ऑनलाइन शॉपिंग ऐप्स हों या आपके पास का बड़ा सुपरमार्केट, 'बाय 2 गेट 1 फ्री' यानी दो खरीदने पर एक मुफ्त वाले विज्ञापन हर जगह चमकते हुए दिख जाते हैं। पहली बार देखने पर यह ऑफर किसी लॉटरी जैसा लगता है, क्योंकि ऐसा महसूस होता है कि हमें बिना कोई अतिरिक्त पैसा दिए एक पूरा सामान मुफ्त मिल रहा है। इसी 'मुफ्त' शब्द के आकर्षण में आकर अधिकांश लोग बिना सोचे-समझे अपनी कार्ट में सामान भर लेते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि यह आकर्षक डील आपकी जेब को फायदा पहुंचा रही है या धीरे-धीरे आपका बजट बिगाड़ रही है? रिटेल और मार्केटिंग की दुनिया में इस तरह के ऑफर्स के पीछे एक गहरा गणित और उपभोक्ता मनोविज्ञान छिपा होता है जिसे समझना हर खरीदार के लिए बेहद जरूरी है।
ऑफर के पीछे का छिपा हुआ रिटेल मनोविज्ञान
दुकानदार और बड़ी कंपनियां इंसानी दिमाग के काम करने के तरीके को बहुत अच्छी तरह समझती हैं। व्यावहारिक अर्थशास्त्र में इसे 'जीरो प्राइस इफेक्ट' कहा जाता है, जहां 'मुफ्त' शब्द देखते ही इंसान का दिमाग तार्किक रूप से सोचना बंद कर देता है और केवल मिलने वाले फायदे पर ध्यान केंद्रित करता है। जब आप 'बाय 2 गेट 1 फ्री' का बोर्ड देखते हैं, तो आपका पूरा ध्यान उस एक मुफ्त मिलने वाले पैकेट पर चला जाता है, न कि उन दो पैकेट्स पर जिनके लिए आप अपनी जेब से पैसे दे रहे हैं। इसके कारण लोग अक्सर ऐसी चीजें भी खरीद लेते हैं जिनकी उन्हें तुरंत जरूरत नहीं होती। अगर आपको केवल एक ही साबुन की जरूरत थी, लेकिन आपने ऑफर के चक्कर में दो खरीदे ताकि तीसरा मुफ्त मिल सके, तो आपने वास्तव में अपनी जरूरत से दोगुनी रकम खर्च कर दी है।
यह डील कब बनती है आपके लिए सच में फायदेमंद?
ऐसा नहीं है कि ये सभी ऑफर्स ग्राहकों को नुकसान पहुंचाने के लिए ही होते हैं। कुछ खास परिस्थितियों में यह डील सच में आपके पैसे बचा सकती है। यह तब सबसे ज्यादा कारगर साबित होती है जब आप ऐसी घरेलू चीजों की खरीदारी कर रहे हों जिनका इस्तेमाल रोजाना होता है और जो जल्दी खराब नहीं होतीं। उदाहरण के लिए बिस्किट, साबुन, टूथपेस्ट, खाने का तेल, चायपत्ती, कॉफी, डिटर्जेंट पाउडर, हैंडवॉश या शैम्पू जैसी चीजें इस श्रेणी में आती हैं।
आइए इसे एक सीधे गणित से समझते हैं। मान लीजिए कि आपके पसंदीदा बिस्किट के एक पैकेट की कीमत 100 रुपये है। अगर आप अलग-अलग समय पर तीन पैकेट खरीदते हैं, तो आपको कुल 300 रुपये खर्च करने होंगे। लेकिन 'बाय 2 गेट 1 फ्री' ऑफर के तहत आपको दो पैकेट की कीमत यानी 200 रुपये देने होंगे और तीसरा पैकेट मुफ्त मिल जाएगा। इस तरह तीनों पैकेट्स की औसत कीमत घटकर लगभग 67 रुपये प्रति पैकेट रह जाती है। यह सीधे तौर पर 33 प्रतिशत की बचत है। यदि आपका परिवार इस ब्रांड का इस्तेमाल नियमित रूप से करता है और उत्पाद की एक्सपायरी डेट लंबी है, तो यह खरीदारी पूरी तरह से समझदारी भरी और बजट के अनुकूल है।
सावधान! इन तीन तरीकों से बिगाड़ा जाता है आपका बजट
कागजों पर यह गणित जितना आसान लगता है, असल जिंदगी की शॉपिंग उतनी सीधी नहीं होती। कंपनियां इस ऑफर की आड़ में कई तरह के खेल खेलती हैं जिससे खरीदारों को नुकसान होता है
