पश्चिम एशिया के समुद्री क्षेत्रों में वर्ष 2026 में भड़के ईरान और अमेरिका के सैन्य संघर्ष के दौरान 16 भारतीय नागरिकों की दुखद मौत हो गई, जबकि 75 अन्य नागरिक घायल हुए हैं। संसद में इस पूरे मामले पर जानकारी देते हुए विदेश मंत्रालय (MEA) ने प्रभावित परिवारों को दिए गए वित्तीय मुआवजे और राहत कार्यों का विस्तृत ब्योरा पेश किया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि जान गंवाने वाले नाविकों और आम नागरिकों के परिजनों को आर्थिक सहायता पहुंचाने के साथ-साथ घायलों के बेहतर इलाज के लिए हर संभव कदम उठाए गए हैं। इसके अलावा, कतर स्थित रास लफ्फान गैस प्लांट में हुए एक अलग तकनीकी हादसे में मारे गए 12 भारतीयों के परिवारों के लिए भी सहायता राशि मंजूर की गई है।
मुआवजा राशि और वित्तीय सहायता का ब्योरा
विदेश मंत्रालय द्वारा संसद में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, युद्धग्रस्त क्षेत्रों में अपनी जान गंवाने वाले भारतीय नाविकों के आश्रितों को कई योजनाओं के तहत वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है। डीजी शिपिंग वेलफेयर स्कीम के माध्यम से प्रभावित नाविकों के परिवारों को 10 लाख रुपये की अनुग्रह राशि दी जा रही है। इसके साथ ही, मैरिटाइम यूनियन ऑफ इंडिया के अंतर्गत मर्चेंट नेवी अधिकारियों के परिजनों को 12 लाख रुपये की आर्थिक मदद का प्रावधान है। वहीँ, नेशनल यूनियन ऑफ सीफेरर्स ऑफ इंडिया के तहत जहाज के क्रू सदस्यों के परिवारों को 10 लाख रुपये तक की अतिरिक्त सहायता दी जाती है।
जहाजों के P&I इंश्योरेंस के तहत मिलने वाले बीमा दावों की प्रक्रिया भी तेजी से चलाई जा रही है। विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की है कि कुल 16 मामलों में से 5 मामलों में मुआवजे का पूरा भुगतान पहले ही किया जा चुका है, जबकि बाकी मामलों में प्रक्रिया अंतिम चरण में है। दूसरी तरफ, कतर के रास लफ्फान गैस प्लांट में हुए तकनीकी हादसे में जान गंवाने वाले 12 भारतीय नागरिकों के परिजनों के लिए प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (PMNRF) से अनुग्रह राशि स्वीकृत की गई है। सरकार ने यह साफ कर दिया कि कतर का हादसा एक तकनीकी घटना थी और इसका पश्चिम एशिया के सैन्य संघर्ष से कोई सीधा संबंध नहीं था।
शवों की वापसी और घायलों का उपचार
त्रासदी के बाद सरकार ने सभी मृत भारतीयों के पार्थिव शरीर उनके गृह राज्य और परिजनों तक सुरक्षित पहुंचाने के लिए त्वरित कार्रवाई की है। विदेश मंत्रालय की देखरेख में सभी 16 मृतकों के शवों को उनके पैतृक स्थानों तक पहुंचाया गया है। इसके अलावा, संघर्ष के दौरान घायल हुए 75 भारतीय नागरिकों का स्थानीय अस्पतालों में समुचित इलाज कराया जा रहा है। भारतीय राजनयिक दल लगातार अस्पतालों और स्थानीय प्रशासन के संपर्क में रहकर घायलों के स्वास्थ्य पर नजर रख रहे हैं।
24x7 हेल्प डेस्क और भावी डिजिटल रिस्पॉन्स सिस्टम
संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में फंसे भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकालने के लिए पश्चिम एशिया में स्थित भारतीय दूतावासों ने व्यापक व्यवस्थाएं की हैं। दूतावासों में 24 घंटे चलने वाली हेल्पलाइन, विशेष कंट्रोल रूम और रैपिड रिस्पॉन्स सेल (RRC) का गठन किया गया। संकट में फंसे नागरिकों को तत्काल मदद पहुंचाते हुए ट्रांजिट वीजा, भोजन, रहने का स्थान और जरूरी यात्रा दस्तावेज उपलब्ध कराए गए, ताकि उन्हें सुरक्षित भारत वापस लाया जा सके।
भविष्य में ऐसी किसी भी वैश्विक आपात स्थिति या अंतरराष्ट्रीय संकट से निपटने के लिए सरकार एक अत्याधुनिक डिजिटल इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम तैयार कर रही है। इस तकनीक आधारित प्रणाली का मुख्य उद्देश्य आपातकालीन परिस्थितियों में विदेशों में मौजूद भारतीय नागरिकों की पहचान, सुरक्षा और निकासी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, त्वरित और प्रभावी बनाना है।



















