उत्तर प्रदेश के बाजारों में छाई सीएम योगी ब्रांड की साड़ी, बुलडोजर और कमल के फूल के साथ व्यापारी वर्ग में भारी मांगपीलीभीत में मजदूरी के पैसों के विवाद में बेरहमी से हत्या, घर में खींचकर लाठी-डंडों से पीटा गया युवकबच्चों को डांटने की बजाय अपनाएं ये 5 पॉजिटिव पैरेंटिंग तरीके, आत्मविश्वास से भर जाएगा बच्चापाली में चचेरी बहन ने पेश की अनोखी मिसाल, 13 घंटे चले मैराथन ऑपरेशन में भाई को दिया नया जीवनहिप इंजरी से उबरने के बाद काम पर लौटने को तैयार रश्मिका मंदाना, इंस्टाग्राम पोस्ट में बयां किए जज्बातसंसद चलो मार्च के दौरान क्यों भड़के थे अभिजीत दीपके, साथियों की गुमशुदगी और पांच घंटे की बैठक का पूरा सचमुंबई के बांद्रा में दिल दहला देने वाला हादसा, तेज रफ्तार कार की चपेट में आने से नौ साल के मासूम की मौतस्मृति मंधाना ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में बनाया नया रिकॉर्ड, सूजी बेट्स को पछाड़कर हासिल किया दूसरा स्थानउज्बेकिस्तान के सर्वोच्च सम्मान से नवाजे गए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह ने दी बधाईगूगल मैप्स ने बदला लेक ओन्टारियो का नाम, अब अमेरिका में दिखा रहा लेक अमेरिका
कालका-शिमला रेल मार्ग पर लैंडस्लाइड से ट्रैक क्षतिग्रस्त, दस ट्रेनें रद्द और चार सौ से अधिक यात्री सुरक्षित निकाले गएभारत
30 अग॰ 2026, 9:15 pm (1 घंटे पहले)· 2

कालका-शिमला रेल मार्ग पर लैंडस्लाइड से ट्रैक क्षतिग्रस्त, दस ट्रेनें रद्द और चार सौ से अधिक यात्री सुरक्षित निकाले गए

हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले में भारी बारिश के कारण कालका-शिमला रेल मार्ग पर ट्रैक धंसने से दस ट्रेनें रद्द कर दी गईं। रेलवे ने त्वरित कार्रवाई करते हुए लगभग चार सौ यात्रियों और क्रू सदस्यों को सुरक्षित बाहर निकाला।

हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले से एक बड़ी खबर सामने आ रही है, जहां भारी बारिश के कारण ट्रेन की पटरी के नीचे से मिट्टी खिसकने की गंभीर घटना घटी है। इस अप्रत्याशित भूस्खलन के चलते नॉर्दर्न रेलवे ने एहतियात के तौर पर इस व्यस्त रूट की कई महत्वपूर्ण ट्रेन सेवाओं को पूरी तरह से रद्द कर दिया है। रेलवे अधिकारियों द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, कालका-शिमला रूट पर पहाड़ी के एक हिस्से के दरकने से यातायात पूरी तरह बाधित हो गया। इस आपदा के कारण रेलवे ट्रैक से जुड़ा एक कनेक्टिंग ब्रिज हवा में लटक गया और उसका कुछ हिस्सा खुला रह गया, जिससे तुरंत बड़ा कदम उठाते हुए कम से कम 391 यात्रियों और ट्रेन के 40 क्रू सदस्यों को सुरक्षित कालका तक पहुंचाया गया। यह पूरी दुर्घटना लगातार हो रही भारी बारिश के बीच शनिवार रात को कोटी और घुम्मन स्टेशनों के बीच घटित हुई, जहां ट्रैक के नीचे की जमीन कमजोर पड़ गई थी।

कोटी और घुम्मन स्टेशनों के बीच हुई भूस्खलन की घटना

रेलवे के एक आधिकारिक प्रेस नोट में इस बात का विशेष रूप से उल्लेख किया गया है कि शिमला-कालका यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज सेक्शन पर कोटी और घुम्मन स्टेशनों के बीच स्थित ब्रिज नंबर 57 के पास अचानक पहाड़ का एक बड़ा हिस्सा खिसक गया था। इस आपदा के सामने आते ही नॉर्दर्न रेलवे के अधिकारियों ने बिना किसी देरी के त्वरित और बेहद सुचारू रूप से बचाव अभियान का संचालन किया ताकि किसी भी यात्री को असुविधा का सामना न करना पड़े। इस खतरनाक स्थिति के उत्पन्न होते ही रास्ते में आ रही चार महत्वपूर्ण ट्रेनों को बीच में ही रोक दिया गया ताकि किसी भी बड़े हादसे को टाला जा सके। रेलवे प्रशासन ने तत्परता दिखाते हुए सोलन, कोटी और धर्मपुर के अलग-अलग हिस्सों में फंसे 400 से अधिक यात्रियों और ट्रेन क्रू के सदस्यों को सुरक्षित निकालने के लिए कुल पांच बसों और दो टेम्पो ट्रैवलर्स की व्यवस्था की, जिनके जरिए सभी को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया।

