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1975 बैच के वरिष्ठ पूर्व आईएएस अफसर राकेश मेहता की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत, नोएडा के सेक्टर-82 में फ्लैट के भीतर लटकता मिला शवभारत
8 सित॰ 2026, 11:29 pm (6 दिन पहले)· 5

1975 बैच के वरिष्ठ पूर्व आईएएस अफसर राकेश मेहता की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत, नोएडा के सेक्टर-82 में फ्लैट के भीतर लटकता मिला शव

दिल्ली के पूर्व मुख्य सचिव और 1975 बैच के सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी राकेश मेहता का शव 6 सितंबर को नोएडा के सेक्टर-82 स्थित फ्लैट में फंदे से लटका पाया गया। मौके से बरामद सुसाइड नोट में मानसिक तनाव और बीमारियों का उल्लेख किया गया है।

देश की राजधानी में वरिष्ठ प्रशासनिक भूमिकाएं निभा चुके 1975 बैच के आईएएस अधिकारी राकेश मेहता की नोएडा स्थित आवास पर दुखद मृत्यु की खबर सामने आई है। 75 वर्षीय पूर्व मुख्य सचिव का शव रविवार, 6 सितंबर को सेक्टर-82 स्थित केंद्रीय विहार-2 सोसाइटी के फ्लैट में फंदे से लटकता हुआ बरामद किया गया। घटना की खबर फैलते ही प्रशासनिक तंत्र और पुलिस महकमे में हलचल मच गई। सूचना मिलते ही स्थानीय थाना फेस-2 की पुलिस टीम घटनास्थल पर पहुंची और मामले की छानबीन शुरू कर दी।

पुलिस जांच और घटनास्थल से बरामद सुसाइड नोट

मामले की शुरुआती जानकारी आपातकालीन नंबर डायल-112 के माध्यम से पुलिस कंट्रोल रूम को दी गई थी। सूचना मिलते ही थाना फेस-2 की पुलिस के साथ-साथ फॉरेंसिक एक्सपर्ट और फील्ड यूनिट की टीमों ने मौके पर पहुंचकर जांच-पड़ताल की। विशेषज्ञों की टीम ने घटनास्थल का बारीक निरीक्षण किया और फिंगरप्रिंट तथा अन्य भौतिक साक्ष्य एकत्र किए। निरीक्षण के दौरान पुलिस को कमरे से एक सुसाइड नोट भी बरामद हुआ है। इस पत्र में मानसिक तनाव और गंभीर बीमारियों से परेशान होने की बात लिखी गई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वे इस पत्र की प्रामाणिकता की जांच कर रहे हैं और घटना से जुड़े सभी संभावित पहलुओं पर गहनता से पड़ताल जारी है।

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पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंपा गया शव

घटनास्थल पर कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद पुलिस ने शव का पंचायतनामा भरा और उसे पोस्टमार्टम जांच के लिए भेज दिया। पोस्टमार्टम की औपचारिक प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद पुलिस ने पार्थिव शरीर को अंतिम संस्कार के लिए परिजनों के सुपुर्द कर दिया है। पुलिस का कहना है कि फॉरेंसिक रिपोर्ट और परिजनों के बयानों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

दिल्ली के मुख्य सचिव और राष्ट्रमंडल खेलों में अहम योगदान

राकेश मेहता भारतीय प्रशासनिक सेवा के 1975 बैच के एक बेहद सम्मानित अधिकारी थे। उन्होंने वर्ष 2007 से लेकर वर्ष 2010 तक दिल्ली के मुख्य सचिव के रूप में अपनी सेवाएं दी थीं। उनके कार्यकाल के दौरान ही वर्ष 2010 में दिल्ली में प्रतिष्ठित राष्ट्रमंडल खेलों का आयोजन हुआ था, जिसमें प्रशासनिक व्यवस्थाओं और समन्वय को संभालने में उन्होंने मुख्य भूमिका निभाई थी। 75 वर्ष की उम्र में उनके इस तरह अचानक दुनिया से चले जाने से नौकरशाही और राजनीतिक गलियारों में गहरा शोक व्यक्त किया जा रहा है।

