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आजमगढ़ के होटल कमरे में चल रहा था वन्यजीव अंगों का अंतरराष्ट्रीय सौदा, गोह के 24 सूखे हेमीपेनिस के साथ दो धरे गएभारत
13 जून 2026, 4:48 pm (45 दिन पहले)· 0

आजमगढ़ के होटल कमरे में चल रहा था वन्यजीव अंगों का अंतरराष्ट्रीय सौदा, गोह के 24 सूखे हेमीपेनिस के साथ दो धरे गए

देहरादून से मिले इनपुट पर वन विभाग और वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो ने आजमगढ़ के एक निजी होटल में छापा मारकर दुर्लभ मॉनिटर लिजार्ड के 24 सूखे हेमीपेनिस बरामद किए और दो तस्करों को गिरफ्तार किया।

उत्तर प्रदेश का आजमगढ़ जिला इस बार एक ऐसी वजह से चर्चा में है, जिसके पीछे की कहानी अंधविश्वास, लालच और बेजुबान जीवों के साथ क्रूरता की परतें खोलती है। यहां एक निजी होटल के बंद कमरे में प्रतिबंधित वन्यजीव के सूखे अंगों का बड़ा अंतरराष्ट्रीय सौदा तय होने वाला था, लेकिन वन विभाग की समय रहते की गई कार्रवाई ने इस काले कारोबार पर पर्दा डालने की कोशिश को नाकाम कर दिया।

कैसे खुली पूरी साजिश

इस पूरे नेटवर्क की भनक वन विभाग को आजमगढ़ में नहीं, बल्कि सैकड़ों किलोमीटर दूर देहरादून से मिली। वहीं से मिले इनपुट में बताया गया कि जिले के सिधारी थाना क्षेत्र में स्थित एक निजी होटल के कमरा नंबर 209 में प्रतिबंधित वन्यजीव अंगों की एक बहुत बड़ी इंटरनेशनल डील होने वाली है। सूचना की पुष्टि होते ही वन विभाग और वन्य जीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो की संयुक्त टीम हरकत में आई और होटल पर अचानक धावा बोल दिया गया।

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कमरे की तलाशी में क्या मिला

कमरे की सघन तलाशी के दौरान टीम के हाथ जो लगा, उसने मौके पर मौजूद हर किसी को चौंका दिया। यहां दुर्लभ मॉनिटर लिजार्ड यानी गोह के 24 सूखे हेमीपेनिस बरामद हुए, जिनकी इंटरनेशनल मार्केट में कीमत करोड़ों रुपये में आंकी जा रही है। मौके से ही दो आरोपियों को दबोच लिया गया — दिल्ली निवासी अजय प्रताप सिंह और मऊ निवासी दिलीप राय।

अंधविश्वास और 'हत्थाजोड़ी' का काला बाज़ार

पूछताछ में तस्करों ने जो कबूल किया, वह रोंगटे खड़े कर देने वाला है। आरोपियों ने इन प्रतिबंधित पशु अवशेषों की अवैध खरीद-फरोख्त की बात स्वीकार की। इन्हीं दुर्लभ अंगों को 'हत्थाजोड़ी' के नाम से जाना जाता है और इनका इस्तेमाल कथित तौर पर तांत्रिक क्रियाओं, वशीकरण और कई तरह के टोटकों में किया जाना था। तंत्र-मंत्र की मान्यताओं और अंधविश्वास से चलने वाले इस बाज़ार में 'हत्थाजोड़ी' की भारी मांग बनी रहती है, यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसकी कीमत करोड़ों में लगाई जाती है। रातों-रात अमीर बनने की चाह में इन बेजुबान जीवों का बेरहमी से शिकार कर उनके अंगों की तस्करी की जा रही थी।

आगे की कार्रवाई

वन विभाग ने दोनों आरोपियों के खिलाफ वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 की सुसंगत धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया और उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। डीएफओ आजमगढ़ आकांक्षा जैन ने बताया कि सूचना के आधार पर जिले के एक निजी होटल में प्रतिबंधित वन्य जीवों की तस्करी की जानकारी मिली थी। उपलब्ध इनपुट के आधार पर टीम ने छापेमारी की, जिसमें प्रतिबंधित मॉनिटर लिजार्ड के 24 हथजोड़े बरामद किए गए।

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