केंद्र सरकार के कर्मचारियों को त्योहारी सीजन में मिलने वाले बोनस के नियम अब बदल सकते हैं और इसका सीधा फायदा लाखों कर्मचारियों की जेब पर पड़ सकता है. कर्मचारी संगठनों ने साफ कह दिया है कि सरकार अगर बोनस के कैलकुलेशन का तरीका बदलने जा रही है तो इसका लाभ केंद्रीय कर्मचारियों को भी मिलना चाहिए. कुछ संगठनों ने तो बोनस की न्यूनतम राशि 21 हजार रुपये तक तय करने की मांग रख दी है. हालांकि आखिरी फैसला 8वें वेतन आयोग और सरकार को ही लेना है, लेकिन संगठनों की डिमांड से साफ है कि आने वाले समय में बोनस की रकम में बड़ा उछाल आ सकता है.
क्यों उठी बोनस बदलने की मांग
यह पूरा मामला श्रम एवं रोजगार मंत्रालय की एक नोटिफिकेशन से शुरू हुआ. मंत्रालय ने 25 अगस्त को 'कोड ऑन वेजेज-2019' के तहत आदेश जारी करते हुए बताया कि जिन योग्य कर्मचारियों की सैलरी 7 हजार रुपये से ज्यादा है, उनका बोनस अब 7 हजार रुपये या सरकार की ओर से तय की गई न्यूनतम सैलरी, इन दोनों में से जो भी रकम ज्यादा होगी, उसी के आधार पर तय होगा. यह नोटिफिकेशन सामने आते ही देश के सबसे बड़े सरकारी कर्मचारी संगठन एनसी-जेसीएम यानी नेशनल काउंसिल फॉर ज्वाइंट कंसल्टेटिव मशीनरी ने आवाज उठाई. संगठन का कहना है कि जब यह राहत दी जा रही है तो केंद्रीय कर्मचारियों के लिए भी बोनस की अधिकतम सीमा में बदलाव किया जाना चाहिए.
27,694 रुपये न्यूनतम बोनस की मांग
ऑल इंडिया एनपीएस एम्पलॉयीज फेडरेशन के अध्यक्ष डॉ. मंजीत सिंह पटेल ने सोशल मीडिया पर लिखा कि अगर सरकार बोनस की गणना 7 हजार रुपये से ज्यादा की न्यूनतम सैलरी पर करने जा रही है तो इसका फायदा केंद्रीय कर्मचारियों को भी दिया जाना चाहिए. उन्होंने बताया कि अभी केंद्रीय कर्मचारियों की न्यूनतम सैलरी 18 हजार रुपये मानी जाती है और इसी आधार पर बोनस का फॉर्मूला यानी 18,000×30÷30.4 लगाया जाए तो रकम 17,763 रुपये बैठती है. डॉ. पटेल ने यह भी बताया कि 8वें वेतन आयोग से न्यूनतम 27,694 रुपये बोनस तय करने की मांग की गई है, यानी मौजूदा हिसाब से भी करीब 10 हजार रुपये ज्यादा.
हर सेक्टर के लिए अलग फॉर्मूला बनाने की मांग
डॉ. मंजीत सिंह पटेल ने सरकार से यह भी मांग की है कि बोनस के भुगतान के लिए हर सेक्टर के कर्मचारियों की अलग-अलग तय न्यूनतम सैलरी के आधार पर ही गणना होनी चाहिए, ताकि किसी भी वर्ग के कर्मचारी को नुकसान न हो. हालांकि उन्होंने यह भी साफ किया कि सरकार भले ही बोनस के लिए नया तरीका अपना ले, इसका असल असर तुरंत नहीं बल्कि आने वाले कुछ सालों में ही दिखाई देगा, क्योंकि इस तरह के बदलाव लागू होने और कर्मचारियों तक पहुंचने में समय लगता है.
एनसी-जेसीएम की मांग, सीमा 7 हजार से बढ़ाकर 21 हजार हो
नेशनल काउंसिल फॉर ज्वाइंट कंसल्टेटिव मशीनरी यानी एनसी-जेसीएम का कहना है कि केंद्रीय कर्मचारियों के लिए अधिकतम बोनस की सीमा को मौजूदा 7 हजार रुपये से बढ़ाकर सीधे 21 हजार रुपये किया जाना चाहिए. गौरतलब है कि अभी दिवाली के मौके पर ज्यादातर सरकारी कर्मचारियों को जो बोनस मिलता है, वह 7 हजार रुपये तक ही सीमित रहता है. अगर एनसी-जेसीएम की यह मांग मान ली जाती है तो कर्मचारियों के हाथ में आने वाली रकम तीन गुना तक बढ़ सकती है.
दशहरे से पहले ही बोनस देने की मांग
एनसी-जेसीएम ने 27 अगस्त को सरकार को लिखे पत्र में एक और बड़ी मांग रखी है. संगठन चाहता है कि इस बार संशोधित बोनस दिवाली का इंतजार किए बिना दशहरे से पहले ही जारी कर दिया जाए. पत्र में साफ कहा गया है कि इस बार बोनस की राशि 21 हजार रुपये होनी चाहिए. साल 2026 में दशहरे का त्योहार 20 अक्टूबर को है. वैसे हर साल त्योहारी सीजन में सरकार दिवाली से पहले ही अपने कर्मचारियों को बोनस का भुगतान करती रही है, लेकिन इस बार संगठन चाहते हैं कि यह भुगतान पहले हो और रकम भी बड़ी हो. 8वें वेतन आयोग को लेकर पहले से चल रही तमाम मांगों के साथ अब कर्मचारी संगठनों ने बोनस से जुड़े इन बदलावों को भी अपनी सूची में जोड़ दिया है.



