सवाल-जवाब

पूर्व आईएएस अधिकारी राकेश मेहता का शव कहां और कब मिला?
राकेश मेहता का शव रविवार, 6 सितंबर को नोएडा के सेक्टर-82 स्थित केंद्रीय विहार-2 सोसाइटी के उनके फ्लैट में मिला।
क्या पुलिस को घटनास्थल से कोई सुसाइड नोट मिला है?
हां, पुलिस को मौके से एक सुसाइड नोट मिला है, जिसमें मानसिक तनाव और बीमारियों का जिक्र किया गया है।
राकेश मेहता दिल्ली के मुख्य सचिव पद पर कब रहे थे?
राकेश मेहता वर्ष 2007 से 2010 तक दिल्ली के मुख्य सचिव पद पर कार्यरत रहे थे।
वर्ष 2010 के राष्ट्रमंडल खेलों में उनकी क्या भूमिका थी?
वर्ष 2010 में दिल्ली में आयोजित राष्ट्रमंडल खेलों के दौरान उन्होंने प्रशासनिक स्तर पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
राकेश मेहता किस बैच के आईएएस अधिकारी थे?
राकेश मेहता 1975 बैच के वरिष्ठ भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारी थे।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 4

Arjun Mehta@arjun-mehta·5 दिन पहले

राकेश मेहता जैसे शीर्ष प्रशासनिक अधिकारी का इस तरह जाना नौकरशाही के भीतर बढ़ते मानसिक तनाव और स्वास्थ्य चुनौतियों पर एक गंभीर सवालिया निशान लगाता है। 2010 के राष्ट्रमंडल खेलों और दिल्ली के मुख्य सचिव के रूप में उनके विशाल प्रशासनिक योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा, लेकिन यह घटना सेवानिवृत्ति के बाद के जीवन में मानसिक स्वास्थ्य और बुजुर्गों की अनदेखी और उनके अकेलेपन के सामाजिक पहलुओं पर प्रशासनिक गलियारों में एक आत्मમंथन की मांग करती है।

Tanvi Desai@tanvi-desai·5 दिन पहले

राकेश मेहता जैसे वरिष्ठ नौकरशाह की दुखद मृत्यु ने सेवानिवृत्ति के बाद के जीवन की जटिलताओं को उजागर किया है। एक ओर जहाँ उनका प्रशासनिक योगदान ऐतिहासिक रहा है, वहीं दूसरी ओर यह घटना बुजुर्गों में बढ़ते मानसिक दबाव और अकेलेपन पर विचार करने के लिए मजबूर करती है। यह केवल एक व्यक्तिगत त्रासदी नहीं है, बल्कि यह सार्वजनिक जीवन से हटने के बाद आने वाले खालीपन और स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों से निपटने के लिए एक मजबूत सामाजिक और पारिवारिक समर्थन प्रणाली की आवश्यकता को स्पष्ट रूप से दर्शाती है।

Rohan Verma@rohan-verma·5 दिन पहले

यह घटना देश की नौकरशाही में उच्च पद से सेवानिवृत्ति के बाद बुजुर्गों के मानसिक स्वास्थ्य और अकेलेपन की गंभीर समस्या को उजागर करती है। 1975 बैच के इस वरिष्ठ अधिकारी का इस तरह जाना प्रशासनिक गलियारों में एक बड़ा सदमा है। अब यह देखना होगा कि पुलिस फॉरेंसिक रिपोर्ट और परिजनों के बयानों के आधार पर इस दुखद मामले में आगे क्या निष्कर्ष निकालती है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·5 दिन पहले

यह दुखद घटना सेवानिवृत्ति के बाद उच्च पदस्थ अधिकारियों की मानसिक और भावनात्मक स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े करती है। एक तरफ जहां पुलिस सुसाइड नोट की सत्यता और फॉरेंसिक साक्ष्यों की जांच में जुटी है, वहीं इस मामले में यह पड़ताल भी जरूरी है कि क्या उम्र के इस पड़ाव पर प्रशासनिक दिग्गजों के लिए कोई पुख्ता मनोवैज्ञानिक समर्थन प्रणाली मौजूद है या नहीं।

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