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बंगाल की खाड़ी तक पहुंचने की तैयारी में चीन, बांग्लादेश-म्यांमार कॉरिडोर से भारत की सीमा पर बढ़ सकता है खतराभारत
3 जुल॰ 2026, 6:55 am (28 दिन पहले)· 5

बंगाल की खाड़ी तक पहुंचने की तैयारी में चीन, बांग्लादेश-म्यांमार कॉरिडोर से भारत की सीमा पर बढ़ सकता है खतरा

CPEC के जरिए अरब सागर तक पहुंच बनाने के बाद चीन अब बांग्लादेश और म्यांमार के साथ नया आर्थिक कॉरिडोर बनाकर बंगाल की खाड़ी तक पहुंच बनाने की तैयारी में है, जिससे भारत की पूर्वी सीमा पर सामरिक चुनौती बढ़ सकती है।

चीन ने पाकिस्तान में चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) के जरिए अरब सागर तक अपनी पहुंच पहले ही बना ली है, और अब उसकी नजर बंगाल की खाड़ी पर टिक गई है। बीजिंग ने बांग्लादेश और म्यांमार के साथ मिलकर एक नया आर्थिक कॉरिडोर बनाने की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं। अगर यह योजना सिरे चढ़ती है, तो चीन को भारत की पूर्वी सीमा के बेहद नजदीक सड़क, रेल और समुद्री संपर्क का एक पूरा नेटवर्क मिल जाएगा, जिसे रणनीतिक लिहाज से बेहद संवेदनशील माना जा रहा है। जानकारों की मानें तो इस नेटवर्क के पूरा होते ही चीन जरूरत पड़ने पर सड़क मार्ग से भारत की पूरी पूर्वी सीमा तक अपने टैंक और सैनिक आसानी से पहुंचा सकेगा।

कुनमिंग से मोंगला पोर्ट तक जोड़ने की योजना

टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान की हाल की चीन यात्रा के दौरान इस प्रोजेक्ट पर गहराई से बातचीत हुई। योजना के मुताबिक चीन के कुनमिंग शहर को म्यांमार होते हुए बांग्लादेश के बड़े बंदरगाहों, खासकर मोंगला पोर्ट से जोड़ा जाएगा। इससे न सिर्फ माल ढुलाई आसान होगी, बल्कि बंगाल की खाड़ी तक चीन की रणनीतिक मौजूदगी भी काफी मजबूत हो जाएगी।

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ग्वादर वाला फॉर्मूला अब बंगाल की खाड़ी में?

यह नया कॉरिडोर काफी हद तक सीपीईसी की तर्ज पर ही तैयार किया जा सकता है। जिस तरह सीपीईसी ने पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह के रास्ते चीन को अरब सागर तक की पहुंच दी थी, ठीक उसी तर्ज पर यह नया कॉरिडोर चीन के लिए बंगाल की खाड़ी तक पहुंचने का नया दरवाजा खोल सकता है।

व्यापार की आड़ में सैन्य रणनीति का खतरा

रक्षा मामलों के जानकारों का कहना है कि किसी भी आधुनिक सड़क, रेल और बंदरगाह नेटवर्क का शांति के दौर में इस्तेमाल आमतौर पर व्यापार के लिए होता है, लेकिन जंग या किसी संकट की घड़ी में वही ढांचा सैन्य साजो-सामान, सैनिकों और भारी हथियारों को तेजी से एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने के काम भी आ सकता है। यही वजह है कि भारत के लिए चीन की यह परियोजना आने वाले समय में सिरदर्द बन सकती है।

1999 की पुरानी BCIM योजना अब नए कलेवर में

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ढाका में तैनात चीनी राजदूत याओ वेन ने साफ किया कि यह विचार बिल्कुल नया नहीं है। उन्होंने बताया कि साल 1999 में ही बांग्लादेश-चीन-भारत-म्यांमार यानी BCIM आर्थिक कॉरिडोर की परिकल्पना सामने आई थी, जिसका मकसद इन चारों देशों को सड़क, रेल, जलमार्ग और हवाई संपर्क के जरिए आपस में जोड़ना था। हालांकि उस समय यह योजना आगे नहीं बढ़ पाई थी।

