ईरान की जेल में बंद ब्रिटिश नागरिक क्रेग फोरमैन को मीडिया से बात करने पर मिली दो साल की और सजामध्य पूर्व
2 घंटे पहले· 2

ईरान की जेल में बंद ब्रिटिश नागरिक क्रेग फोरमैन को मीडिया से बात करने पर मिली दो साल की और सजा

ईरान में जासूसी के आरोप में 10 साल की सजा काट रहे क्रेग फोरमैन को जेल से मीडिया से बात करने पर दो साल की अतिरिक्त सजा सुनाई गई है, परिवार ने यह जानकारी दी।

ईरान में जासूसी के आरोप में बंद एक ब्रिटिश नागरिक की पहले से लंबी सजा में दो साल और जोड़ दिए गए हैं। परिवार का कहना है कि जेल की कोठरी से मीडिया से बात करने की वजह से यह अतिरिक्त सजा सुनाई गई है।

यूरोप से ऑस्ट्रेलिया तक की बाइक यात्रा बनी बुरा सपना

क्रेग फोरमैन अपनी पत्नी लिंडसे फोरमैन के साथ मोटरसाइकिल से यूरोप से ऑस्ट्रेलिया तक का सफर तय कर रहे थे। इसी यात्रा के दौरान बीते साल जनवरी में ईरान से गुजरते वक्त दोनों को हिरासत में ले लिया गया था। दोनों शुरू से ही जासूसी के आरोपों से साफ इनकार करते आए हैं और खुद को सिर्फ आम यात्री बताते हैं। फरवरी में एक अदालत ने दोनों को 10-10 साल कैद की सजा सुना दी थी, जिसे परिवार और ब्रिटिश सरकार दोनों ही बेहद अनुचित बता चुके हैं।

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गिरफ्तारी के बाद से दोनों को तेहरान की एविन जेल में रखा गया है, जो विदेशी नागरिकों को हिरासत में रखने के लिए जानी जाती है। परिवार पिछले डेढ़ साल से टुकड़ों-टुकड़ों में मिलने वाली खबरों के सहारे इस मामले पर नजर बनाए हुए है, और एक साधारण सी बाइक यात्रा एक लंबी कानूनी और कूटनीतिक लड़ाई में बदल चुकी है।

वकील से मिलवाने के बहाने जज के सामने पेश किया गया

परिवार के मुताबिक, क्रेग फोरमैन को यह अतिरिक्त दो साल की सजा उनके मीडिया से बात करने की वजह से दी गई। लिंडसे फोरमैन के बेटे और परिवार के प्रवक्ता जो बेनेट ने बताया कि क्रेग को गुमराह करके नई सजा सुनाई गई। बेनेट ने कहा, "हमें लगता है कि उन्हें बताया गया था कि उन्हें उनके वकील से मिलवाया जा रहा है, लेकिन इसके बजाय उन्हें सीधे जज के सामने पेश कर दिया गया और अतिरिक्त सजा की जानकारी दे दी गई।"

केंट के फोकस्टोन में रहने वाले बेनेट ने कहा कि बार-बार गुजारिश करने के बावजूद क्रेग को न कोई वकील दिया गया, न अनुवादक और न ही खुद का पक्ष रखने का कोई मौका। पहले से ही 10 साल की सजा से टूट चुके परिवार के लिए यह नई खबर एक और झटका थी। बेनेट ने कहा, "हमें लगा था कि उनके साथ हो रहे इस भयानक बर्ताव से ज्यादा हैरान हम नहीं हो सकते, लेकिन इस बार तो हम पूरी तरह सन्न रह गए हैं।"

भूख हड़ताल के बीच बिगड़ती सेहत की चिंता

कानूनी लड़ाई के अलावा परिवार को क्रेग और लिंडसे दोनों की सेहत की भी गहरी चिंता सता रही है, क्योंकि दोनों भूख हड़ताल पर हैं। परिवार का कहना है कि ब्रिटेन से भेजी मदद उन तक नहीं पहुंच पा रही है। भूख हड़ताल खत्म करने की गुजारिश वाला एक पत्र उन्हें कभी दिया ही नहीं गया, और न ही उनके लिए भेजी गई दवाएं व अन्य जरूरी सामान उन तक पहुंचा।

बेनेट ने कहा, "मेरी मां और क्रेग की यह तकलीफ अब 18 महीने की हो चुकी है, जो उन्हें कभी झेलनी ही नहीं चाहिए थी। वे कमजोर हो चुके हैं, भूखे हैं, और अब क्रेग को सिर्फ अपनी बात कहने की सजा दी जा रही है। एक बेकसूर इंसान की सजा में चुपचाप और बिना बचाव का मौका दिए दो साल जोड़ देना, हर इंसान को मिले सबसे बुनियादी अधिकारों का सरेआम उल्लंघन है।" सेहत बिगड़ती देख परिवार अब सीधे ईरानी अधिकारियों से रहम की गुजारिश कर रहा है और दोनों को रिहा करने की मांग कर रहा है।

संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों का भी परिवार को समर्थन

इस मामले पर संयुक्त राष्ट्र का भी ध्यान गया है। संयुक्त राष्ट्र की विशेष रैपोर्टर डॉ. एलिस एडवर्ड्स और माई सातो ने संयुक्त बयान जारी कर परिवार का पक्ष लिया। दोनों ने कहा, "लिंडसे और क्रेग फोरमैन को जेल में नहीं होना चाहिए। ऐसा लगता है कि उन्हें गलत तरीके से हिरासत में लिया गया, बेहद संदिग्ध आधार पर मुकदमा चलाया गया और ऐसी प्रक्रिया के बाद सजा सुनाई गई जो निष्पक्ष सुनवाई के बुनियादी मानकों पर भी खरी नहीं उतरती।" इससे परिवार के इस दावे को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बल मिलता है कि दंपती के साथ पूरा मामला शुरू से ही निष्पक्ष कानूनी प्रक्रिया से कोसों दूर रहा है।

