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12 सित॰ 2026, 8:30 pm (1 घंटे पहले)· 2

टाटा संस की अर्जी रिजर्व बैंक ने की खारिज, अब शेयर बाजार में दस्तक देने के अलावा नहीं बचा कोई रास्ता

रिजर्व बैंक ने टाटा संस की कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी का रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट सरेंडर करने की अर्जी को ठुकरा दिया है, जिसके बाद अब देश के इस बड़े औद्योगिक घराने की होल्डिंग कंपनी को शेयर बाजार में लिस्ट होना ही पड़ेगा।

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और देश के सबसे बड़े औद्योगिक घरानों में से एक टाटा समूह (Tata Group) के बीच काफी समय से चली आ रही रस्साकसी अब अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच गई है। केंद्रीय बैंक ने टाटा समूह को एक बहुत बड़ा झटका देते हुए टाटा संस (Tata Sons) की उस अर्जी को पूरी तरह से नामंजूर कर दिया है, जिसमें कंपनी ने अपना गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी यानी NBFC का रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट सरेंडर करने की मांग की थी। रिजर्व बैंक के इस कड़े रुख के बाद अब टाटा संस के सामने अपनी होल्डिंग कंपनी को शेयर बाजार में लिस्ट कराने के अलावा और कोई विकल्प नहीं बचा है। कंपनी ने यह अर्जी इसलिए दाखिल की थी ताकि वह NBFC लाइसेंस को वापस करके रेगुलेटर के कड़े नियमों से बच सके और उसे खुद को शेयर बाजार में सार्वजनिक रूप से लिस्ट न करना पड़े, लेकिन रेगुलेटर ने इस उम्मीद पर पूरी तरह पानी फेर दिया है।

आरबीआई के सख्त रुख से टाटा संस की योजनाएं प्रभावित

टाटा संस ने काफी समय और मेहनत लगाकर खुद को लिस्टिंग के दायरे से बाहर रखने की रणनीति बनाई थी। इस योजना के तहत कंपनी ने मार्च 2024 में ही RBI के पास जाकर अपना कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी (CIC) का रजिस्ट्रेशन सरेंडर करने के लिए आधिकारिक आवेदन दिया था। इस आवेदन को मजबूत आधार देने के लिए कंपनी ने अपने ऊपर बकाया करीब 21,813 करोड़ रुपये के भारी-भरकम कर्ज का पूरा भुगतान भी कर दिया था। कंपनी का सोचना था कि जब उसके पास कोई बाहरी कर्ज या सार्वजनिक फंड का निवेश नहीं रहेगा, तो वह आसानी से इस कड़े नियमन के दायरे से बाहर निकल जाएगी। लेकिन रेगुलेटर ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया और स्पष्ट कर दिया कि कंपनी को मौजूदा वित्तीय ढांचे के नियमों का पूरी तरह से पालन करना ही होगा।

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अपर लेयर एनबीएफसी के कड़े नियम और समय सीमा का उल्लंघन

केंद्रीय बैंक ने यह साफ कर दिया है कि टाटा संस को पूर्व निर्धारित अपर लेयर NBFC के फ्रेमवर्क के तहत ही काम करना होगा। गौरतलब है कि अगस्त 2026 में भी RBI ने टाटा संस को देश की उन 17 अत्यंत महत्वपूर्ण अपर लेयर NBFC की सूची में बरकरार रखा था, जिन पर कड़ी निगरानी रखी जाती है। उस दौरान रेगुलेटर ने कहा था कि टाटा संस की ओर से रजिस्ट्रेशन रद्द करने के आवेदन की समीक्षा की जा रही है और उचित समय पर इस पर अंतिम फैसला लिया जाएगा। अब केंद्रीय बैंक ने अपनी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट करते हुए आवेदन को खारिज कर दिया है।

वास्तव में, RBI ने सितंबर 2022 में ही टाटा संस को अपर लेयर NBFC श्रेणी में वर्गीकृत किया था। इस विशेष नियामक ढांचे के शुरुआती नियमों में यह स्पष्ट तौर पर दर्ज था कि इस श्रेणी में आने वाली प्रत्येक कंपनी को तीन साल की निर्धारित अवधि के भीतर शेयर बाजार में लिस्ट होना अनिवार्य होगा। इस समय सीमा के अनुसार टाटा संस के लिए लिस्टिंग की अंतिम तारीख सितंबर 2025 में ही समाप्त हो चुकी है। इस समय सीमा के बीत जाने के बाद भी कंपनी ने खुद को लिस्ट नहीं कराया और लगातार यह कोशिश करती रही कि किसी तरह लाइसेंस सरेंडर करके इस लिस्टिंग की अनिवार्यता से कानूनी रूप से बचा जा सके, लेकिन अब उसके सारे रास्ते बंद हो चुके हैं।

इस नियामक दायरे की वजह और निवेशकों के लिए बड़ा अवसर

लगभग चार वर्ष पहले केंद्रीय बैंक ने देश के वित्तीय क्षेत्र को सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए NBFC का नया स्केल-बेस्ड रेगुलेशन ढांचा तैयार किया था। इस ढांचे के तहत यह प्रावधान किया गया था कि जिस किसी भी NBFC का कुल बाजार पूंजीकरण (मार्केट कैप) या संपत्ति का पैमाना 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक होगा, उसे प्रणालीगत रूप से महत्वपूर्ण मानते हुए अपर लेयर में रखा जाएगा और उसके लिए शेयर बाजार में लिस्टिंग कराना अनिवार्य होगा। टाटा संस का आकार और उसका बाजार मूल्यांकन इस तय सीमा से कई गुना अधिक है, जिसके कारण उसे इस विशेष सूची में शामिल किया गया था।

टाटा संस पूरे टाटा समूह की मुख्य होल्डिंग कंपनी है, जिसमें लोक कल्याणकारी संस्था टाटा ट्रस्ट (Tata Trusts) की लगभग 66 फीसदी की बहुलांश हिस्सेदारी है। यदि यह कंपनी आने वाले समय में शेयर बाजार में अपनी लिस्टिंग की प्रक्रिया शुरू करती है, तो यह भारतीय कॉर्पोरेट इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा और सबसे ऐतिहासिक इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) साबित हो सकता है। इससे न केवल टाटा समूह के वित्तीय ढांचे में पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि देश के आम और खास दोनों ही तरह के निवेशकों को एक बेहद मजबूत और विशालकाय कंपनी में सीधे तौर पर निवेश करके बड़ी पूंजी बनाने का सुनहरा अवसर मिलेगा।

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