राजस्थान के दौसा जिले के एक सरकारी दफ्तर की चारदीवारी ने महज एक दिन के अंदर दो जिंदगियां निगल लीं — और पीछे छोड़ दिए ढेरों ऐसे सवाल, जिनके जवाब फिलहाल किसी के पास नहीं हैं। सिकराय के उपकोष कार्यालय (ट्रेजरी ऑफिस) में पहले जूनियर अकाउंटेंट शीतल मीणा की संदिग्ध हालात में मौत हुई, और उसके 24 घंटे के भीतर ही असिस्टेंट ट्रेजरी ऑफिसर (ATO) मनोज मीणा का शव फंदे से लटका मिला। दो मौतें, एक ही दफ्तर, और बीच में हत्या, प्रताड़ना तथा आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप — इसी ने इस घटनाक्रम को राजस्थान के सबसे चर्चित रहस्यमयी मामलों में से एक बना दिया है।
एक दफ्तर, दो मौतें और आपस में जुड़ते आरोप
मामला सीधा-सादा नहीं है, बल्कि आरोपों की एक उलझी हुई कड़ी है। शीतल मीणा के भाई ने मनोज मीणा पर हत्या और मानसिक प्रताड़ना का मुकदमा दर्ज कराया। दूसरी ओर, खुद मनोज ने अपने सुसाइड नोट में भुसावर के नायब तहसीलदार अरुण मीणा पर धमकाने का इल्जाम लगाया। यानी एक मौत ने दूसरे की ओर उंगली उठाई, और दूसरी मौत ने उसी उंगली को किसी तीसरे की तरफ मोड़ दिया। दफ्तर की इन दीवारों के भीतर आखिर ऐसा क्या पक रहा था, यही अब पुलिस की तफ्तीश का केंद्र बन गया है।
कैसे शुरू हुआ पूरा घटनाक्रम
सिलसिले की शुरुआत बुधवार को हुई। सिकराय ट्रेजरी ऑफिस में ड्यूटी के दौरान जूनियर अकाउंटेंट शीतल मीणा की तबीयत अचानक बेहद बिगड़ गई। साथी कर्मचारियों ने गंभीर हालत में उन्हें फौरन पास के उप जिला अस्पताल पहुंचाया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद हालत को देखते हुए जयपुर के सवाई मानसिंह (SMS) अस्पताल रेफर कर दिया गया। मगर इलाज के बीच बुधवार देर रात शीतल मीणा ने दम तोड़ दिया। शुरुआती तौर पर मौत की वजह जहरीले पदार्थ का सेवन मानी जा रही है।
इसके बाद शीतल के भाई मोहनलाल मीणा ने मानपुर थाने पहुंचकर रिपोर्ट दर्ज कराई। उनकी शिकायत में सीधा आरोप था कि उपकोष अधिकारी मनोज मीणा और दफ्तर के कुछ अन्य कर्मचारी शीतल को मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहे थे, और इन्हीं लोगों ने किसी पेय पदार्थ में जहर मिलाकर उसकी जान ली।
मनोज मीणा का सुसाइड नोट और नायब तहसीलदार पर इल्जाम
हत्या और प्रताड़ना का यह मुकदमा दर्ज होते ही उपकोष अधिकारी मनोज मीणा भारी मानसिक दबाव में आ गए। कुछ ही समय बाद जब उनका शव फंदे से झूलता मिला, तो मौके से पुलिस को एक सुसाइड नोट भी हाथ लगा। अपने पिता के नाम लिखे इस बेहद भावुक पत्र में मनोज ने खुद को पूरी तरह बेकसूर बताया और भुसावर के नायब तहसीलदार अरुण मीणा तथा सोनू मीणा पर गंभीर आरोप मढ़े। इनमें सोनू मीणा वही हैं जो कनिष्ठ लेखाकार शीतल मीणा के भाई बताए जा रहे हैं, जबकि अरुण मीणा उनके रिश्तेदार हैं।
मनोज के पिता ने पुलिस को बताया कि शीतल की मौत का केस दर्ज होने के बाद नायब तहसीलदार अरुण मीणा उनके घर तक आए थे। आरोप है कि बातचीत के दौरान उन्होंने मनोज को जेल भिजवाने और उसका पूरा करियर तबाह कर देने की सीधी धमकी दी, और इसी डर ने देर रात मनोज को आत्मघाती कदम उठाने पर मजबूर कर दिया।
अकेलेपन में टूटा अधिकारी, अकेले घर में ही दे दी जान
परिजनों के मुताबिक उस वक्त मनोज मीणा घर पर बिल्कुल अकेले थे — उनकी पत्नी किसी काम से अपने पीहर (मायके) गई हुई थीं। रात को पत्नी ने जब बार-बार फोन किया और कोई जवाब नहीं आया, तो घबराहट में उन्होंने पास ही रहने वाले एक परिचित (किराएदार) को घर का हाल देखने भेजा। वह परिचित जैसे ही मनोज के कमरे में पहुंचा, सामने का मंजर देखकर सन्न रह गया — मनोज फंदे से झूल रहे थे। पुलिस का कहना है कि सुसाइड नोट और परिजनों की शिकायत के आधार पर नायब तहसीलदार समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ जांच शुरू कर दी गई है। अधिकारियों के अनुसार शीतल मीणा की विसरा रिपोर्ट और मनोज मीणा के पोस्टमार्टम के बाद ही इस दोहरे मौत के मामले की असली तस्वीर साफ हो पाएगी।
अब जांच किन कड़ियों को जोड़ रही है
1. शीतल और मनोज के बीच आखिर कैसा रिश्ता था
पुलिस के सामने सबसे पहली और सबसे बड़ी गुत्थी यही है कि कनिष्ठ लेखाकार शीतल मीणा और उपकोष अधिकारी मनोज मीणा के बीच संबंध किस तरह के थे — महज कामकाजी (प्रोफेशनल) या फिर कोई निजी रंजिश भी पल रही थी? शीतल के भाई ने तो खुलकर मनोज पर मानसिक प्रताड़ना और पेय में जहर मिलाने का आरोप लगाया है। इसी सच तक पहुंचने के लिए पुलिस अब दफ्तर के कंप्यूटर, सरकारी फाइलों, दोनों की कॉल डिटेल्स (CDR) और व्हाट्सएप चैट तक को खंगाल रही है, ताकि पता चले कि कहीं किसी वित्तीय गड़बड़ी या किसी और वजह से दोनों के बीच तनाव तो नहीं चल रहा था।
2. विसरा रिपोर्ट और पोस्टमार्टम से खुलेगा राज
शीतल की मौत अस्पताल में इलाज के दौरान हुई और इसे शुरुआती तौर पर जहरीले पदार्थ का सेवन माना जा रहा है। ऐसे में पुलिस के लिए अगली अहम कड़ी शीतल मीणा की विसरा रिपोर्ट (Visceral Report) होगी, जिससे साफ होगा कि उनके शरीर में कौन-सा जहर या केमिकल गया और वह जबरन दिया गया था या उन्होंने खुद लिया। उधर, मनोज मीणा के शव का पोस्टमार्टम महवा अस्पताल में डॉक्टरों के मेडिकल बोर्ड ने किया, जिससे मौत का समय और शरीर पर किसी संघर्ष के निशान होने या न होने की बात तय होगी।
3. सुसाइड नोट की FSL जांच और हैंडराइटिंग का मिलान
मनोज के शव के पास मिला सुसाइड नोट इस केस का सबसे बड़ा कानूनी दस्तावेज बन चुका है। इसी में मनोज ने खुद को बेकसूर बताते हुए भुसावर के नायब तहसीलदार अरुण मीणा और शीतल के भाई सोनू पर जेल भिजवाने की धमकी देने का आरोप लगाया है। अब पुलिस इस नोट को विधि विज्ञान प्रयोगशाला (FSL) भेजेगी, जहां मनोज के पुराने हस्ताक्षरों और लिखावट से इसका मिलान कर इसकी प्रामाणिकता की 100% पुष्टि की जाएगी।
4. आरोपी अरुण मीणा और सोनू मीणा से कड़ी पूछताछ
मनोज के पिता के बयान और सुसाइड नोट के आधार पर पुलिस अब मामले के दूसरे पहलू, यानी 'आत्महत्या के लिए उकसाने' (Abetment to Suicide) की जांच में जुटेगी। सुसाइड नोट में नामजद भुसावर के नायब तहसीलदार अरुण मीणा और सोनू मीणा से कड़ी पूछताछ इसी दिशा में अहम कदम मानी जा रही है। दोनों मौतों की असली वजह और इनके आपसी तार जोड़ने का काम अब इन्हीं कड़ियों पर टिका है।













