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आठ साल बाद मुजफ्फरनगर की अदालत ने पत्नी की हत्या के दोषी पति को सुनाई मौत की सजाउत्तर प्रदेश
7 सित॰ 2026, 7:14 pm (51 दिन पहले)· 2

आठ साल बाद मुजफ्फरनगर की अदालत ने पत्नी की हत्या के दोषी पति को सुनाई मौत की सजा

मुजफ्फरनगर के शाहपुर इलाके में आठ साल पहले हुई एक महिला की जलकर मौत के मामले में फास्ट ट्रैक अदालत ने पति नदीम को मौत की सजा सुनाई है और एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है।

आठ साल पहले मुजफ्फरनगर के शाहपुर इलाके में एक महिला की जलने से मौत हो गई थी। इतने लंबे इंतजार के बाद अब इस मामले में इंसाफ मिला है। मुजफ्फरनगर की फास्ट ट्रैक अदालत ने सात सितंबर को फैसला सुनाते हुए पति नदीम को उसकी पत्नी की हत्या का दोषी ठहराया और उसे मौत की सजा दी। इसके साथ ही अदालत ने नदीम पर एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है।

2018 में क्या हुआ था

यह घटना 23 जुलाई 2018 की है। बागपत जिले के निवाड़ा गांव में रहने वाले दिलशाद ने अपनी बेटी की मौत के बाद शाहपुर थाने में शिकायत दी थी। उनका कहना था कि शादी के बाद से ही उनकी बेटी को ससुराल में दहेज के लिए लगातार तंग किया जाता रहा। दिलशाद के मुताबिक बेटी के साथ मारपीट की गई और फिर उस पर मिट्टी का तेल छिड़ककर आग लगा दी गई। आग से बुरी तरह झुलसी बेटी को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया, लेकिन वह जिंदगी की जंग हार गई और उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। बेटी की मौत ने पूरे परिवार को झकझोर दिया और दिलशाद ने बिना देर किए पुलिस का दरवाजा खटखटाया।

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केस दर्ज होने से गिरफ्तारी तक

दिलशाद की तहरीर पर शाहपुर थाने में अपराध संख्या 360/2018 के तहत मुकदमा दर्ज हुआ। पुलिस ने नदीम के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 498ए, 304बी, 302 व 504 के अलावा दहेज प्रतिषेध अधिनियम की धारा 3 व 4 भी लगाई। शिकायत मिलने के कुछ ही हफ्तों बाद, 26 अगस्त 2018 को पुलिस ने नदीम को गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद पुलिस ने विवेचना जारी रखी और सबूत जुटाए। पुलिस ने अपनी विवेचना 23 नवंबर 2018 को पूरी करते हुए अदालत में आरोप पत्र दाखिल कर दिया, जिसके बाद केस की सुनवाई अदालत में शुरू हुई।

गवाहों और सबूतों के दम पर बनी मजबूत पैरवी

मुजफ्फरनगर पुलिस के अनुसार, इस केस में ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत खास तवज्जो दी गई, ताकि आरोपी को सजा तक पहुंचाया जा सके। सुनवाई के दौरान गवाहों को समय-समय पर अदालत में पेश किया गया और अभियोजन पक्ष ने ठोस सबूतों के जरिए अपनी बात मजबूती से रखी। इस पूरी पैरवी में एडीजीसी कुलदीप कुमार और कोर्ट परोकार कांस्टेबल सुमित झा की भी अहम भूमिका रही, जिन्होंने केस को अंजाम तक पहुंचाने में मदद की।

आठ साल बाद आया फैसला

एडीजे/एफटीसी कोर्ट नंबर तीन के जज रवि कुमार दिवाकर ने 7 सितंबर 2026 को अपना फैसला सुनाते हुए नदीम को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 और 504 का दोषी ठहराया। अदालत ने उसे फांसी की सजा के साथ एक लाख रुपये अर्थदंड भरने का आदेश भी दिया। पुलिस अफसरों का कहना है कि यह फैसला गंभीर मामलों में मजबूत जांच और असरदार पैरवी की मिसाल है। अफसरों ने कहा कि ऐसे संगीन मामलों में दोषी तक पहुंचने की कोशिशें आगे भी जारी रहेंगी, ताकि पीड़ित परिवारों को समय पर इंसाफ मिल सके। मामला 2018 से 2026 तक करीब आठ साल चला, इस दौरान गवाही, जांच और सुनवाई के कई चरण पूरे हुए, तब जाकर अदालत इस नतीजे पर पहुंची।

सवाल-जवाब

यह घटना कब हुई थी?
यह घटना 23 जुलाई 2018 की है, जब मुजफ्फरनगर के शाहपुर इलाके में महिला की जलने से मौत हुई थी।
दोषी पति को क्या सजा मिली?
फास्ट ट्रैक अदालत ने पति नदीम को मौत की सजा सुनाई और एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया।
शिकायत किसने दर्ज कराई थी?
बागपत के निवाड़ा गांव के दिलशाद ने अपनी बेटी की मौत के बाद शाहपुर थाने में शिकायत दी थी।
नदीम पर कौन-कौन सी धाराएं लगाई गई थीं?
उस पर आईपीसी की धारा 498ए, 304बी, 302 और 504 के साथ दहेज प्रतिषेध अधिनियम की धारा 3 और 4 लगाई गई थी।
नदीम को कब गिरफ्तार किया गया था?
उसे 26 अगस्त 2018 को गिरफ्तार किया गया था।
फैसला किसने सुनाया?
एडीजे/एफटीसी कोर्ट नंबर तीन के जज रवि कुमार दिवाकर ने 7 सितंबर 2026 को यह फैसला सुनाया।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·51 दिन पहले

मुजफ्फरनगर की फास्ट ट्रैक अदालत का यह फैसला 'ऑपरेशन कन्विक्शन' और पुख्ता पुलिस विवेचना की मिसाल है, जहां दहेज हत्या के मामले में आठ साल लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद अदालत ने दोषी को मृत्युदंड दिया है। हालांकि, देश की न्याय व्यवस्था में आठ साल की लंबी अवधि यह सवाल भी छोड़ती है कि गंभीर आपराधिक मामलों के ट्रायल को और अधिक त्वरित कैसे बनाया जाए, ताकि ऐसे जघन्य मामलों में पीड़ितों के परिवारों को समय पर न्याय की वास्तविक संतुष्टि मिल सके।

Rohan Verma@rohan-verma·51 दिन पहले

उत्तर प्रदेश पुलिस के 'ऑपरेशन कन्विक्शन' अभियान के तहत मुजफ्फरनगर की अदालत द्वारा सजा सुनाया जाना इस बात का संकेत है कि वैज्ञानिक साक्ष्यों और प्रभावी पैरवी से गंभीर अपराधों में अपराधियों को कानून के शिकंजे में कसा जा सकता है। न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर की अदालत का यह फैसला दहेज उत्पीड़न और हत्या के मामलों में एक कड़ा संदेश देता है। हालांकि, इस तरह के मामलों में आठ साल की लंबी कानूनी प्रक्रिया यह सोचने पर मजबूर करती है कि निचली अदालतों में मुकदमों के त्वरित निस्तारण के लिए ढांचागत सुधारों को और तेजी से लागू किया जाना कितना आवश्यक है।

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