भारतीय समाज में बेटियों की शादी के बाद माता-पिता द्वारा अपनी क्षमता अनुसार महंगे उपहार देने की परंपरा काफी पुरानी है। माता-पिता अपनी बेटी के भविष्य को आर्थिक रूप से सुरक्षित करने के उद्देश्य से नकदी, अचल संपत्ति, आभूषण और अन्य कीमती वस्तुएं भेंट करते हैं। हालांकि, माता-पिता की मंशा भले ही विशुद्ध रूप से स्नेह और सहायता की हो, लेकिन इस प्रकार के बड़े वित्तीय लेन-देन पर आयकर विभाग की पैनी नजर बनी रहती है। टैक्स कानूनों की बारीकियों से अनजान रहने के कारण अक्सर लोगों में इस बात को लेकर असमंजस रहता है कि शादी के बाद मिले ऐसे तोहफों पर कर देनदारी बनेगी या नहीं।
माता-पिता से मिले तोहफों पर कर छूट का प्रावधान
आयकर कानून के अंतर्गत माता-पिता को एक विशेष रिश्तेदार की श्रेणी में वर्गीकृत किया गया है। इसी कारण शादी के बाद माता-पिता की ओर से बेटी को दिए जाने वाले किसी भी प्रकार के उपहार पर कोई कर नहीं लगाया जाता है। आयकर अधिनियम 2025 के प्रावधानों के अनुसार, माता-पिता द्वारा अपनी संतान को दिए गए उपहारों पर कर छूट की कोई ऊपरी सीमा तय नहीं की गई है। चाहे तोहफे में लाखों रुपये का कैश दिया गया हो, सोने-चांदी के गहने हों, वाहन हो या फिर कोई कीमती मकान या जमीन हो, बेटी के लिए यह पूरा उपहार आयकर से पूरी तरह मुक्त रहता है।
अन्य रिश्तेदारों और 50 हजार रुपये की सीमा के नियम
माता-पिता से इतर अन्य रिश्तेदारों से मिलने वाले तोहफों के लिए कर कानून में अलग मापदंड निर्धारित हैं। आयकर अधिनियम 2025 की धारा 92 के तहत यह व्यवस्था की गई है कि किसी भी रिश्तेदार द्वारा दिए जाने वाले उपहारों का कुल मूल्य यदि एक वित्तीय वर्ष में 50 हजार रुपये तक है, तो वह पूरी तरह टैक्स फ्री रहता है। इस 50 हजार रुपये की छूट सीमा में नकद राशि, अचल संपत्ति, सोने और चांदी के आभूषण, विभिन्न कंपनियों के शेयर, प्रतिभूतियां तथा वर्चुअल डिजिटल उपहार शामिल किए गए हैं। हालांकि टैक्स विशेषज्ञों की सलाह है कि इस प्रकार प्राप्त होने वाले सभी कर-मुक्त तोहफों की सही जानकारी वार्षिक ITR दाखिल करते समय अवश्य दर्ज की जानी चाहिए।
उपहार से होने वाली अतिरिक्त कमाई पर टैक्स की गणना
हालांकि माता-पिता से मूल उपहार प्राप्त करने के समय बेटी को कोई टैक्स नहीं देना पड़ता, लेकिन यदि उस उपहार के माध्यम से भविष्य में किसी प्रकार का वित्तीय लाभ या आय उत्पन्न होने लगती है, तो स्थिति पूरी तरह बदल जाती है। मूल तोहफा टैक्स फ्री होने के बावजूद उससे होने वाली कमाई पर नियमानुसार आयकर चुकाना अनिवार्य होता है। उदाहरण के लिए, यदि बेटी को माता-पिता से मिले नकद पैसों को बैंक में FD के रूप में जमा करा दिया जाता है या शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड में निवेश कर दिया जाता है, तो उस निवेश से प्राप्त होने वाला ब्याज या रिटर्न आयकर के दायरे में आ जाएगा।
संपत्ति से मिलने वाले किराए और निवेश रिटर्न की देनदारी
इसी प्रकार का नियम अचल संपत्ति या आभूषणों पर भी लागू होता है। मान लीजिए कि माता-पिता ने बेटी को कोई फ्लैट या व्यावसायिक संपत्ति उपहार में दी है, तो संपत्ति का मालिकाना हक मिलने पर बेटी को कोई टैक्स नहीं देना होगा। लेकिन यदि उस संपत्ति को किराए पर उठा दिया जाता है और उससे नियमित किराया मिलना शुरू हो जाता है, तो वह किराए की रकम कर योग्य आय मानी जाएगी और उस पर लागू स्लैब के अनुसार कर का भुगतान करना होगा। इसी तरह उपहार में मिले शेयरों को बेचने पर होने वाला कैपिटल गेन भी टैक्स के दायरे में आएगा।



















