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बहराइच के दीपू निषाद ने बिना पढ़ाई ट्रैक्टर की बैटरी से बनाया पंखा और लाइट चलाने का जुगाड़भारत
30 अग॰ 2026, 9:04 pm (2 घंटे पहले)· 3

बहराइच के दीपू निषाद ने बिना पढ़ाई ट्रैक्टर की बैटरी से बनाया पंखा और लाइट चलाने का जुगाड़

बहराइच जिले के जानकीनगर गांव के रहने वाले दीपू निषाद ने बिना किसी औपचारिक शिक्षा के ट्रैक्टर की बैटरी से एक ऐसा सिस्टम तैयार किया है जिससे पंखा, लाइट और मोबाइल फोन आसानी से चल जाते हैं।

बहराइच जिले के एक छोटे से गांव जानकीनगर के निवासी दीपू निषाद इन दिनों अपने नायाब आविष्कारों की वजह से पूरे क्षेत्र में आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। कभी भी स्कूल की चौखट तक न पहुंचने वाले लगभग 30 वर्षीय दीपू ने इस बात को पूरी तरह सच साबित कर दिया है कि प्रतिभा किसी कागजी डिग्री की मोहताज नहीं होती है। एक बहुत ही साधारण किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाले दीपू के इस शानदार प्रयास ने यह दिखा दिया है कि यदि कुछ नया करने की लगन दिल में हो, तो रास्ते अपने आप बनते चले जाते हैं।

बिजली की समस्या से उपजा अनोखा विचार

दीपू जिस जानकीनगर गांव में निवास करते हैं, वहां पर बिजली के खंभे तो खड़े हैं परंतु उनमें कभी भी करंट प्रवाहित नहीं होता है। रात के समय छाने वाला अंधेरा और भीषण गर्मी इस पूरे गांव के लिए एक बड़ी परेशानी का सबब बनी रहती थी। इसी विकट समस्या का कोई ना कोई समाधान ढूंढने के लिए दीपू ने अपनी औपचारिक शिक्षा न होने की लाचारी को कभी आड़े नहीं आने दिया। उन्होंने अपने स्मार्टफोन पर यूट्यूब के वीडियो लगातार देखकर विज्ञान के बुनियादी सिद्धांतों को बारीकी से समझा और घर पर ही नए-नए प्रयोग करने की शुरुआत कर दी। देखते ही देखते उन्होंने अपने घर के अंदर ही तकनीकी जुगाड़ का एक ऐसा अनूठा ढांचा तैयार कर डाला जिसने देखने वाले हर शख्स को पूरी तरह अचंभित कर दिया।

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ट्रैक्टर की बैटरी से रोशन हुआ घर

कुछ समय पहले ही दीपू ने अपने ट्रैक्टर में लगे सेल्फ और बैटरी की सहायता से एक बेहतरीन तकनीक विकसित की है। इस विशेष तकनीक के माध्यम से वह केवल तेज हवा देने वाला पंखा ही नहीं चला रहे हैं, बल्कि घर के भीतर रोशनी करके अंधेरे को भी पूरी तरह भगा रहे हैं। इसके अलावा इस अनूठे जुगाड़ की मदद से मोबाइल फोन भी बहुत आसानी से चार्ज हो जाया करता है। जब दिन के समय ट्रैक्टर खेतों में कामकाज करता रहता है, तो उसकी बैटरी अपने आप पूरी तरह से चार्ज हो जाती है। जैसे ही रात होती है, दीपू इस चार्ज हो चुकी बैटरी का इस्तेमाल अपने घर के तमाम जरूरी उपकरणों को चलाने के लिए करते हैं।

बिना इंजन चालू रखे चलता है यह सिस्टम

इस देसी आविष्कार की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसके लिए ट्रैक्टर का चालू रहना बिल्कुल भी जरूरी नहीं होता है। ट्रैक्टर का इंजन बंद होने के बावजूद दीपू का यह ingenious सिस्टम पूरी क्षमता के साथ लगातार काम करता रहता है। दीपू का ऐसा मानना है कि भले ही उन्होंने औपचारिक शिक्षा हासिल नहीं की है, लेकिन कुछ नया सीखने की तीव्र इच्छा ने ही उन्हें यह सब कर दिखाने की सच्ची प्रेरणा दी है। आज के समय में गांव के तमाम लोग दीपू की इस दूरदर्शी और बेहद व्यावहारिक सोच की दिल खोलकर सराहना कर रहे हैं। बिना किसी भी प्रकार की सरकारी सहायता या फिर भारी-भरकम बजट के दीपू का यह देसी जुगाड़ आसपास के अन्य गांवों में भी भारी कौतूहल और प्रेरणा का एक बड़ा विषय बना हुआ है।

सवाल-जवाब

दीपू निषाद किस गांव के रहने वाले हैं?
दीपू निषाद बहराइच जिले के जानकीनगर गांव के रहने वाले हैं।
दीपू ने किस चीज से पंखा और लाइट चलाने का सिस्टम बनाया है?
दीपू ने ट्रैक्टर में लगे सेल्फ और बैटरी की मदद से यह सिस्टम तैयार किया है।
क्या इस जुगाड़ के लिए ट्रैक्टर को चालू रखना पड़ता है?
नहीं, ट्रैक्टर बंद होने के बावजूद यह सिस्टम पूरी क्षमता के साथ काम करता है।
दीपू ने इस तकनीक को कैसे सीखा?
दीपू ने स्मार्टफोन पर यूट्यूब वीडियो देखकर विज्ञान के मूल सिद्धांतों को समझा और यह प्रयोग किया।
इस सिस्टम से क्या-क्या चलाया जा सकता है?
इस सिस्टम से पंखा चलाया जा सकता है, घर में लाइट जलाई जा सकती है और मोबाइल चार्ज किया जा सकता है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·58 मिनट पहले

यह खबर ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं के अभाव और बिजली संकट को उजागर करती है, जहाँ जानकीनगर गांव में बिजली के खंभे होने के बावजूद करंट प्रवाहित नहीं होता। हालांकि यह तकनीकी जुगाड़ और स्थानीय नवाचार का एक बेहतरीन उदाहरण है, लेकिन इस तरह के मामलों में यदि बैटरी के रख-रखाव या वायरिंग में सुरक्षा मानकों की अनदेखी की जाए, तो शॉर्ट सर्किट जैसी दुर्घटनाओं का गंभीर जोखिम पैदा हो सकता है, जिससे सार्वजनिक सुरक्षा और घरेलू संरक्षा पर खतरा मंडरा सकता है।

Ravikash Gupta@ravikash·58 मिनट पहले

करण मल्होत्रा के सुरक्षा संबंधी सरोकारों को आगे बढ़ाते हुए, यह देखना महत्वपूर्ण है कि इस प्रकार के जमीनी स्तर के अनौपचारिक प्रयोग भारत के विशाल ग्रामीण बाजार में एक बड़े आर्थिक और स्टार्टअप अवसर की ओर इशारा करते हैं। जब एक ओर गांवों में ग्रिड-आधारित बिजली आपूर्ति विफल हो रही है, तब इस तरह के सौर या बैटरी-संचालित माइक्रोग्रिड समाधानों की भारी मांग ग्रामीण अर्थव्यवस्था में उभर रही है। यदि स्थानीय विनिर्माण और एमएसएमई सेक्टर इस तरह की किफायती और सुरक्षित तकनीक को औपचारिक रूप दे सकें, तो यह न केवल गांवों में बिजली संकट का स्थायी समाधान बनेगा, बल्कि ग्रामीण भारत में रोजगार और निवेश के नए रास्ते भी खोल सकता है।

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