ब्रिटेन सरकार ने बताया सजा बढ़ाना नामंजूर

ब्रिटेन के विदेश, राष्ट्रमंडल और विकास मंत्रालय ने कहा कि वह सजा बढ़ाए जाने की खबर को लेकर ईरानी अधिकारियों से तुरंत संपर्क साध रहा है। ब्रिटेन ने 2022 से ही अपने नागरिकों को ईरान की यात्रा न करने की सलाह दे रखी है और चेतावनी दी है कि वहां सिर्फ ब्रिटिश पासपोर्ट रखने या ब्रिटेन से जुड़ाव होने भर से भी किसी को हिरासत में लिया जा सकता है। फोरमैन दंपती का मामला इसी चेतावनी की मिसाल बनकर सामने आया है।

अधिकारी पहले भी कह चुके हैं कि वे दंपती को सुरक्षित स्वदेश लाने की कोशिश कर रहे हैं और उनकी सेहत तथा भलाई को प्राथमिकता बता चुके हैं। सरकार पहले ही दंपती की 10-10 साल की मूल सजा को "पूरी तरह भयावह और पूरी तरह अनुचित" करार दे चुकी है। दोनों को राजनयिक सहायता लगातार दी जा रही है और अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने ईरानी पक्ष को साफ बता दिया है कि अगर सजा बढ़ाने की खबर सही है, तो यह कतई स्वीकार्य नहीं है।

नए दूत की नियुक्ति से परिवार को नई उम्मीद

इन तमाम परेशान करने वाली खबरों के बीच परिवार को इस हफ्ते राहत की एक खबर भी मिली। सोमवार को ब्रिटेन ने विदेशों में मुश्किल हालात में फंसे अपने नागरिकों की मदद के लिए पहली बार एक खास दूत नियुक्त किया, खासकर उन मामलों के लिए जहां भलाई, निष्पक्ष कानूनी प्रक्रिया या मानवाधिकारों को लेकर चिंता हो, जैसा कि फोरमैन दंपती के मामले में हो रहा है।

यह जिम्मेदारी कंजरवेटिव पार्टी के पूर्व सांसद और मध्य पूर्व मामलों के पूर्व मंत्री एलिस्टेयर बर्ट को सौंपी गई है। फोरमैन परिवार ने इस नियुक्ति का स्वागत किया है और कहा है कि वे उनसे मिलने के इच्छुक हैं और उम्मीद करते हैं कि उनकी नियुक्ति से मामले पर सकारात्मक असर पड़ेगा।

सवाल-जवाब

क्रेग फोरमैन कौन हैं और उन्हें ईरान में क्यों गिरफ्तार किया गया था?
क्रेग फोरमैन एक ब्रिटिश नागरिक हैं जिन्हें उनकी पत्नी लिंडसे के साथ जनवरी में ईरान से गुजरते वक्त जासूसी के शक में हिरासत में लिया गया था, वे मोटरसाइकिल से यूरोप से ऑस्ट्रेलिया तक की यात्रा पर थे।
उनकी सजा में दो साल क्यों जोड़े गए?
परिवार के मुताबिक, जेल की कोठरी से मीडिया से बात करने की वजह से क्रेग की सजा में दो साल और जोड़ दिए गए।
क्या उन्हें अपनी सफाई देने का मौका मिला?
नहीं, परिवार का कहना है कि क्रेग को कोई वकील, कोई अनुवादक या खुद का बचाव करने का कोई मौका नहीं दिया गया।
दंपती की मूल सजा कितनी थी?
फरवरी में एक अदालत ने क्रेग और लिंडसे दोनों को 10-10 साल कैद की सजा सुनाई थी।
दंपती की सेहत को लेकर परिवार को क्या चिंता है?
दोनों भूख हड़ताल पर हैं, परिवार का कहना है कि उनकी दवाएं और भूख हड़ताल खत्म करने की गुजारिश वाला पत्र उन तक पहुंचाया ही नहीं गया।
संयुक्त राष्ट्र ने इस मामले पर क्या कहा?
संयुक्त राष्ट्र की विशेष रैपोर्टर डॉ. एलिस एडवर्ड्स और माई सातो ने कहा कि दंपती को गलत तरीके से हिरासत में लिया गया और निष्पक्ष सुनवाई के मानकों को पूरा किए बिना सजा सुनाई गई।
ब्रिटेन सरकार अब क्या कर रही है?
विदेश मंत्रालय का कहना है कि वह सजा बढ़ाए जाने की खबर पर ईरानी अधिकारियों से तुरंत संपर्क साध रहा है, दंपती को राजनयिक सहायता दी जा रही है और उनकी सुरक्षित वापसी के प्रयास जारी हैं।
नए दूत एलिस्टेयर बर्ट की भूमिका क्या है?
एलिस्टेयर बर्ट को विदेशों में मुश्किल मामलों में फंसे ब्रिटिश नागरिकों की मदद के लिए ब्रिटेन के पहले खास दूत के तौर पर नियुक्त किया गया है, जहां भलाई, निष्पक्ष प्रक्रिया या मानवाधिकारों को लेकर चिंता हो।

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