मिजोरम विधानसभा ने गुरुवार को एक ऐतिहासिक प्रस्ताव पारित करते हुए लोकप्रिय देशभक्ति गीत 'रो मिन रेल सक अंग चे' को राज्य के आधिकारिक गीत के रूप में सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया। सदन में इस प्रस्ताव को पेश करते हुए मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने कहा कि भारत के कई राज्यों के पास पहले से ही अपने आधिकारिक राज्य गीत मौजूद हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस सांस्कृतिक गीत को अपनाना भारत के राष्ट्रगान या राष्ट्रीय गीत के सम्मान के साथ किसी भी प्रकार का टकराव पैदा नहीं करता है, बल्कि यह मिजोरम की वर्षों पुरानी जनभावना को औपचारिक वैधानिक मान्यता प्रदान करता है।
कैबिनेट का फैसला और प्रशासनिक दिशा निर्देश
इस फैसले की विस्तृत पृष्ठभूमि की जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने विधानसभा को बताया कि राज्य मंत्रिमंडल ने 10 अगस्त को हुई अपनी बैठक के दौरान मिजोरम के लिए एक आधिकारिक राज्य गीत अपनाने का फैसला किया था। कैबिनेट ने प्रसिद्ध मिजो लेखक और संगीतकार रोकुंगा द्वारा रचित गीत 'रो मिन रेल सक अंग चे' का चयन सर्वसम्मति से किया था। विधानसभा में प्रस्ताव पारित होने के बाद अब जनरल एडमिनिस्ट्रेशन डिपार्टमेंट (जीएडी) इसके इस्तेमाल को लेकर विस्तृत नियम और कोड ऑफ कंडक्ट तैयार करेगा। यह विभाग निर्धारित करेगा कि सरकारी और सार्वजनिक कार्यक्रमों में इस गीत का गायन और बजाना किस प्रकार किया जाएगा।
गीत का धार्मिक महत्व और गायन का नियम
'रो मिन रेल सक अंग चे' शब्द का अर्थ "आप हमारे सलाहकार बनें" होता है। यह रचना मिजोरम के लोगों के लिए गहरे आध्यात्मिक और सांस्कृतिक मायने रखती है। मुख्यमंत्री ने गीत के भाव को समझाते हुए कहा कि इसमें ईश्वर को सर्वोच्च शासक और राजाओं का राजा माना गया है, जो मिजोरम और इसके नागरिकों के लिए दैवीय मार्गदर्शन, सुरक्षा और न्यायपूर्ण शासन की कामना करता है। आधिकारिक अवसरों पर इसके गायन के लिए मुख्यमंत्री ने कड़े नियमों की घोषणा की। जब भी यह गीत आधिकारिक रूप से गाया जाएगा, सभी उपस्थित लोगों को सम्मानपूर्वक खड़े होना होगा, अपना दाहिना हाथ छाती के बाएं हिस्से पर रखना होगा और इसे पूरी श्रद्धा तथा प्रार्थना की भावना के साथ गाना होगा।
1947 से शुरू हुआ सफर और राजकीय मान्यता
इस कालजयी गीत की रचना 1947 में मिजोरम के जाने माने लेखक और संगीतकार रोकुंगा ने की थी। उग्रवाद के दौर के दौरान मिजो नेशनल फ्रंट (एमएनएफ) ने इसे मिजो राष्ट्रगान घोषित किया था। भले ही लंबे समय तक इसे सरकार से औपचारिक कानूनी मान्यता नहीं मिली थी, लेकिन मिजोरम की जनता हमेशा से इसे राज्य के गान के रूप में गाती आ रही थी। साल 2022 में तत्कालीन एमएनएफ नेतृत्व वाली सरकार ने राज्य भर के सभी स्कूलों को निर्देश दिया था कि वे कक्षाओं की शुरुआत से पहले रोजाना इस गीत का गायन अनिवार्य रूप से करें। गुरुवार को विधानसभा में लंबी चर्चा के बाद सभी सदस्यों ने एकजुट होकर इसे राज्य के आधिकारिक गीत का दर्जा दे दिया।


















