घरेलू वायदा बाजार में 1/10/2026 को बहुमूल्य धातुओं की कीमतों में जोरदार तेजी देखी गई। एमसीएक्स पर सोने के भाव में 1,000 रुपये का भारी उछाल आया, जबकि चांदी की कीमतें 2,200 रुपये की बढ़त के साथ कारोबार करती दिखीं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी और अमेरिकी मुद्रास्फीति के आंकड़ों से मिले संकेतों के बाद निवेशकों का रुझान एक बार फिर सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर बढ़ा है। आगामी त्योहारी मांग को देखते हुए घरेलू बाजार में खरीदारी का माहौल और अधिक मजबूत होता नजर आ रहा है।
अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट
ऊर्जा बाजार में कमजोरी का सीधा असर कमोडिटी रुझानों पर देखा गया। अमेरिकी डब्ल्यूटीआई क्रूड और ब्रेंट क्रूड ऑयल दोनों के वायदा भाव में 1% से 1.5% तक की गिरावट दर्ज की गई। इस गिरावट के बाद अमेरिकी डब्ल्यूटीआई क्रूड 90 डॉलर प्रति बैरल के नीचे फिसल गया, जबकि ब्रेंट क्रूड गिरकर 96 डॉलर प्रति बैरल के नीचे कारोबार करता नजर आया। कच्चे तेल की आपूर्ति में सुधार के संकेतों के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें दबाव में आईं।
क्षेत्रीय आपूर्ति बहाल होने से कच्चे तेल का परिवहन धीरे-धीरे पहले के सामान्य स्तर की ओर लौट रहा है। सऊदी अरब द्वारा अपनी पूर्व-पश्चिम पाइपलाइन की आधी क्षमता बहाल किए जाने के बाद से पश्चिम एशिया से कच्चे तेल के शिपमेंट में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। इसके साथ ही होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए होने वाला तेल प्रवाह बढ़कर 1.32 करोड़ बैरल प्रतिदिन (13.2 मिलियन बैरल प्रतिदिन) के स्तर पर पहुंच गया है।
भू-राजनीतिक तनाव और जलमार्ग पर नियंत्रण का विवाद
सप्लाई लाइनों में आंशिक सुधार के बावजूद बाजार में स्थिरता को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। ईरान युद्ध को समाप्त करने के लिए किसी स्थाई और ठोस समझौते के अभाव में कारोबारी आपूर्ति की दीर्घकालिक निरंतरता को लेकर सतर्क हैं। इस रणनीतिक समुद्री जलमार्ग पर नियंत्रण को लेकर भी तनाव बना हुआ है।
तेहरान और वॉशिंगटन दोनों ही इस बेहद अहम जलमार्ग पर अपने पूर्ण नियंत्रण का दावा कर रहे हैं। भू-राजनीतिक मोर्चे पर दोनों पक्षों की ओर से जारी इन परस्पर विरोधी दावों ने तेल बाजार में उतार-चढ़ाव की आशंकाओं को जीवित रखा है। इसी अस्थिर भू-राजनीतिक माहौल के बीच कीमती धातुओं को हेजिंग और सुरक्षित परिसंपत्ति के रूप में अतिरिक्त समर्थन मिल रहा है।
अमेरिकी मुद्रास्फीति और ब्याज दर की उम्मीदों में बदलाव
कीमती धातुओं में आई तेजी का एक बड़ा कारण अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की संभावनाओं में भारी गिरावट भी है। नीतिगत ब्याज दरों में और बढ़ोतरी की बाजार की उम्मीदें तेजी से घटी हैं। अक्टूबर की मौद्रिक नीति बैठक में दर वृद्धि की संभावना अब घटकर 38% रह गई है, जो इससे पहले 51% और पूर्व में 70% तक आंकी जा रही थी।
ब्याज दर बढ़ोतरी की आशंकाओं को शांत करने में अमेरिका के ताजा पीसीई मूल्य सूचकांक ने प्रमुख भूमिका निभाई। अगस्त माह में अमेरिका का पीसीई मूल्य सूचकांक 0.3% बढ़ा, जो बाजार के 0.4% के अनुमान से कम रहा। वहीं कोर पीसीई सूचकांक में 0.2% की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि इसके 0.3% बढ़ने का अनुमान लगाया गया था। इसके अलावा हेडलाइन पीसीई मुद्रास्फीति दर 3.4% रही, जो बाजार के 3.7% के पूर्वानुमान से काफी कम दर्ज की गई। इन नरम आंकड़ों ने निवेशकों की दर वृद्धि संबंधी चिंताओं को काफी हद तक कम कर दिया है।
घरेलू त्योहारी मांग और रिजर्व बैंक की नीति पर नजर
भारतीय बाजार में नवरात्र जैसे प्रमुख त्योहारों के आगमन से भौतिक सोने की मांग में नई तेजी आने की पूरी संभावना बन गई है। त्योहारों और वैवाहिक मौसम के दौरान आभूषणों की पारंपरिक खरीदारी सर्राफा बाजार को मजबूत सहारा देती है। नवरात्र के दौरान खुदरा खरीदारों की बढ़ती सक्रियता से घरेलू स्तर पर कीमती धातुओं की कीमतों को जमीनी स्तर पर मजबूती मिलने की उम्मीद है।
इसके साथ ही घरेलू निवेशकों की निगाहें भारतीय रिजर्व बैंक की आगामी अक्टूबर मौद्रिक नीति समीक्षा के नतीजों पर भी टिकी हैं। केंद्रीय बैंक द्वारा अपनाए जाने वाले रुख और नीतिगत घोषणाओं का असर आने वाले दिनों में एमसीएक्स पर सोने और चांदी के रुझान को सीधे तौर पर तय करेगा।



