याओ वेन ने यह भी कहा कि चीन और बांग्लादेश के बीच जो सहयोग अभी शुरू हो रहा है, वह अंतिम पड़ाव नहीं है। उनके मुताबिक अगर आगे चलकर दूसरे देश भी इस पहल का हिस्सा बनना चाहें, तो चीन उनका स्वागत करेगा। उन्होंने यह भी जोड़ा कि इसमें शामिल होना है या इंतजार करना है, यह पूरी तरह संबंधित देशों का अपना फैसला होगा। चीनी राजदूत ने यह भी बताया कि बीजिंग और ढाका के बीच सिर्फ आर्थिक सहयोग तक बात सीमित नहीं है, बल्कि विदेश नीति और रक्षा मुद्दों पर भी दोनों देशों के बीच '2+2 संवाद तंत्र' शुरू करने पर सहमति बन चुकी है। इसके जरिए दोनों पक्ष अपने रणनीतिक और सुरक्षा सहयोग को नई दिशा देना चाहते हैं।

शेख हसीना के तख्तापलट के बाद बदली तस्वीर

साल 2024 में बांग्लादेश में शेख हसीना के तख्तापलट के बाद से बीजिंग और ढाका के रिश्तों में तेजी से गर्मजोशी आई है। इस दौरान दोनों देशों के बीच कई ऐसे समझौते हुए हैं, जिन पर भारत बारीकी से नजर बनाए हुए है। इनमें तीस्ता नदी परियोजना, भारत की पूर्वी सीमा के पास लालमोनिरहाट एयरबेस के विकास में चीन का सहयोग, ढाका में ड्रोन निर्माण और टेक्नॉलजी ट्रांसफर यूनिट लगाने की योजना, साथ ही मोंगला पोर्ट के पास आर्थिक क्षेत्र विकसित करने का ठेका चीन को दिया जाना शामिल है। गौर करने वाली बात यह है कि मोंगला वाला यह प्रोजेक्ट पहले भारत के साथ मिलकर बनाने का प्रस्ताव था, लेकिन बाद में बांग्लादेश ने इसे रद्द करते हुए चीन को सौंप दिया।

भारत की पूर्वी सीमा के लिए नई चुनौती

अगर यह नया आर्थिक कॉरिडोर हकीकत में बदलता है, तो दक्षिण एशिया में चीन की रणनीतिक पकड़ पहले से कहीं ज्यादा मजबूत हो जाएगी। दूसरी तरफ भारत के लिए अपनी पूर्वी सीमाओं पर सुरक्षा के मोर्चे पर नई चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं, क्योंकि चीन को अब पाकिस्तान के अलावा बांग्लादेश और म्यांमार के रास्ते भी एक वैकल्पिक रणनीतिक कॉरिडोर मिल सकता है।

सवाल-जवाब

चीन बांग्लादेश और म्यांमार के साथ किस तरह का नया कॉरिडोर बना रहा है?
चीन अपने कुनमिंग शहर को म्यांमार के रास्ते बांग्लादेश के प्रमुख बंदरगाहों, खासकर मोंगला पोर्ट से जोड़ने के लिए नया आर्थिक कॉरिडोर बना रहा है।
यह प्रोजेक्ट किस दौरान चर्चा में आया?
बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान की हाल की चीन यात्रा के दौरान इस प्रोजेक्ट पर विस्तार से बातचीत हुई।
यह कॉरिडोर किस पुरानी योजना से जुड़ा है?
यह 1999 में प्रस्तावित बांग्लादेश-चीन-भारत-म्यांमार यानी BCIM आर्थिक कॉरिडोर योजना से जुड़ा है, जो उस समय आगे नहीं बढ़ पाई थी।
चीन और बांग्लादेश के बीच रक्षा सहयोग को लेकर क्या सहमति बनी है?
दोनों देशों ने विदेश नीति और रक्षा मामलों पर '2+2 संवाद तंत्र' शुरू करने पर सहमति जताई है।
भारत के लिए यह कॉरिडोर चिंता का विषय क्यों है?
रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक यही ढांचा शांति में व्यापार और संकट के समय सैन्य साजो-सामान व सैनिकों की तेज आवाजाही, दोनों के लिए इस्तेमाल हो सकता है, जिससे भारत की पूर्वी सीमा पर सामरिक खतरा बढ़ सकता है।
शेख हसीना के तख्तापलट के बाद बांग्लादेश-चीन संबंधों में क्या बदलाव आया?
2024 में तख्तापलट के बाद तीस्ता नदी परियोजना, लालमोनिरहाट एयरबेस के विकास में सहयोग और मोंगला पोर्ट के पास आर्थिक क्षेत्र जैसे कई समझौते चीन के पक्ष में हुए हैं।
मोंगला पोर्ट प्रोजेक्ट पहले किसके साथ प्रस्तावित था?
मोंगला पोर्ट के पास आर्थिक क्षेत्र का प्रोजेक्ट पहले भारत के साथ प्रस्तावित था, लेकिन बाद में बांग्लादेश ने इसे रद्द कर चीन को सौंप दिया।
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