उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में एक दिल दहला देने वाले मामले के आरोपी निलंबित पुलिस सिपाही को उस समय लोगों के भारी आक्रोश का सामना करना पड़ा, जब पुलिस टीम उसे चिकित्सीय परीक्षण के लिए अस्पताल लेकर पहुंची थी। कोतवाली थाना क्षेत्र के अंतर्गत जिला अस्पताल परिसर से लापता हुई मासूम बच्ची का अपहरण कर उसकी हत्या करने के मामले में गिरफ्तार निलंबित सिपाही अभिषेक यादव की मौजूदगी देखते ही वहां मौजूद लोगों का गुस्सा भड़क गया। भीड़ में शामिल दर्जनों लोगों ने पुलिस हिरासत में मौजूद आरोपी पर हमला कर दिया और उसके साथ जमकर मारपीट की। इस अचानक हुए हमले से अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी मच गई और वहां तैनात पुलिसकर्मियों को सुरक्षा घेरा बनाकर आरोपी को बचाने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी।
अस्पताल परिसर में हंगामे और मारपीट के बीच बचाकर निकाली पुलिस
चिकित्सीय जांच की प्रक्रिया के दौरान जिला अस्पताल पहुंचे लोगों ने जब आरोपी अभिषेक यादव को पहचाना तो वातावरण बेहद तनावपूर्ण हो गया। आक्रोशित भीड़ ने आरोपी को घेर लिया और जोरदार गाली-गलौज करते हुए उस पर थप्पड़ों व घूंसों की बौछार कर दी। स्थिति इतनी अनियंत्रित हो गई कि भीड़ आरोपी को अस्पताल की मुख्य इमारत से लेकर बाहर मुख्य द्वार तक लगातार पीटती रही। वहां मौजूद पुलिस टीम ने किसी तरह मानव श्रृंखला बनाकर आरोपी सिपाही को भीड़ के चंगुल से छुड़ाया और अत्यंत सुरक्षित तरीके से वाहन में बैठाकर मौके से बाहर निकाला।
सीसीटीवी फुटेज से खुला राज और बरामद हुआ बच्ची का शव
यह दर्दनाक घटना 28 जुलाई की रात की है, जब जिला अस्पताल परिसर से अचानक एक मासूम बच्ची संदिग्ध परिस्थितियों में गायब हो गई थी। घटना की जानकारी मिलते ही कोतवाली थाना पुलिस ने मामले की सघन जांच शुरू की और अस्पताल तथा आसपास के इलाकों में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। जांच के दौरान सीसीटीवी फुटेज में स्पष्ट दिखाई दिया कि निलंबित सिपाही अभिषेक यादव बच्ची को सुरक्षित घर पहुंचाने का झांसा देकर अपनी मोटरसाइकिल पर बैठाकर ले जा रहा था। इस ठोस साक्ष्य के आधार पर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए अभिषेक यादव को हिरासत में ले लिया। पुलिसिया पूछताछ के दौरान आरोपी ने बच्ची की हत्या करने की बात स्वीकार कर ली, जिसके बाद उसकी निशानदेही पर पुलिस ने मृत बच्ची का शव बरामद कर लिया।
दुष्कर्म की आशंका और आरोपी का पिछला आपराधिक रिकॉर्ड
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधिकारियों को आशंका है कि हत्या की वारदात को अंजाम देने से पहले मासूम के साथ दुष्कर्म भी किया गया हो सकता है। हालांकि, जांच अधिकारियों का कहना है कि इस गंभीर आशंका की आधिकारिक और विधिक पुष्टि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के पश्चात ही संभव हो सकेगी। जांच में यह चिंताजनक तथ्य भी उजागर हुआ है कि आरोपी सिपाही अभिषेक यादव का आचरण पहले से ही आपराधिक रहा है। वह पूर्व में भी दुष्कर्म के एक अन्य मामले में गिरफ्तार होकर जेल की हवा खा चुका है। जमालपुर से छूटने के बाद आरोपी वर्तमान में आपातकालीन सेवा डायल 112 में तैनात था।
फोरेंसिक सबूतों के आधार पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की तैयारी
पुलिस प्रशासन का कहना है कि आरोपी सिपाही से गहन पूछताछ लगातार जारी है और मामले के सभी संभावित पहलुओं की सूक्ष्मता से पड़ताल की जा रही है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि पोस्टमार्टम की अंतिम रिपोर्ट तथा फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला से मिलने वाले साक्ष्यों के आधार पर आरोपी के खिलाफ सख्त कानूनी धाराएं जोड़ी जाएंगी और अदालत में प्रभावी पैरवी की जाएगी ताकि पीड़ित परिवार को त्वरित न्याय मिल सके।



















