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हिमालयी क्षेत्र में बर्फ खिसकने से नेपाल की सड़कें और बिजली तंत्र तबाह, गंभीर आर्थिक संकट में घिरा देशमनी
28 अग॰ 2026, 1:32 pm (1 घंटे पहले)· 4

हिमालयी क्षेत्र में बर्फ खिसकने से नेपाल की सड़कें और बिजली तंत्र तबाह, गंभीर आर्थिक संकट में घिरा देश

26 अगस्त को भोटे कोशी नदी गलियारे में बर्फ और चट्टानें ढहने से आई विनाशकारी बाढ़ ने नेपाल के राजमार्गों, पुलों और जलविद्युत परियोजनाओं को भारी नुकसान पहुंचाया है। बुनियादी ढांचे की भारी तबाही से सुस्त पड़ रही अर्थव्यवस्था के लिए उबरना मुश्किल हो गया है।

नेपाल भोटे कोशी नदी गलियारे में आई विनाशकारी बाढ़ के कारण एक गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहा है। 26 अगस्त को आए इस प्राकृतिक प्रकोप ने देश के प्रमुख बुनियादी ढांचे, परिवहन मार्गों और बिजली उत्पादन सुविधाओं को तहस-नहस कर दिया है। पानी, कीचड़ और मलबे के तेज बहाव ने न केवल कई बस्तियों को तबाह किया है, बल्कि राष्ट्रीय महत्व की परिसंपत्तियों को भी भारी नुकसान पहुंचाया है, जिससे आने वाले वर्षों में देश की आर्थिक बहाली की गति सुस्त होने की आशंका बढ़ गई है।

हिमालयी क्षेत्र में बर्फ ढहने से आई भीषण बाढ़ ने निचले इलाकों में मचाई तबाही

यह प्राकृतिक आपदा 26 अगस्त को उस समय शुरू हुई जब उच्च हिमालयी क्षेत्र में बर्फ और चट्टानों का एक बहुत बड़ा हिस्सा ढह गया। इस अचानक हुई घटना से भोटे कोशी नदी में पानी और मलबे का भीषण सैलाब आ गया, जो अपने साथ भारी मात्रा में गाद और बड़ी चट्टानें बहाकर ले आया। बाढ़ का यह भयानक रूप रसुवा जिले से शुरू होकर निचले इलाकों तक फैल गया, जिससे नुवाकोट और धादिंग जैसे क्षेत्र बेहद गंभीर रूप से प्रभावित हुए।

नेपाल सरकार द्वारा 27 अगस्त तक जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से अब तक 359 शव बरामद किए जा चुके हैं। सैकड़ों लोग अभी भी लापता हैं, जिनकी तलाश में राहत और बचाव दल लगातार कठिन परिस्थितियों में अभियान चला रहे हैं। मानवीय क्षति के साथ-साथ स्थानीय बस्तियों, बिजली तंत्र, सड़क संपर्कों और सार्वजनिक सुविधाओं को भारी नुकसान पहुंचा है।

व्यापारिक गलियारे पर सड़कों और पुलों को हुआ 200 अरब रुपये का शुरुआती नुकसान

इस तबाही से बुनियादी ढांचे को पहुंचा नुकसान देश के वित्तीय संसाधनों पर भारी दबाव डाल रहा है। नेपाल के भौतिक पूर्वाधार मंत्री द्वारा जारी प्राथमिक अनुमान के अनुसार, केवल सड़कों और पुलों को हुआ नुकसान लगभग Rs 200 अरब पहुंच गया है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यह केवल परिवहन नेटवर्क को हुए प्रत्यक्ष नुकसान का शुरुआती आंकड़ा है और इसमें पूरे आर्थिक नुकसान की विस्तृत राशि शामिल नहीं है।

इस बाढ़ ने हिमालयी व्यापार और पर्यटन गलियारे को पूरी तरह से अस्त-व्यस्त कर दिया है। रसुवागढ़ी सीमा क्षेत्र में स्थित प्रमुख व्यापारिक बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान हुआ है। यह सीमा बिंदु नेपाल और तिब्बत के बीच व्यापार तथा पर्यटन का एक अत्यंत महत्वपूर्ण जरिया है। सीमा चौकियों, पुलों और मुख्य राजमार्गों के क्षतिग्रस्त होने से सीमा पार माल ढुलाई और व्यापारिक गतिविधियां पूरी तरह ठप हो गई हैं।

जलविद्युत क्षेत्र को बड़ा झटका, 748 मेगावाट क्षमता की 14 परियोजनाएं प्रभावित

नेपाल के ऊर्जा क्षेत्र को इस आपदा से बहुत बड़ा झटका लगा है। प्राथमिक रिपोर्टों से पता चलता है कि कुल 14 जलविद्युत परियोजनाएं बाढ़ की चपेट में आकर क्षतिग्रस्त हुई हैं। चालू और निर्माणाधीन दोनों तरह की इन परियोजनाओं की कुल क्षमता लगभग 748 MW है। नदी घाटी में स्थित कई पावर हाउस, बांध और हाई-वोल्टेज ट्रांसमिशन लाइनें पानी के तेज बहाव में बह गईं या क्षतिग्रस्त हो गईं।

जलविद्युत को नेपाल की भावी आर्थिक वृद्धि और ऊर्जा निर्यात का सबसे मजबूत स्तंभ माना जाता है। बिजली संयंत्रों के क्षतिग्रस्त होने से देश को दोहरा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा। सरकार और निजी निवेशकों को एक तरफ इन संयंत्रों के पुनर्निर्माण पर भारी धनराशि खर्च करनी होगी, वहीं दूसरी तरफ संयंत्रों के बंद रहने के दौरान बिजली बिक्री से होने वाली राजस्व आय भी पूरी तरह बंद रहेगी।

सुस्त पड़ती आर्थिक वृद्धि दर और विश्व बैंक के अनुमानों पर बढ़ा संकट

इस आपदा का समय नेपाल की अर्थव्यवस्था के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है। बाढ़ से पहले ही देश की विकास दर में गिरावट दर्ज की जा रही थी। विश्व बैंक के अप्रैल 2026 के आर्थिक दृष्टिकोण के अनुसार, नेपाल की GDP वृद्धि दर FY2025 के 4.6% से घटकर FY2026 में 2.3% रहने का अनुमान लगाया गया था। अर्थशास्त्रियों ने इस सुस्ती का कारण सितंबर 2025 की राजनीतिक और सामाजिक उथल-पुथल के अवशिष्ट प्रभावों, कमजोर पर्यटन, महंगी ऊर्जा दरों और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता को बताया था।

विश्व बैंक ने पहले यह उम्मीद जताई थी कि नेपाल की अर्थव्यवस्था FY2027 और FY2028 में औसतन 4.4% की दर से पुनरुत्थान करेगी। यह अनुमान पुनर्निर्माण गतिविधियों, जलविद्युत विकास और घरेलू खपत में सुधार पर आधारित था। लेकिन 26 अगस्त की विनाशकारी बाढ़ ने इन आर्थिक अनुमानों और विकास लक्ष्यों की प्राप्ति पर अनिश्चितता के बादल मंडरा दिए हैं।

पर्यटन, स्थानीय छोटे व्यवसायों और आपूर्ति श्रृंखला पर व्यापक असर

नेपाल की राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से चार प्रमुख स्तंभों पर टिकी है: पर्यटन, विप्रेषण, कृषि और सेवा क्षेत्र। उत्तर-पूर्वी नदी गलियारे में हुई तबाही ने पर्यटन और व्यापार से जुड़े इन क्षेत्रों को सीधे तौर पर प्रभावित किया है। मुख्य बाढ़ क्षेत्र से दूर स्थित व्यवसाय भी आपूर्ति श्रृंखला टूटने के कारण आर्थिक मंदी झेल रहे हैं।