ये भी पढ़ें

चार सौ से अधिक यात्रियों का हुआ सफल रेस्क्यू

जारी किए गए प्रेस नोट के अनुसार, जहां एक ओर स्थानीय स्तर पर सफर कर रहे यात्रियों को उनकी तयशुदा मंजिल तक बसों के माध्यम से पहुंचाया गया, वहीं दूसरी ओर सुदूर यात्रा करने वाले लगभग 120 यात्रियों को एक विशेष रूप से निर्धारित ट्रेन नंबर 13052 में समायोजित किया गया। रेलवे ने यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए इस विशेष ट्रेन के संचालन का समय बदलकर आधी रात को 1.30 बजे तय किया था। सार्वजनिक परिवहन विभाग ने यह भी साझा किया कि नॉर्दर्न रेलवे के समर्पित कर्मचारियों की मुस्तैदी, कुशल ट्रांसशिपमेंट और यात्रियों के प्रति दिखाई गई सहानुभूतिपूर्ण देखभाल के कारण यह पूरा बचाव अभियान बेहद शांतिपूर्ण ढंग से पूरा हुआ। राहत की बात यह रही कि कालका स्टेशन पर पहुंचने के बाद किसी भी यात्री की तरफ से कोई शिकायत या रिफंड का अनुरोध दर्ज नहीं कराया गया, जो रेलवे की प्रशासनिक सफलता को दर्शाता है।

दस ट्रेनों के पहिए थमे और हेरिटेज रूट पर असर

इस हादसे से ठीक पहले रेलवे अधिकारियों ने मीडिया को जानकारी दी थी कि सोलन जिले के इस संवेदनशील क्षेत्र में रेलवे ट्रैक के एक बड़े हिस्से के नीचे से मिट्टी बह जाने के कारण शिमला-कालका नैरो गेज रेल लाइन पर कुल दस ट्रेनों को पूरी तरह से रद्द करना पड़ा है। इस अचानक आई बाधा के कारण आमतौर पर वीकेंड के दिनों में पर्यटकों, प्रकृति प्रेमियों और स्थानीय यात्रियों की भारी भीड़ से गुलजार रहने वाला शिमला रेलवे स्टेशन रविवार के दिन बेहद शांत नजर आया और वहां सन्नाटा पसरा रहा। गौर करने वाली बात यह है कि इस पूरे मानसून सीजन के दौरान मूसलाधार बारिश और लगातार हो रहे भूस्खलन के कारण ऐतिहासिक कालका-शिमला हेरिटेज रेल लाइन पर ट्रेन सेवाओं का बाधित होना एक आम समस्या बनता जा रहा है। लगभग 96 किलोमीटर लंबी यह शिमला-कालका लाइन अत्यंत खूबसूरत होने के साथ-साथ भौगोलिक रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण और घुमावदार रास्तों से होकर गुजरती है, जो कि इंजीनियरिंग के क्षेत्र में एक अद्वितीय और शानदार नमूना मानी जाती है और देश-विदेश के पर्यटकों के लिए हमेशा से एक मुख्य आकर्षण का केंद्र रही है। इस ऐतिहासिक रेल मार्ग पर कुल 102 सुरंगें, 800 पुल और 919 तीखे मोड़ मौजूद हैं, जो इसके सफर को रोमांचक बनाते हैं।

सवाल-जवाब

कालका-शिमला रूट पर लैंडस्लाइड कहां हुई?
यह लैंडस्लाइड हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले में कोटी और घुम्मन स्टेशनों के बीच ब्रिज नंबर 57 के पास हुई।
इस घटना के बाद कितनी ट्रेनें रद्द की गईं?
रेलवे ट्रैक के नीचे से मिट्टी बह जाने के कारण शिमला-कालका नैरो गेज लाइन पर कुल दस ट्रेनें रद्द कर दी गईं।
कितने यात्रियों और क्रू सदस्यों को सुरक्षित निकाला गया?
इस घटना के बाद लगभग 391 यात्रियों और 40 क्रू सदस्यों समेत 400 से अधिक लोगों को सुरक्षित कालका पहुंचाया गया।
यात्रियों को निकालने के लिए क्या व्यवस्था की गई थी?
रेलवे ने यात्रियों को ले जाने के लिए पांच बसों और दो टेम्पो ट्रैवलर की व्यवस्था की, जबकि 120 यात्रियों को एक विशेष रूप से समय बदलकर चलाई गई ट्रेन में जगह दी गई।
शिमला-कालका रेल लाइन की कुल लंबाई कितनी है?
शिमला-कालका रेल लाइन लगभग 96 किलोमीटर लंबी है, जिसमें 102 सुरंगें और 800 पुल बने हुए हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·1 घंटे पहले

कालका-शिमला यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज रेल मार्ग पर यह घटना न केवल इस ऐतिहासिक लाइन की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि पहाड़ी क्षेत्रों में मानसून के दौरान बुनियादी ढांचे को कितनी बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। ब्रिज नंबर 57 के पास ट्रैक का हवा में लटकना और भारी मिट्टी का खिसकना यह चेतावनी है कि इस पूरे संवेदनशील सेक्शन पर जियोलॉजिकल सर्वे और मानसून पूर्व तैयारियों की व्यापक समीक्षा की जानी बेहद आवश्यक है ताकि भविष्य में पर्यटकों की जान को जोखिम में डाले बिना इस धरोहर को बचाया जा सके।

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 घंटे पहले

यह घटना सिर्फ एक प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि पहाड़ी क्षेत्रों में पर्यावरण और परिवहन के बीच बढ़ते संघर्ष का गंभीर कानूनी और प्रशासनिक मामला है। यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट होने के नाते इस हेरिटेज ट्रैक पर सार्वजनिक सुरक्षा और मानव जीवन की रक्षा करना रेलवे प्रशासन की सर्वोच्च कानूनी जिम्मेदारी है। यदि समय रहते भू-तकनीकी ऑडिट और पर्यावरण संवेदनशीलता के नियमों का कड़ाई से पालन नहीं किया गया, तो भविष्य में ऐसी ढांचागत विफलताएं बड़े आपराधिक और नागरिक दायित्वों को जन्म दे सकती हैं, जिससे प्रशासनिक जवाबदेही तय करना अनिवार्य हो जाता है।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR