वर्ष की अवधि वाले बॉन्ड सेक्टर्स में ऑपरेशन्स की सीमा $2 बिलियन से बढ़ाकर $4 बिलियन किए जाने से बाजार में लंबी अवधि के बॉन्ड्स की तरलता बढ़ेगी। यह नया नियम 9 सितंबर से लागू होगा और 4 नवंबर तक जारी रहेगा, यानी पूरे आठ हफ्तों तक बाजार को यह अतिरिक्त तरलता सहायता मिलती रहेगी। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि सामान्य शेड्यूलिंग से हटकर किया गया यह ऐलान दिखाता है कि सरकार लंबी अवधि की ब्याज दरों (यील्ड) में हो रही बढ़ोतरी को नियंत्रित करने के लिए कितनी सतर्क है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य कर्ज बाजार में संतुलन बनाए रखना और ब्याज दरों में अचानक आने वाले उछाल को रोकना है।

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2011–12 के प्रसिद्ध 'ऑपरेशन ट्विस्ट' से तुलना

बाजार विश्लेषक इस फैसले की तुलना 2011 और 2012 के दौरान चलाए गए ऐतिहासिक 'ऑपरेशन ट्विस्ट' (मैच्योरिटी एक्सटेंशन प्रोग्राम) से कर रहे हैं। उस 15 महीने के कार्यक्रम में अमरीकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व ने लंबी अवधि की ब्याज दरों को नीचे लाने के लिए छोटी अवधि वाले बॉन्ड्स बेचे थे और उनसे मिली राशि से लंबे समय वाले बॉन्ड्स खरीदे थे। उस समय फेड ने 3 साल तक की मैच्योरिटी वाले $667 बिलियन मूल्य के शॉर्ट-टर्म बॉन्ड बेचकर 6 से 30 साल की अवधि वाले लॉन्ग-टर्म बॉन्ड खरीदे थे। वह कार्यक्रम हर महीने $44.5 बिलियन के औसत से लगातार 15 महीनों तक चलाया गया था।

आर्थिक अध्ययनों से पता चलता है कि 2011–12 के ऑपरेशन ट्विस्ट ने 10 वर्षीय अमरीकी ट्रेजरी बॉन्ड की यील्ड को लगभग 23 बेसिस पॉइंट्स तक नीचे धकेल दिया था। हालांकि, विश्लेषकों का आकलन है कि मौजूदा लिक्विडिटी सपोर्ट बायबैक विस्तार का प्रभाव उतना बड़ा नहीं होगा। चूंकि इस बार बायबैक का कुल आकार केंद्रीय बैंक के पिछले बहीखाता अभियानों की तुलना में सीमित है, इसलिए दीर्घकालिक ब्याज दरों पर इसका असर बहुत मामूली या सीमित रहने की ही संभावना जताई जा रही है।

नीतिगत विरोधाभास: ऊंची ब्याज दरें या कमजोर डॉलर?

ट्रेजरी के इस हस्तक्षेप ने अमरीकी आर्थिक नीतियों में जारी एक गहरे विरोधाभास को भी उजागर किया है। जब वॉरश जैसे विशेषज्ञ यह तर्क देते हैं कि महंगाई से लड़ने का काम मुख्य रूप से स्वतंत्र बाजार ताकतों पर छोड़ देना चाहिए, लेकिन जब-जब यील्ड बढ़ती है तब-तब ट्रेजरी खुद हस्तक्षेप करने लगती है, तो यह सवाल उठना लाजमी है कि महंगाई पर लगाम लगाने की जिम्मेदारी आखिर किसकी है। सरकार के इस रवैये से बाजार प्रतिभागियों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा होती है।

इसके अलावा, बुधवार का घटनाक्रम यह साफ संकेत देता है कि अमरीकी ट्रेजरी के सामने जब दो विकल्प मौजूद थे, या तो ऊंची ब्याज दरों को स्वीकार किया जाए या फिर कमजोर डॉलर को, तो उसने कमजोर डॉलर का रास्ता चुनना बेहतर समझा। लंबे समय वाले बॉन्ड्स की यील्ड को दबाने के लिए बायबैक का सहारा लेने से अमरीकी मुद्रा की ब्याज दर संबंधी बढ़त कम हो जाती है। यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजारों में डॉलर के मुकाबले अन्य वैश्विक मुद्राओं का पलड़ा भारी होता दिख रहा है।

विदेशी मुद्रा बाजार की हलचल: पाउंड और यूरो में मजबूती

अमरीकी ट्रेजरी के ऐलान के बाद विदेशी मुद्रा बाजार में त्वरित प्रतिक्रिया देखने को मिली। शुक्रवार को यूरोपीय ट्रेडिंग सेशन के दौरान GBP/USD करेंसी पेयर 1.3650 के स्तर के आसपास मजबूती के साथ कारोबार करता नजर आया। ब्रिटेन के खुदरा बिक्री (रिटेल सेल्स) के आंकड़े उम्मीद से कमजोर रहने के बावजूद पाउंड ने अपनी बढ़त बनाए रखी। पाउंड की यह मजबूती दर्शाती है कि अमरीकी डॉलर की व्यापक कमजोरी का असर ब्रिटिश अर्थव्यवस्था के सुस्त आंकड़ों पर भी भारी पड़ रहा है।

इसी तरह, EUR/USD करेंसी पेयर भी यूरोपीय सत्र में 1.1700 के आसपास अपनी साप्ताहिक बढ़त को संभालता हुआ दिखा। मुद्रा बाजार के निवेशक जर्मनी, पूरे यूरोज़ोन और अमरीका से आने वाले अगस्त महीने के शुरुआती पर्चेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI) आंकड़ों की प्रतीक्षा कर रहे हैं। इन प्रमुख आर्थिक आंकड़ों की घोषणा से पहले बाजार में सतर्कता का माहौल रहने के बावजूद, डॉलर की लगातार नरमी ने यूरो को एक मजबूत आधार प्रदान किया है, जिससे यह प्रमुख वैश्विक मुद्रा अपने ऊपरी स्तरों पर टिकी हुई है।

कीमती धातुओं में उछाल: सोना $4,550 के पार निकला

अमरीकी डॉलर की गिरावट का सीधा फायदा कीमती धातुओं को मिला है, जहां स्पॉट गोल्ड जून की शुरुआत के बाद के अपने उच्चतम स्तर के करीब टिका रहा। शुक्रवार को यूरोपीय सत्र की शुरुआत में सोना $4,550 प्रति औंस के स्तर से ऊपर कारोबार करता देखा गया। तकनीकी मोर्चे पर, सोने की कीमतों ने अपने 200-दिवसीय सिंपल मूविंग एवरेज (SMA) के महत्वपूर्ण स्तर को पार करते हुए तेजी के नए संकेत दिए हैं। डॉलर के कमजोर होने और बॉन्ड यील्ड में नरमी आने से सोने जैसी बिना ब्याज वाली संपत्तियों की मांग में इजाफा हुआ है।

बाजार के कारोबारियों ने हाल ही में जारी अमरीकी मुद्रास्फीति आंकड़ों के बाद ब्याज दरों को लेकर अपनी उम्मीदों को बदला है। पिछले हफ्ते आए महंगाई आंकड़ों में मूल्य वृद्धि की रफ्तार धीमी होने के संकेत मिले थे, जिसके बाद व्यापारियों ने फेडरल रिजर्व द्वारा तुरंत ब्याज दरें बढ़ाने की संभावनाओं को काफी घटा दिया है। दरों में बढ़ोतरी की कम होती आशंका और ट्रेजरी द्वारा बॉन्ड बाजार में किए गए हस्तक्षेप ने मिलकर सोने की कीमतों के लिए एक अनुकूल माहौल तैयार कर दिया है।

वित्तीय संकट की आहट: $40 ट्रिलियन का राष्ट्रीय कर्ज और प्राइवेट क्रेडिट का जोखिम

बॉन्ड बाजार की यह पूरी उथल-पुथल अमरीका के बढ़ते राष्ट्रीय कर्ज के बीच घटित हो रही है। अमरीका उस आंकड़े के बेहद करीब पहुंच रहा है जो कुछ समय पहले तक अकल्पनीय माना जाता था: $40 ट्रिलियन का कुल राष्ट्रीय कर्ज। वित्तीय विश्लेषक माइक महारे ने आर्थिक स्थिति का विश्लेषण करते हुए चेतावनी दी है कि अमरीका एक तरह के "कर्ज के ब्लैक होल" में फंसता जा रहा है, जिससे आने वाले समय में देश के राजकोषीय प्रबंधन पर भारी दबाव पड़ेगा।

इसके साथ ही वित्तीय तंत्र के एक और संवेदनशील हिस्से पर ध्यान केंद्रित हो गया है, जो है $1.4 ट्रिलियन का प्राइवेट क्रेडिट बाजार। वित्तीय प्रणाली का यह गैर-पारंपरिक हिस्सा पिछले कुछ सालों में तेजी से फैला है। हालांकि, लंबी अवधि की ब्याज दरों में उतार-चढ़ाव और बढ़ते कर्ज भुगतान की लागत के कारण $1.4 ट्रिलियन वाले इस प्राइवेट क्रेडिट क्षेत्र में किसी भी तरह की अस्थिरता व्यापक वित्तीय संकट का रूप ले सकती है। यही कारण है कि अमरीकी ट्रेजरी के हालिया कदमों को जानकार बेहद गंभीरता से देख रहे हैं।

सवाल-जवाब

अमरीकी ट्रेजरी ने बॉन्ड बायबैक को लेकर क्या फैसला लिया है?
अमरीकी ट्रेजरी ने 10 से 30 साल की अवधि वाले बॉन्ड के लिए बायबैक सीमा को $2 बिलियन से बढ़ाकर कम से कम $4 बिलियन प्रति ऑपरेशन कर दिया है, जो 9 सितंबर से 4 नवंबर तक लागू रहेगा।
2011–12 के ऑपरेशन ट्विस्ट से इस फैसले की तुलना कैसे की जा सकती है?
2011–12 में ऑपरेशन ट्विस्ट के तहत 15 महीनों में $667 बिलियन के अल्पकालिक बॉन्ड बेचकर दीर्घकालिक बॉन्ड खरीदे गए थे, जिससे 10 वर्षीय यील्ड 23 बेसिस पॉइंट्स घटी थी। मौजूदा बायबैक का असर उससे सीमित रहने की उम्मीद है।
ट्रेजरी के इस कदम का मुद्रा और सोना बाजार पर क्या असर पड़ा?
अमरीकी डॉलर में गिरावट दर्ज की गई, जिससे GBP/USD 1.3650 और EUR/USD 1.1700 के करीब पहुंचे। वहीं, सोना अपने 200-दिवसीय सिंपल मूविंग एवरेज को पार कर $4,550 के ऊपर कारोबार करने लगा।
इस नीतिगत फैसले के साथ किन वित्तीय जोखिमों की चेतावनी दी गई है?
विश्लेषकों ने ध्यान दिलाया है कि अमरीका का राष्ट्रीय कर्ज $40 ट्रिलियन के करीब पहुंच रहा है, जबकि $1.4 ट्रिलियन का प्राइवेट क्रेडिट बाजार ब्याज दरों के दबाव के कारण प्रणालीगत जोखिम पैदा कर सकता है।
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