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बिहार के शिक्षा घोटाले की जड़ें आईएएस अधिकारी आनंद किशोर तक, नौ अधिकारियों की जांच की उठी मांगबिहार
29 जून 2026, 6:07 pm (43 दिन पहले)· 3

बिहार के शिक्षा घोटाले की जड़ें आईएएस अधिकारी आनंद किशोर तक, नौ अधिकारियों की जांच की उठी मांग

आरजेडी सांसद सुधाकर सिंह ने वरिष्ठ आईएएस अधिकारी आनंद किशोर को बिहार का 'सबसे बड़ा माफिया' बताते हुए उन पर शिक्षा विभाग में घोटालों का नेटवर्क खड़ा करने और रिशु श्री को पहला सरकारी टेंडर दिलाने का आरोप लगाया है।

पटना से एक बड़ा राजनीतिक विवाद सामने आया है। आरजेडी सांसद सुधाकर सिंह ने बिहार के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी आनंद किशोर के खिलाफ जबरदस्त मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने रिशु श्री मामले को केंद्र में रखते हुए दावा किया कि बिहार की शिक्षा व्यवस्था में वर्षों से चल रहे घोटालों की नींव आनंद किशोर के कार्यकाल में रखी गई थी। सांसद ने यह भी आरोप लगाया कि रिशु श्री को सबसे पहले सरकारी टेंडर देने वाले भी आनंद किशोर ही थे। इन तमाम आरोपों पर संबंधित अधिकारियों या राज्य सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई।

आनंद किशोर पर 'माफिया' का सीधा आरोप

मीडिया के सामने अपनी बात रखते हुए सुधाकर सिंह ने बेबाकी से कहा कि आनंद किशोर बिहार के सबसे बड़े माफिया हैं। उनका दावा है कि इस आईएएस अधिकारी ने शिक्षा तंत्र को खोखला करने और भ्रष्टाचार का पूरा जाल बिछाने में अहम भूमिका निभाई। सांसद ने बताया कि पिछले 10 वर्षों में राज्य में आयोजित कई परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुईं और टॉपर घोटाले जैसी घटनाएं भी इसी भ्रष्ट व्यवस्था का नतीजा रही हैं।

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रिशु श्री को पहला टेंडर देने का आरोप

सुधाकर सिंह ने सीधे आरोप लगाया कि विवादित रिशु श्री को सरकारी टेंडर सबसे पहले आनंद किशोर ने ही दिलाया था। उनका कहना है कि इसी टेंडर के बाद शिक्षा विभाग में कई तरह की वित्तीय अनियमितताओं का रास्ता खुला। हालांकि सांसद ने सार्वजनिक मंच पर इन आरोपों के समर्थन में कोई दस्तावेजी प्रमाण पेश नहीं किया।

तत्कालीन मुख्य सचिव और नौ आईएएस अधिकारियों पर भी निशाना

सुधाकर सिंह ने अपने आरोपों का दायरा सिर्फ आनंद किशोर तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने बिहार के तत्कालीन मुख्य सचिव दीपक कुमार पर भी गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि आनंद किशोर कथित तौर पर उनके संरक्षण में काम कर रहे थे। इसके साथ ही सांसद ने मांग रखी कि आनंद किशोर समेत नौ आईएएस अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

अरबों-खरबों की लूट और विदेश में निवेश का दावा

सांसद ने यह भी आरोप लगाया कि आनंद किशोर ने अरबों-खरबों रुपये का घोटाला किया और उस पैसे को विदेशों में लगाया। सुधाकर सिंह ने कहा कि अगर सरकार उनके खिलाफ अदालत जाना चाहती है तो वह जाए, क्योंकि उनके पास अपने आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं।

चारा घोटाले की तर्ज पर न्यायिक निगरानी में जांच की मांग

सुधाकर सिंह ने इस पूरे मामले की जांच चारा घोटाले की तरह अदालत की निगरानी में कराने की मांग उठाई। उनका तर्क है कि केवल न्यायिक देखरेख में ही इस मामले की असली सच्चाई उजागर हो सकती है और दोषियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई सुनिश्चित की जा सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि बिहार की शिक्षा व्यवस्था में भ्रष्टाचार और अनियमितताओं की शिकायतें वर्षों से सामने आती रही हैं, लेकिन सरकार जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई करने की बजाय उन्हें संरक्षण देती रही है। इन तमाम गंभीर आरोपों पर संबंधित अधिकारियों और राज्य सरकार की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया।

सवाल-जवाब

सुधाकर सिंह ने आनंद किशोर पर मुख्य रूप से क्या आरोप लगाए हैं?
सुधाकर सिंह ने आनंद किशोर को बिहार का सबसे बड़ा माफिया बताते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने शिक्षा विभाग में घोटालों का नेटवर्क खड़ा किया और रिशु श्री को पहला सरकारी टेंडर दिलाया।
रिशु श्री को सबसे पहला सरकारी टेंडर किसने दिलाया था?
सांसद सुधाकर सिंह के अनुसार, रिशु श्री को सबसे पहले सरकारी टेंडर आनंद किशोर ने ही दिलाया था।
सुधाकर सिंह ने इस मामले की जांच किस तरह से कराने की मांग की?
उन्होंने चारा घोटाले की तर्ज पर इस पूरे मामले की जांच अदालत की निगरानी में कराने की मांग की।
तत्कालीन मुख्य सचिव दीपक कुमार पर क्या आरोप लगाए गए?
सुधाकर सिंह ने आरोप लगाया कि आनंद किशोर कथित तौर पर दीपक कुमार के संरक्षण में काम कर रहे थे।
कितने आईएएस अधिकारियों की जांच की मांग की गई?
सांसद ने आनंद किशोर समेत कुल नौ आईएएस अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच की मांग की।
क्या राज्य सरकार या संबंधित अधिकारियों ने इन आरोपों पर कोई जवाब दिया?
नहीं, इन आरोपों पर न तो संबंधित अधिकारियों की ओर से और न ही राज्य सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आई।
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