राजस्थान के राजनीतिक गलियारों में निकाय चुनाव 2026 के नतीजे खासे चर्चा में बने हुए हैं। इसी क्रम में जयपुर का रामपुरा-कंवरपुरा वार्ड भी लोगों के बीच विशेष चर्चा का विषय बन गया है। प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में इस वार्ड के चुनावी परिणाम इसलिए भी अहम माने जा रहे हैं क्योंकि कुछ समय पहले यह इलाका अपनी व्यवस्थाओं और एक जर्जर स्कूल को लेकर सुर्खियों में छाया रहा था। यहां के चुनावी रण में भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार को पराजय का मुंह देखना पड़ा है।
कांग्रेस के सुरेश मीणा ने दर्ज की जीत
वार्ड नंबर 61 से कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार सुरेश मीणा ने अपने प्रतिद्वंद्वी भाजपा प्रत्याशी रामलाल मीणा को 438 मतों के अंतर से हराकर शानदार जीत हासिल की है। रामपुरा-कंवरपुरा क्षेत्र जयपुर नगर निगम के दायरे में आता है। नए परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद यह इलाका पहली बार नगर निगम क्षेत्र का हिस्सा बनाया गया था। यही वजह है कि यहां पहली मर्तबा नगर निगम के चुनाव संपन्न हुए हैं और इस पहले ही मुकाबले में कांग्रेस प्रत्याशी की यह विजय राजनीतिक चर्चाओं के केंद्र में आ गई है।
तबेलेनुमा स्कूल का विवाद रहा था सुर्खियों में
यह वही रामपुरा-कंवरपुरा इलाका है जिसका सरकारी स्कूल इस साल अगस्त महीने में अपनी बेहद जर्जर और दयनीय हालत के चलते मीडिया और आम जनता के बीच मुख्य आकर्षण का केंद्र बन गया था। स्कूल भवन की स्थिति इतनी खराब थी कि नौनिहालों को पढ़ाई के लिए अस्थायी रूप से किसी पशुओं के बाड़े जैसी जगह में बैठाया जा रहा था, जिसकी तस्वीरें और खबरें व्यापक स्तर पर सामने आई थीं। हालात का जायजा लेने पहुंचे सीजेपी कार्यकर्ताओं और स्थानीय ग्रामीणों के बीच तीखी नोकझोंक, विवाद और धक्का-मुक्की जैसी घटनाएं भी देखने को मिली थीं।
इस पूरे घटनाक्रम ने न सिर्फ प्रांतीय स्तर पर बल्कि राष्ट्रीय फलक पर इस क्षेत्र की व्यवस्थाओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे। मामले के तूल पकड़ने के बाद प्रशासन हरकत में आया था और स्कूल के लिए नए भवन के निर्माण तथा अन्य वैकल्पिक व्यवस्थाओं को अमलीजामा पहनाने की प्रक्रिया शुरू की गई थी।
चुनाव परिणाम और पुराना मुद्दा
चुनाव आयोग द्वारा नतीजे घोषित किए जाने के बाद वार्ड नंबर 61 का यह परिणाम इसलिए भी खास तवज्जो पा रहा है क्योंकि मतदान से ठीक पहले यह इलाका बदहाल स्कूल के मुद्दे को लेकर काफी लंबे समय तक चर्चाओं में रहा था। इस विजय के बाद स्थानीय राजनीतिक गलियारों में चुनावी नतीजों और स्कूल से जुड़े उस पुराने विवाद का जिक्र एक बार फिर छिड़ गया है। हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों का यह भी मानना है कि केवल चुनावी परिणामों के आधार पर ही स्कूल से जुड़े उस विवाद को इस हार-जीत का एकमात्र सीधा कारण मान लेना उचित नहीं होगा।


















