हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले से एक बड़ी खबर सामने आ रही है, जहां भारी बारिश के कारण ट्रेन की पटरी के नीचे से मिट्टी खिसकने की गंभीर घटना घटी है। इस अप्रत्याशित भूस्खलन के चलते नॉर्दर्न रेलवे ने एहतियात के तौर पर इस व्यस्त रूट की कई महत्वपूर्ण ट्रेन सेवाओं को पूरी तरह से रद्द कर दिया है। रेलवे अधिकारियों द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, कालका-शिमला रूट पर पहाड़ी के एक हिस्से के दरकने से यातायात पूरी तरह बाधित हो गया। इस आपदा के कारण रेलवे ट्रैक से जुड़ा एक कनेक्टिंग ब्रिज हवा में लटक गया और उसका कुछ हिस्सा खुला रह गया, जिससे तुरंत बड़ा कदम उठाते हुए कम से कम 391 यात्रियों और ट्रेन के 40 क्रू सदस्यों को सुरक्षित कालका तक पहुंचाया गया। यह पूरी दुर्घटना लगातार हो रही भारी बारिश के बीच शनिवार रात को कोटी और घुम्मन स्टेशनों के बीच घटित हुई, जहां ट्रैक के नीचे की जमीन कमजोर पड़ गई थी।
कोटी और घुम्मन स्टेशनों के बीच हुई भूस्खलन की घटना
रेलवे के एक आधिकारिक प्रेस नोट में इस बात का विशेष रूप से उल्लेख किया गया है कि शिमला-कालका यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज सेक्शन पर कोटी और घुम्मन स्टेशनों के बीच स्थित ब्रिज नंबर 57 के पास अचानक पहाड़ का एक बड़ा हिस्सा खिसक गया था। इस आपदा के सामने आते ही नॉर्दर्न रेलवे के अधिकारियों ने बिना किसी देरी के त्वरित और बेहद सुचारू रूप से बचाव अभियान का संचालन किया ताकि किसी भी यात्री को असुविधा का सामना न करना पड़े। इस खतरनाक स्थिति के उत्पन्न होते ही रास्ते में आ रही चार महत्वपूर्ण ट्रेनों को बीच में ही रोक दिया गया ताकि किसी भी बड़े हादसे को टाला जा सके। रेलवे प्रशासन ने तत्परता दिखाते हुए सोलन, कोटी और धर्मपुर के अलग-अलग हिस्सों में फंसे 400 से अधिक यात्रियों और ट्रेन क्रू के सदस्यों को सुरक्षित निकालने के लिए कुल पांच बसों और दो टेम्पो ट्रैवलर्स की व्यवस्था की, जिनके जरिए सभी को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया।
चार सौ से अधिक यात्रियों का हुआ सफल रेस्क्यू
जारी किए गए प्रेस नोट के अनुसार, जहां एक ओर स्थानीय स्तर पर सफर कर रहे यात्रियों को उनकी तयशुदा मंजिल तक बसों के माध्यम से पहुंचाया गया, वहीं दूसरी ओर सुदूर यात्रा करने वाले लगभग 120 यात्रियों को एक विशेष रूप से निर्धारित ट्रेन नंबर 13052 में समायोजित किया गया। रेलवे ने यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए इस विशेष ट्रेन के संचालन का समय बदलकर आधी रात को 1.30 बजे तय किया था। सार्वजनिक परिवहन विभाग ने यह भी साझा किया कि नॉर्दर्न रेलवे के समर्पित कर्मचारियों की मुस्तैदी, कुशल ट्रांसशिपमेंट और यात्रियों के प्रति दिखाई गई सहानुभूतिपूर्ण देखभाल के कारण यह पूरा बचाव अभियान बेहद शांतिपूर्ण ढंग से पूरा हुआ। राहत की बात यह रही कि कालका स्टेशन पर पहुंचने के बाद किसी भी यात्री की तरफ से कोई शिकायत या रिफंड का अनुरोध दर्ज नहीं कराया गया, जो रेलवे की प्रशासनिक सफलता को दर्शाता है।
दस ट्रेनों के पहिए थमे और हेरिटेज रूट पर असर
इस हादसे से ठीक पहले रेलवे अधिकारियों ने मीडिया को जानकारी दी थी कि सोलन जिले के इस संवेदनशील क्षेत्र में रेलवे ट्रैक के एक बड़े हिस्से के नीचे से मिट्टी बह जाने के कारण शिमला-कालका नैरो गेज रेल लाइन पर कुल दस ट्रेनों को पूरी तरह से रद्द करना पड़ा है। इस अचानक आई बाधा के कारण आमतौर पर वीकेंड के दिनों में पर्यटकों, प्रकृति प्रेमियों और स्थानीय यात्रियों की भारी भीड़ से गुलजार रहने वाला शिमला रेलवे स्टेशन रविवार के दिन बेहद शांत नजर आया और वहां सन्नाटा पसरा रहा। गौर करने वाली बात यह है कि इस पूरे मानसून सीजन के दौरान मूसलाधार बारिश और लगातार हो रहे भूस्खलन के कारण ऐतिहासिक कालका-शिमला हेरिटेज रेल लाइन पर ट्रेन सेवाओं का बाधित होना एक आम समस्या बनता जा रहा है। लगभग 96 किलोमीटर लंबी यह शिमला-कालका लाइन अत्यंत खूबसूरत होने के साथ-साथ भौगोलिक रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण और घुमावदार रास्तों से होकर गुजरती है, जो कि इंजीनियरिंग के क्षेत्र में एक अद्वितीय और शानदार नमूना मानी जाती है और देश-विदेश के पर्यटकों के लिए हमेशा से एक मुख्य आकर्षण का केंद्र रही है। इस ऐतिहासिक रेल मार्ग पर कुल 102 सुरंगें, 800 पुल और 919 तीखे मोड़ मौजूद हैं, जो इसके सफर को रोमांचक बनाते हैं।





