- नजदीकी एक्सपायरी डेट का स्टॉक निकालना: अक्सर कंपनियां उन सामानों पर ऐसे बड़े ऑफर्स देती हैं जिनकी बिक्री काफी समय से रुकी हुई होती है या जिनकी एक्सपायरी डेट बहुत नजदीक आ चुकी होती है। अगर आपने केवल मुफ्त के लालच में खाने-पीने का ऐसा सामान खरीद लिया जो एक महीने में ही एक्सपायर होने वाला है, और आप उसे समय पर इस्तेमाल नहीं कर पाए, तो आपका पैसा पूरी तरह बर्बाद हो जाएगा।
- मूल कीमत में हेरफेर करना: कई बार ऑफलाइन स्टोर और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म किसी बड़े ऑफर को शुरू करने से ठीक पहले सामान की वास्तविक कीमत को थोड़ा बढ़ा देते हैं। उदाहरण के लिए, जिस सामान की सामान्य कीमत 80 रुपये थी, उसे बढ़ाकर 100 रुपये कर दिया जाता है और फिर उस पर 'बाय 2 गेट 1 फ्री' का टैग लगा दिया जाता है। ऐसे में आपको लगता है कि आप बड़ी बचत कर रहे हैं, लेकिन वास्तव में आपकी वास्तविक बचत बहुत मामूली होती है।
- खर्च का स्तर बढ़ाने की रणनीति: इस मार्केटिंग रणनीति का मुख्य उद्देश्य ग्राहकों के खर्च करने की सीमा को बढ़ाना होता है। यदि कोई ग्राहक केवल 100 रुपये का एक लिक्विड सोप खरीदने आया था, लेकिन वह मुफ्त के ऑफर के चक्कर में 200 रुपये खर्च करके बाहर निकलता है, तो कंपनी ने अपना टर्नओवर दोगुना कर लिया। ग्राहक ने अपनी जेब से वह अतिरिक्त 100 रुपये आज ही खर्च कर दिए, जिन्हें वह बाद में किसी अन्य जरूरी काम में इस्तेमाल कर सकता था।
खरीदारी करने से पहले अपनाएं ये स्मार्ट टिप्स
अगर आप खुद को इस तरह के जाल से बचाना चाहते हैं और अपनी शॉपिंग को सच में फायदेमंद बनाना चाहते हैं, तो अगली बार पेमेंट काउंटर पर जाने से पहले इन बातों की जांच जरूर करें
- कीमतों की तुलना करें: किसी भी स्टोर में ऑफर देखकर तुरंत सामान न उठाएं। अपने स्मार्टफोन का इस्तेमाल करें और दूसरे ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म या नजदीकी स्टोर पर उसी सामान की कीमत देखें। कई बार बिना किसी ऑफर के भी सिंगल पैकेट पर सीधा डिस्काउंट मिल रहा होता है, जो इस ऑफर से बेहतर हो सकता है।
- अपनी वास्तविक जरूरत को पहचानें: खुद से पूरी ईमानदारी के साथ सवाल पूछें कि अगर आज यह ऑफर नहीं होता, तो क्या आप इस सामान के तीन पैकेट खरीदते? अगर जवाब ना है, तो तुरंत आगे बढ़ जाएं।
- एक्सपायरी डेट की बारीकी से जांच करें: खासकर खाने-पीने की चीजों, कॉस्मेटिक्स और सौंदर्य उत्पादों के मामले में मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपायरी डेट को बहुत ध्यान से देखें। सुनिश्चित करें कि आप समय सीमा के भीतर ही पूरे सामान का उपभोग कर लेंगे।
- स्टोरेज स्पेस का आकलन करें: क्या आपके घर में इस अतिरिक्त सामान को सुरक्षित रखने के लिए पर्याप्त जगह है? नमी या गर्मी के कारण सामान खराब होने का डर तो नहीं है? इस बात का ध्यान रखना जरूरी है क्योंकि खराब स्टोरेज से सामान नष्ट हो सकता है।
संक्षेप में कहें तो, 'बाय 2 गेट 1 फ्री' जैसी डील्स न तो पूरी तरह अच्छी होती हैं और न ही पूरी तरह खराब। इनका फायदा या नुकसान पूरी तरह से आपके शॉपिंग करने के तरीके और आपकी वास्तविक आवश्यकता पर निर्भर करता है। यदि आप अपनी जरूरत, बजट और सामान की गुणवत्ता को ध्यान में रखकर फैसला लेंगे, तो आप हमेशा फायदे में रहेंगे और फिजूलखर्ची से बच सकेंगे।



















