ब्याज दरों को लेकर बाज़ार में जो शांति दिख रही थी, गोल्डमैन सैक्स के नए अनुमान ने उसे चुनौती दे दी है। बैंक अब अक्टूबर में अमेरिकी फेडरल रिज़र्व से 25 बेसिस पॉइंट की एक और वृद्धि की संभावना देखता है। इस निष्कर्ष के पीछे ताज़ा अनुमानों में महंगाई को लेकर मजबूत चित्र है, जिससे विराम की उम्मीदों पर सवाल उठने लगे हैं।
गोल्डमैन सैक्स ने क्यों बदला पक्ष
बैंक का पहले का मानना था कि ब्याज वृद्धि का चक्र समाप्ति की ओर हो सकता है। अब उसने उस नजरिए को बदल दिया है और मान चला है कि कीमतों का दबाव एक और क्वॉर्टर-पॉइंट कदम को उचित ठहरा सकता है। गोल्डमैन सैक्स ने यह नई राय अद्यतन अनुमानों और महंगाई के ज्यादा टिके रहने के संकेतों के आधार पर बनाई है।
पुनर्विचार से पहले कई बाज़ार सहभागियों के लिए सितंबर ही दरों की संभावित अधिकतम सीमा था। लेकिन फेडरल रिज़र्व के इस संकेत ने कि 2% महंगाई लक्ष्य तक जल्दी लौटने के लिए अतिरिक्त कसाव जरूरी हो सकता है, उस धारणा को कमजोर कर दिया। अब अक्टूबर सबसे आगे है, लेकिन बैंक के अंदरूनी मतभेद और बाज़ार की कीमतों के हिसाब से यह फैसला तय नहीं है।
बुधवार को दर में क्या बदलाव हुआ
अमेरिकी फेडरल रिज़र्व के नीति निर्माताओं ने बुधवार बेंचमार्क दर में 25 बेसिस पॉइंट की वृद्धि मंज़ूर की। इसके बाद लक्ष्य सीमा 3.75%-4% हो गई और 2023 के बाद यह पहली ऊपर की ओर चाल बनी। महंगाई अभी भी केंद्रीय बैंक के 2% उद्देश्य से ऊपर है, इसलिए अधिकारियों पर दबाव बना हुआ है।
यही फैसला गोल्डमैन सैक्स की नई भविष्यवाणी की ताज़ा पृष्ठभूमि है। चालू साल के लिए नीति निर्माताओं के काफी बड़े बहुमत ने अपने अनुमानों में एक और वृद्धि को जगह दी। ताज़ा बैठक का लहजा इसी दिशा में था और इसने बैंक का पुराना मान बदलने में मदद की कि अब और वृद्धि की संभावना नहीं बची।
2026 के अनुमान में दो कदमों की गुंजाइश
गोल्डमैन सैक्स के 2026 के संभावित मुख्य अनुमान में दो अलग-अलग वृद्धि की गुंजाइश है। यह दृश्य उन अद्यतन अनुमानों से जुड़ा है, जिनमें महंगाई के जोखिम बैंक की पुरानी सोच से अधिक मजबूत दिखते हैं। इससे तारीखें तय नहीं होतीं, लेकिन संकेत मिलता है कि कीमतों का दबाव बना रहा तो बैंक एक से अधिक अतिरिक्त कदमों की तैयारी रखता है।
निकट भविष्य में अक्टूबर अगले कदम के लिए सबसे साफ संभावित समय दिखता है। निवेशकों ने सितंबर के बाद विराम को लेकर अपनी उम्मीदें गढ़ रखी थीं, इसलिए केंद्रीय बैंक के मार्गदर्शन से उन्हें फिर से हिसाब लगाना पड़ रहा है। मुख्य बात यह है कि 2% महंगाई तक जल्दी लौटने के लिए अधिकारी जरूरत पड़ने पर दोबारा कसाव ला सकते हैं।
अक्टूबर को लेकर बाज़ार आधे-आधे
फैसले के बाद बाज़ार ने अपनी संभावना तुरंत बदल ली। सीएमई ग्रुप के फेडवॉच टूल में अक्टूबर में क्वॉर्टर-पॉइंट वृद्धि की संभावना लगभग 50% दिखाई गई। इसका मतलब है कि एक और कदम और विराम, दोनों को बाज़ार लगभग बराबर वजन दे रहा है।
