राजधानी दिल्ली में एक सदी से भी अधिक पुरानी धार्मिक और ऐतिहासिक धरोहर को लेकर तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। अधिकारियों की तरफ से मिले निर्देशों के बाद इस स्थल को खाली करने के आदेश दिए गए हैं, जिसके चलते सियासत और धार्मिक हलकों में गहरी चिंता का माहौल है। इस पूरे प्रकरण को लेकर कई प्रमुख नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी है और प्रशासनिक रुख पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
प्रशासनिक कार्रवाई और छह दिन की डेडलाइन
विवादों के केंद्र में 125 साल पुरानी ऐतिहासिक रेस कोर्स मस्जिद है, जिससे जुड़े लोगों का कहना है कि उन्हें अपना परिसर छोड़ने के लिए मात्र छह दिनों का समय दिया गया है। हालात तब और गंभीर हो गए जब इस परिसर की बिजली और पानी की आपूर्ति पूरी तरह से काट दी गई। भूमि और विकास कार्यालय यानी L&DO द्वारा प्रवेश द्वारों को बंद कर दिए जाने की वजह से स्थानीय नमाजियों को अंदर दाखिल होने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
नेतृत्व और नेताओं की प्रतिक्रियाएं
इस पूरे मामले पर ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कड़ा ऐतराज जताया है। उन्होंने केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू को पत्र लिखकर इस मामले में तुरंत दखल देने की अपील की है। ओवैसी ने कहा कि 1977 से यह स्थल वक्फ संपत्ति के रूप में दर्ज है, इसके बावजूद वक्फ बोर्ड ने गिराए जाने के इस आदेश के खिलाफ कोई कदम नहीं उठाया। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि साल 2023 से दिल्ली वक्फ बोर्ड का औपचारिक गठन नहीं हुआ है, जिस वजह से इस विवाद को सुलझाने की पूरी जिम्मेदारी अब केंद्रीय मंत्री के कंधों पर आ जाती है।
ऐतिहासिक वक्फ संपत्ति का दर्जा
दस्तावेजों के अनुसार यह मस्जिद 1977 से ही एक अधिसूचित वक्फ संपत्ति रही है और इसे एक धरोहर स्थल के तौर पर भी मान्यता प्राप्त है। इस मसले पर कश्मीरी नेता मीरवाइज उमर फारूक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपनी बात रखते हुए कहा कि अगर कानूनी रूप से मान्यता प्राप्त और अधिसूचित वक्फ संपत्तियों को इस प्रकार के संकट का सामना करना पड़े, तो देश में बाकी धार्मिक स्थलों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जा सकती है। उन्होंने वक्फ अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए कि वे इस धरोहर का बचाव करने में पूरी तरह असफल रहे हैं।
हुजरा कुआं मस्जिद और अन्य मामले
असदुद्दीन ओवैसी ने इससे पहले रेस कोर्स के पास ही मौजूद एक अन्य प्राचीन धार्मिक स्थल हुजरा कुआं मस्जिद को ढहाए जाने की कोशिशों की भी कड़ी निंदा की थी। उन्होंने बताया कि इस जगह पर लोगों को नमाज अदा करने से रोका जा रहा है और इसकी देखभाल करने वाले व्यक्ति को डराया-धमकाया जा रहा है, जबकि इस सिलसिले में कोई भी आधिकारिक नोटिस जारी नहीं किया गया था। उनका कहना था कि इस तरह की कार्रवाइयां धार्मिक अधिकारों पर सीधा प्रहार करती हैं।
जमीयत उलेमा-ए-हिंद का प्रतिनिधिमंडल
इस पूरे घटनाक्रम के बीच जमीयत उलेमा-ए-हिंद संगठन भी पूरी तरह सक्रिय हो गया है। संगठन के महासचिव मौलाना मुहम्मद हकीमुद्दीन कासमी की अगुवाई में एक प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू से मुलाकात की थी और उन्हें एक औपचारिक ज्ञापन सौंपा था। इस ज्ञापन के माध्यम से सफदरजंग मकबरे के पीछे स्थित उस कब्रिस्तान और रेस कोर्स मस्जिद की पूरी हिफाजत करने की पुरजोर मांग की गई। जमीयत ने पानी-बिजली की कटी हुई लाइनों को तत्काल बहाल करने और वहां नमाज का सिलसिला निर्बाध रूप से जारी रखने का आग्रह किया है।













