उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं और विभिन्न दलों के नेता चुनावी मैदान में पूरी ताकत के साथ उतर रहे हैं। इसी चुनावी माहौल के बीच एआईआईएम के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने सोमवार को रामपुर में एक विशाल जनसभा को संबोधित किया। ओवैसी ने दो टूक शब्दों में कहा कि राज्य का मुस्लिम समाज अब नेहरू, गांधी या किसी यादव को अपना नेता स्वीकार नहीं करेगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि उत्तर प्रदेश में मुस्लिम समुदाय का सियासी नेतृत्व केवल मुस्लिम समाज से ही निकलना चाहिए।
सपा और कांग्रेस के रुख पर उठाए कड़े सवाल
रामपुर के मंच से असदुद्दीन ओवैसी ने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस दोनों पर तीखे राजनीतिक प्रहार किए। उन्होंने वरिष्ठ नेता आजम खान की स्थिति पर गहरी चिंता जताते हुए अखिलेश यादव के दोहरे मापदंडों पर सवाल खड़े किए। ओवैसी ने कहा कि आजम खान वर्षों से जेल में बंद हैं और उनके अलावा भी कई मुस्लिम नेता लंबे समय से सलाखों के पीछे जिंदगी बिता रहे हैं, लेकिन अखिलेश यादव उनके समर्थन में आवाज उठाना तो दूर, उनका नाम तक नहीं लेते। इसके विपरीत, जब किसी यादव नेता पर कोई आंच आती है तो समाजवादी पार्टी तुरंत सड़कों पर उतरकर चक्का जाम कर देती है।
ओवैसी ने इससे पहले श्रावस्ती की एक सभा का भी संदर्भ दिया, जहाँ उन्होंने साफ कहा था कि विपक्षी दलों को मुस्लिम समुदाय को अपनी बपौती या राजनीतिक जागीर समझना तुरंत बंद कर देना चाहिए। उनका कहना था कि राजनीतिक दलों को यह गलतफहमी निकाल देनी चाहिए कि मुस्लिम वोट उनके पास बंधा हुआ है।
वोट बैंक की राजनीति और सामाजिक हक की लड़ाई
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि राहुल गांधी और अखिलेश यादव ने हमेशा मुस्लिम समाज को केवल एक वोट बैंक समझा है। उन्होंने कहा कि इन नेताओं ने आम मुस्लिम कार्यकर्ता को केवल दरियां बिछाने वाला साधन मान रखा है, मगर अब यह पुराना राजनीतिक ढांचा कतई स्वीकार नहीं होगा। ओवैसी ने जनसभा में मौजूद लोगों का आह्वान किया कि वे ऐसे चेहरों को पहचानें जो उत्तर प्रदेश में मुसलमानों की स्वतंत्र राजनीतिक आवाज को दबाने की कोशिश करते हैं।
अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए ओवैसी ने यह भी दोहराया कि वह एसआईआर के कड़े विरोधी रहे हैं और भविष्य में भी इसका विरोध जारी रखेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्हें इंडिया गठबंधन की चुनावी चिंताओं से कोई सरोकार नहीं है, बल्कि उनका मुख्य सरोकार गरीब जनता के दर्द और हक से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि उनका एकमात्र लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि हर गरीब का सपना पूरा हो और उसे उसका वास्तविक अधिकार हासिल हो सके।
आगामी विधानसभा चुनाव का समीकरण
उत्तर प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों के लिए अगले साल 2027 में फरवरी और मार्च के महीनों में चुनाव आयोजित होने की संभावना है। राज्य की विधानसभा में पूर्ण बहुमत हासिल करने के लिए 202 सीटों का स्पष्ट आंकड़ा आवश्यक है। जैसे-जैसे यह चुनावी मुकाबला नजदीक आ रहा है, वैसे-वैसे मुस्लिम मतदाताओं के समर्थन को लेकर राजनीतिक दलों के बीच खींचतान और तेज होती जा रही है।


















