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टर्म इंश्योरेंस खरीदने से पहले रुकिए: सस्ते प्रीमियम के अलावा ये 5 बातें तय करेंगी कि क्लेम के वक्त परिवार को पैसा मिलेगा या नहींमनी
13 जून 2026, 11:53 am (94 दिन पहले)· 0

टर्म इंश्योरेंस खरीदने से पहले रुकिए: सस्ते प्रीमियम के अलावा ये 5 बातें तय करेंगी कि क्लेम के वक्त परिवार को पैसा मिलेगा या नहीं

टर्म इंश्योरेंस सिर्फ सबसे कम प्रीमियम देखकर खरीदना भारी पड़ सकता है। कंपनी की भरोसेमंदता, सही कवर, पॉलिसी की शर्तें, राइडर्स और क्लेम प्रोसेस — इन पांच पहलुओं को समझना जरूरी है।

परिवार की आर्थिक सुरक्षा का सबसे सस्ता और सीधा रास्ता बन चुका टर्म इंश्योरेंस आज लगभग हर कमाने वाले की पहली पसंद है। सोच साफ है — कमाने वाले के न रहने पर भी घर का खर्च, बच्चों की पढ़ाई और लोन की किस्तें न रुकें। लेकिन इस सुरक्षा का असली फायदा तभी मिलता है जब पॉलिसी सोच-समझकर चुनी जाए। दिक्कत यह है कि ज्यादातर लोग पूरी जांच-परख की जगह सिर्फ एक नंबर — प्रीमियम — पर अटक जाते हैं और बाकी जरूरी बातें छोड़ देते हैं। यहां पांच ऐसी बातें हैं जिन्हें नजरअंदाज करना भविष्य में आपके अपनों के लिए बड़ी मुश्किल खड़ी कर सकता है।

सबसे सस्ता प्रीमियम ही सबसे अच्छी डील नहीं

इंटरनेट पर अलग-अलग कंपनियों की तुलना करना और जिसकी पॉलिसी सबसे कम प्रीमियम पर मिल रही हो उसे चुन लेना — यह आम आदत है, पर यही पॉलिसी खरीदने का सही तरीका नहीं है। प्रीमियम के साथ-साथ यह देखना उतना ही जरूरी है कि बीमा कंपनी कितनी विश्वसनीय है, उसकी क्लेम सेटलमेंट प्रक्रिया कैसी है और कस्टमर सर्विस कितनी अच्छी है। थोड़ा ज्यादा प्रीमियम चुकाकर किसी भरोसेमंद कंपनी की पॉलिसी लेना कहीं ज्यादा सुरक्षित और समझदारी भरा फैसला साबित होता है।

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कवर अपनी असली जरूरत के हिसाब से तय करें

लोग अक्सर अपनी जरूरत का सही हिसाब लगाए बिना ही टर्म इंश्योरेंस ले लेते हैं। आपके लिए कितने का कवर सही रहेगा, यह आपकी सालाना आय, चल रहे होम लोन या कार लोन, बच्चों की पढ़ाई और परिवार के रोजमर्रा के खर्चों को जोड़कर निकलना चाहिए। अगर कवर आपकी वास्तविक जरूरत से कम रहा, तो आपके न रहने पर परिवार को गंभीर आर्थिक संकट झेलना पड़ सकता है — और तब पॉलिसी होने के बावजूद वह काफी नहीं पड़ेगी।

शर्तें और एक्सक्लूजन — असली खेल यहीं है

पॉलिसी में लिखी लुभावनी बातों पर तो सबकी नजर जाती है, लेकिन उसकी शर्तें और ‘एक्सक्लूजन’ यानी वे स्थितियां जिनमें क्लेम नहीं मिलेगा, अक्सर अनदेखी रह जाती हैं। इससे भी बड़ी गलती है — पॉलिसी लेते समय अपने स्वास्थ्य, धूम्रपान की आदत या किसी पुरानी बीमारी की जानकारी छिपा लेना। यही छिपाई गई बात बाद में कंपनी को क्लेम पूरी तरह खारिज करने का आधार दे देती है। इसलिए हर शर्त को ठीक से समझकर और सही जानकारी देकर ही पॉलिसी फाइनल करें।

हर राइडर आपके काम का नहीं

आजकल कंपनियां क्रिटिकल इलनेस, एक्सीडेंटल डेथ बेनिफिट और प्रीमियम माफी जैसे कई राइडर्स ऑफर करती हैं। समझने वाली बात यह है कि हर राइडर हर किसी के लिए जरूरी नहीं होता, और बेसिक पॉलिसी में जुड़ते ही वह प्रीमियम बढ़ा देता है। बेहतर है पहले अपनी लाइफस्टाइल और जरूरतों को परखें, फिर सिर्फ वही राइडर लें जो सचमुच आपके काम का हो।

सिर्फ क्लेम सेटलमेंट रेशियो पर भरोसा न करें

बहुत से लोग बीमा कंपनी चुनने का इकलौता पैमाना उसका क्लेम सेटलमेंट रेशियो (CSR) बना लेते हैं। यह आंकड़ा अहम तो है, पर पूरी तस्वीर नहीं दिखाता। इसके साथ यह भी परखना चाहिए कि क्लेम के समय कंपनी का रवैया कैसा रहता है, उसकी कस्टमर सर्विस कितनी मददगार है और डिजिटल क्लेम प्रोसेस कितना आसान है। अगर क्लेम देने की प्रक्रिया उलझी हुई है, तो ठीक उसी मुश्किल घड़ी में आपके परिवार को परेशानी उठानी पड़ेगी।

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