हिमालयी मार्गों पर स्थित होटल, रेस्तरां, परिवहन संचालक, स्थानीय दुकानें और टूर गाइड पूरी तरह से पर्यटकों की आवाजाही पर निर्भर हैं। प्रमुख राजमार्गों के बंद होने और सीमा व्यापार रुकने से पूरे क्षेत्र का व्यावसायिक ढांचा चरमरा गया है। पर्यटकों की अनुपस्थिति के कारण छोटे व्यापारियों की आय ठप हो गई है, जबकि उन्हें अपने बुनियादी खर्चों का भुगतान जारी रखना पड़ रहा है।

कृषि योग्य भूमि और फसलों की तबाही से ग्रामीण आजीविका पर संकट

नेपाल में कृषि बहुसंख्यक आबादी की आजीविका का मुख्य साधन है, जिससे ग्रामीण परिवार प्राकृतिक आपदाओं के प्रति बेहद संवेदनशील हो जाते हैं। बाढ़ के पानी ने कटाई के लिए तैयार खड़ी फसलों को नष्ट कर दिया है और उपजाऊ खेतों पर कीचड़ तथा मलबे की मोटी परत जमा कर दी है। मिट्टी के कटाव से भूमि की उर्वरता प्रभावित हुई है, जिससे आगामी मौसम में भी खेती पर बुरा असर पड़ेगा।

फसलों के अलावा पशुधन, सिंचाई नहरों, अनाज भंडारण गृहों और ग्रामीण संपर्क सड़कों को भी भारी नुकसान हुआ है। नेपाल में आपदाओं के पिछले अध्ययनों से पता चलता है कि बाढ़ और भूस्खलन के कारण ग्रामीण परिवारों को दीर्घकालिक छिपे हुए आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ता है। संपर्क मार्ग टूटने से किसान अपने बचे हुए उत्पाद बाजारों तक नहीं पहुंचा पा रहे हैं, जिससे उनकी दैनिक आय और खाद्य सुरक्षा दोनों प्रभावित हुई हैं।

पुनर्निर्माण की बहुस्तरीय समयसीमा: राहत कार्य से लेकर दीर्घकालिक निर्माण तक

हालांकि आपदा के कुल आर्थिक नुकसान का अंतिम आधिकारिक आंकड़ा अभी जारी नहीं किया गया है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि पुनर्निर्माण प्रक्रिया कई चरणों में पूरी होगी। पहले कुछ हफ्तों और महीनों का ध्यान मुख्य रूप से खोज व बचाव अभियानों, अस्थायी आश्रय प्रदान करने, सड़कों से मलबा हटाने और अलग-थलग पड़े इलाकों में आपातकालीन संपर्क बहाल करने पर केंद्रित रहेगा।

अगले 6 से 18 महीनों के दौरान मुख्य राजमार्गों, पुलों, बिजली नेटवर्क और सार्वजनिक भवनों का बड़े पैमाने पर पुनर्निर्माण किया जाएगा। हालांकि, भारी रूप से क्षतिग्रस्त हुई बड़ी जलविद्युत परियोजनाओं और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे के पुनर्निर्माण में कई वर्षों का समय लग सकता है। कठिन पहाड़ी इलाकों में नष्ट हो चुके विशाल बांधों और सुरंगों का दोबारा निर्माण करना एक बेहद जटिल और खर्चीला कार्य है।

पुनर्निर्माण पर होने वाला खर्च बनाम वास्तविक आर्थिक समृद्धि

आने वाले समय में जब सरकार और निजी क्षेत्र बुनियादी ढांचे के निर्माण पर खर्च बढ़ाएंगे, तो राष्ट्रीय GDP के आंकड़ों में अस्थायी उछाल देखा जा सकता है। सड़कों, पुलों और बिजली संयंत्रों के निर्माण से सीमेंट, सरिया, श्रम और परिवहन सेवाओं की मांग बढ़ेगी। विश्व बैंक ने भी अपने पूर्व अनुमानों में पुनर्निर्माण खर्च को आर्थिक वृद्धि का एक सहारा माना था।

लेकिन अर्थशास्त्रियों का कहना है कि पुनर्निर्माण से बढ़ने वाली GDP दर को वास्तविक आर्थिक समृद्धि नहीं माना जा सकता। नष्ट हो चुके बुनियादी ढांचे को दोबारा उसी स्थिति में लाने के लिए अरबों रुपये खर्च करने का अर्थ केवल पुरानी परिसंपत्तियों की भरपाई करना है, न कि नई संपत्ति का सृजन करना। इस प्रक्रिया में भारी धन खर्च होने से शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य कल्याणकारी योजनाओं के लिए बजट कम पड़ सकता है।