अक्टूबर की बैठक अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के करीब है, इसलिए कैलेंडर खुद एक जोखिम बन गया है। जो व्यापारी केंद्रीय बैंक के संकेतों और चुनावी जोखिम दोनों को परख रहे हैं, उनके लिए यह समय मुश्किल है। इसलिए बैठक से पहले अधिकारियों की बोलचाल पर बारीक नजर रखी जा रही है।
एक ही बैंक में समय को लेकर दो राय
गोल्डमैन सैक्स के अंदर अगले कदम के समय को लेकर पूरी तरह एक राय नहीं है। बैंक के अर्थशास्त्री अक्टूबर को सबसे अधिक संभावित मानते हैं। वहीं, गोल्डमैन सैक्स एसेट मैनेजमेंट के के हाइग ने कहा है कि चुनाव निकट होने के कारण फेडरल रिज़र्व उस महीने वृद्धि छोड़ सकता है।
अब असली सवाल यह है कि अधिकारी अतिरिक्त सबूत का इंतज़ार करेंगे या नहीं। महंगाई और विकास के नए आंकड़े अक्टूबर में वृद्धि का समर्थन भी कर सकते हैं और कदम छोड़ने की संभावना भी बढ़ा सकते हैं। गोल्डमैन सैक्स का बड़ा अनुमान अब भी एक और कदम की ओर झुकता है, लेकिन अंदरूनी अंतर दिखाता है कि तारीख अभी तय नहीं है।
भारत और वैश्विक संपत्तियों तक असर
अमेरिका में एक और वृद्धि के बाद वित्तीय हालात कसे हुए बने रह सकते हैं और इसका असर दुनिया भर की कीमतों में फैल सकता है। अमेरिकी यील्ड में बदलाव स्टॉक, फिक्स्ड-इनकम सिक्योरिटीज, विदेशी मुद्रा और कमोडिटी बाज़ारों तक पहुंच सकता है। भारत और अन्य उभरते बाज़ार भी इससे प्रभावित हो सकते हैं, क्योंकि ऊंची अमेरिकी दरें सीमा पार पूंजी प्रवाह का रुख बदल सकती हैं।
जब डॉलर मजबूत हो और साथ ही ट्रेजरी यील्ड बढ़े, तो निवेशक जोखिम वाली संपत्तियों से दूरी बना सकते हैं। इससे असर केवल अमेरिकी बाज़ारों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि कई संपत्ति वर्गों में मांग बदल सकती है। जिन पाठकों के पास इक्विटी, बॉन्ड, मुद्रा या कमोडिटी में निवेश है, उनके लिए फेड का रास्ता भारत में बैठे-बैठे भी अहम हो सकता है。
सोने पर दो दिशाओं का दबाव
फेडरल रिज़र्व की नीति के रास्ते को लेकर उम्मीदें सोने के मूड को प्रभावित करती हैं। बढ़ती यील्ड उस धातु को संभालने की अवसर लागत बढ़ाती है, क्योंकि सोना ब्याज नहीं देता। हालांकि जियोपॉलिटिकल तनाव या महंगाई को लेकर बदलती राय कभी-कभार इस दबाव को संतुलित कर सकती है।
गोल्डमैन सैक्स ने अपना अनुमान एक और 25 बेसिस पॉइंट कदम के इर्दगिर्द रखा है, जबकि बाज़ार की संभावनाएं समय को लेकर अभी अस्पष्ट हैं। इसलिए दिशा की तस्वीर समय से ज्यादा साफ है। निवेशक महंगाई के आंकड़ों, विकास डेटा, ट्रेजरी यील्ड, डॉलर और चुनाव से जुड़ी अनिश्चितता को परख रहे हैं ताकि इक्विटी, बॉन्ड, मुद्रा, कमोडिटी और सोने की संभावित चाल को समझ सकें।


















