भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड यानी सेबी ने शेयर बाजार में वायदा कारोबार की एक्सपायरी वाले दिन सेटलमेंट कीमत की गणना प्रक्रिया में संशोधन का प्रस्ताव रखा है। क्लोजिंग ऑक्शन सेशन व्यवस्था लागू होने के बाद शेयर बाजार के सूचकांकों और ऑप्शन प्रीमियम में देखी गई तेज हलचल के बाद बाजार नियामक ने यह कदम उठाया है। सेबी की ओर से 12 सितंबर को जारी किए गए परामर्श पत्र में डेरिवेटिव्स सेटलमेंट कीमतों को तय करने के लिए दो प्रमुख पद्धतियों का खाका खींचा गया है। इसके साथ ही नियामक ने क्लोजिंग ऑक्शन के समय, वायदा कारोबार के घंटों, ऑर्डर हैंडलिंग और बाजार आंकड़ों के प्रसार पर भी हितधारकों से सुझाव मांगे हैं। इस परामर्श पत्र पर आम जनता और बाजार प्रतिभागी 3 अक्टूबर 2026 तक अपनी राय दे सकते हैं।
ऑक्शन व्यवस्था लागू होने के बाद की स्थिति की समीक्षा
सेबी ने क्लोजिंग ऑक्शन सेशन व्यवस्था की शुरुआत से पहले और बाद के समय में इंडेक्स ऑप्शंस के व्यवहार की गहन पड़ताल की है। नियामक ने स्पष्ट किया है कि वह क्लोजिंग ऑक्शन सेशन को पूरी तरह समाप्त करने का कोई विचार नहीं रख रहा है। इस पूरी कवायद का मुख्य उद्देश्य मौजूदा ढांचे को अधिक मजबूत बनाना है और कैश मार्केट की क्लोजिंग प्राइस तथा डेरिवेटिव्स सेटलमेंट के बीच के तालमेल में आ रही व्यावहारिक दिक्कतों को दूर करना है।
क्लोजिंग ऑक्शन सेशन एक ऐसी व्यवस्था है जिसे सेबी ने इक्विटी कैश मार्केट में चुनिंदा शेयरों की अंतिम बंद कीमत तय करने के लिए शुरू किया था। यह नई प्रणाली इसी साल 3 अगस्त 2026 से प्रभावी हुई थी। इससे पहले तक योग्य शेयरों की क्लोजिंग कीमत निरंतर ट्रेडिंग सत्र के आखिरी 30 मिनट में हुए सौदों के वॉल्यूम वेटेड एवरेज प्राइस यानी VWAP के आधार पर निकाली जाती थी।
नीलामी प्रक्रिया और अचानक आए उतार-चढ़ाव का गणित
नई ऑक्शन प्रणाली के तहत खरीदारों और बिकवालों के ऑर्डर्स को एक साथ मिलाकर नीलामी के माध्यम से संतुलित बंद कीमत तय की जाती है। हालांकि, इस ऑक्शन से निकलने वाली अंतिम क्लोजिंग कीमत ही एक्सपायरी के दिन वायदा अनुबंधों के सेटलमेंट के लिए भी इस्तेमाल होने लगी। इस ढांचे को लागू करने से पहले सेबी ने दिसंबर 2024 और फिर अगस्त 2025 में बाजार सहभागियों के साथ विस्तृत विचार-विमर्श किया था।
नियामक ने फरवरी से जुलाई 2026 के बीच बिना ऑक्शन वाली 26 एक्सपायरी और 3 अगस्त से 3 सितंबर 2026 के दौरान ऑक्शन व्यवस्था वाली 5 एक्सपायरी के आंकड़ों का तुलनात्मक विश्लेषण किया। इस दौरान पाया गया कि नीलामी अवधि के दौरान सांकेतिक क्लोजिंग स्तरों में अचानक बड़ा बदलाव देखने को मिला। एक कारोबारी सत्र में सेंसेक्स का सांकेतिक निचला स्तर अचानक लगभग 2.5 प्रतिशत तक गिर गया, जिसके चलते कुछ पुट ऑप्शंस के प्रीमियम कई सौ फीसदी तक उछल गए। इसी तरह निफ्टी के पुट ऑप्शंस में भी एक्सपायरी वाले दिन कई गुना बढ़ोतरी दर्ज की गई।
सेटलमेंट कीमत के लिए पेश किए गए दो विकल्प
बाजार में पैदा हुई इस अस्थिरता को ध्यान में रखते हुए सेबी ने सूचकांकों और एकल शेयरों के डेरिवेटिव्स सेटलमेंट के लिए दो संभावित मॉडल प्रस्तावित किए हैं।
- ब्लेंडेड VWAP मॉडल: पहले विकल्प के तहत सेटलमेंट कीमत की गणना निरंतर ट्रेडिंग सत्र के अंतिम 30 मिनट के सौदों और 10 मिनट के क्लोजिंग ऑक्शन सेशन में हुए ट्रेडों दोनों को मिलाकर की जाएगी।
- पारंपरिक व्यवस्था को अस्थायी रूप से बनाए रखना: दूसरे विकल्प में निरंतर ट्रेडिंग के आखिरी 30 मिनट वाले पुराने फॉर्मूले को ही जारी रखने का सुझाव है। इससे वायदा बाजार के सेटलमेंट को कुछ समय के लिए क्लोजिंग ऑक्शन सेशन से अलग रखा जा सकेगा।
इस व्यवस्था के तहत नियामक शुरुआती एक साल के लिए डेरिवेटिव्स सेटलमेंट को ऑक्शन प्रक्रिया से अलग रख सकता है, और बाद में पर्याप्त अनुभव हासिल होने पर मिश्रित यानी ब्लेंडेड प्रणाली की ओर बढ़ सकता है।
व्यापक सुधारों पर भी मांगी जा रही राय
सेबी का यह परामर्श पत्र केवल सेटलमेंट की कीमतों तक सीमित नहीं है। नियामक बाजार के बुनियादी ढांचे को सुधारने के लिए क्लोजिंग ऑक्शन के समय निर्धारण, वायदा एवं विकल्प कारोबार के समय, ऑर्डर निष्पादन के नियमों और बाजार डेटा के समय पर प्रसार जैसे कई अन्य विषयों पर भी बाजार सहभागियों की प्रतिक्रियाएं जुटा रहा है। सभी सुझाव मिलने के बाद नियामक अंतिम दिशानिर्देश जारी करेगा।


