उच्च हिमालयी क्षेत्रों में जलवायवीय संवेदनशीलता और भविष्य की चुनौतियां

यह तबाही इस बात का स्पष्ट संकेत है कि उच्च हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र ग्लेशियर पिघलने, भूस्खलन और अचानक आने वाली बाढ़ के प्रति कितना संवेदनशील हो चुका है। वैज्ञानिकों का मानना है कि बढ़ते वैश्विक तापमान के कारण ऊंचे पहाड़ी इलाकों में बर्फ की संरचना कमजोर हो रही है, जिससे इस प्रकार की अचानक आने वाली आपदाओं का खतरा लगातार बढ़ रहा है।

भविष्य के नुकसान से बचने के लिए नेपाल को केवल आपातकालीन राहत कार्यों तक सीमित रहने के बजाय दीर्घकालिक आपदा प्रबंधन नीतियां अपनानी होंगी। इसके लिए प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों, बाढ़ निगरानी केंद्रों, जलवायु-अनुकूल सड़कों और अधिक सुरक्षित जलविद्युत संरचनाओं के निर्माण पर ध्यान केंद्रित करना होगा। नेपाल के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वह पुनर्निर्माण के दौरान केवल पुराने ढांचे को न बदले, बल्कि अधिक टिकाऊ और मजबूत अर्थव्यवस्था का निर्माण करे।

ये भी पढ़ें

सवाल-जवाब

नेपाल में भोटे कोशी नदी की बाढ़ की मुख्य वजह क्या थी?
26 अगस्त को उच्च हिमालयी क्षेत्र में बर्फ और चट्टानों का एक बड़ा हिस्सा ढह जाने के कारण भोटे कोशी नदी में पानी, गाद और मलबे का भीषण सैलाब आ गया था।
इस प्राकृतिक आपदा में कितना जान-माल का नुकसान हुआ है?
27 अगस्त तक जारी सरकारी आंकड़ों के अनुसार 359 शव बरामद किए गए थे और सैकड़ों लोग लापता थे। इसके अलावा सड़कें, पुल और बिजली संयंत्र पूरी तरह नष्ट हो गए।
सड़कों और पुलों की तबाही से कितना वित्तीय नुकसान हुआ है?
नेपाल के भौतिक पूर्वाधार मंत्री के शुरुआती अनुमान के अनुसार केवल सड़कों और पुलों को नुकसान लगभग Rs 200 अरब का हुआ है।
बाढ़ से नेपाल के जलविद्युत क्षेत्र पर क्या प्रभाव पड़ा है?
बाढ़ के कारण चालू और निर्माणाधीन कुल 14 जलविद्युत परियोजनाएं क्षतिग्रस्त हुई हैं, जिनकी कुल उत्पादन क्षमता लगभग 748 MW है।
आपदा से पहले नेपाल की GDP वृद्धि दर का क्या अनुमान था?
विश्व बैंक ने अप्रैल 2026 के अपने अनुमान में FY2026 की GDP वृद्धि दर घटकर 2.3% रहने की बात कही थी, जो FY2025 में 4.6% थी।
तिब्बत के साथ नेपाल के व्यापार पर क्या असर पड़ा है?
रसुवागढ़ी सीमा क्षेत्र में सड़कें और बुनियादी ढांचा नष्ट होने से नेपाल और तिब्बत के बीच सीमा पार व्यापार और पर्यटन आवाजाही ठप हो गई है।
बाढ़ प्रभावित इलाकों के पुनर्निर्माण में कितना समय लगेगा?
सड़कों का आपातकालीन संपर्क कुछ महीनों में बहाल हो सकता है, लेकिन नष्ट हुए बड़े जलविद्युत संयंत्रों और रणनीतिक ढांचे के पुनर्निर्माण में कई वर्षों का समय लगेगा।
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