पद्मश्री निशानेबाज जसपाल राणा की आखिरी ख्वाहिश: काशी के मणिकर्णिका घाट पर होगा अंतिम संस्कार, गार्ड ऑफ ऑनर के बाद दी जाएगी मुखाग्निखेल
5 घंटे पहले· 3

पद्मश्री निशानेबाज जसपाल राणा की आखिरी ख्वाहिश: काशी के मणिकर्णिका घाट पर होगा अंतिम संस्कार, गार्ड ऑफ ऑनर के बाद दी जाएगी मुखाग्नि

उत्तराखंड के दिग्गज शूटर और पद्मश्री जसपाल राणा का अंतिम संस्कार उनकी इच्छा के अनुसार वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर किया जाएगा। 49 वर्षीय राणा का शुक्रवार सुबह दिल्ली में निधन हो गया था।

देश के जाने-माने निशानेबाज और पद्मश्री जसपाल राणा को आज काशी की धरती पर अंतिम विदाई दी जाएगी। उत्तराखंड के इस गौरव का अंतिम संस्कार उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित मणिकर्णिका घाट पर होगा — और इसके पीछे की वजह खुद राणा की एक ख्वाहिश है, जिसे उन्होंने जीते-जी कई बार दोहराया था।

आखिरी इच्छा ही बनी अंतिम संस्कार की वजह

परिवार ने यह फैसला किसी परंपरा या संयोग से नहीं, बल्कि जसपाल राणा की निजी इच्छा का सम्मान करते हुए लिया है। उनके चाचा राजेंद्र राणा के मुताबिक, जसपाल ने अपने जीवनकाल में एक से ज्यादा बार यह कामना जताई थी कि उनका अंतिम संस्कार मणिकर्णिका घाट पर ही हो। यही कारण है कि स्वजनों ने देहरादून के बजाय वाराणसी में अंतिम क्रिया करने का निर्णय लिया।

देहरादून से बाबतपुर, फिर सीधे घाट तक

बताया जा रहा है कि उनका पार्थिव शरीर देहरादून से बाबतपुर एयरपोर्ट लाया जाएगा। वहां से सड़क मार्ग के जरिए उसे मणिकर्णिका घाट तक पहुंचाया जाएगा। घाट पर उन्हें पहले गार्ड ऑफ ऑनर दिया जाएगा और उसके बाद मुखाग्नि दी जाएगी।

49 की उम्र में थमी एक चैंपियन की सांसें

जसपाल राणा (49) ने शुक्रवार सुबह आखिरी सांस ली। वे बीते 11 दिनों से दिल्ली के मैक्स साकेत अस्पताल में भर्ती थे। तबीयत बिगड़ने की शुरुआत तब हुई जब वे जर्मनी से लौट रहे थे और उड़ान के दौरान ही उनकी हालत खराब हो गई थी।

गांव में उमड़ा शोक, पिता खुद को नहीं संभाल पाए

अंतिम संस्कार से एक दिन पहले, शुक्रवार शाम करीब 7:45 बजे उनका पार्थिव शरीर दिल्ली से देहरादून के पोंदा क्षेत्र स्थित मझोन गांव पहुंचा। देर रात तक वहां अंतिम दर्शन के लिए खिलाड़ियों, राजनेताओं और शुभचिंतकों का तांता लगा रहा।

सबसे मार्मिक दृश्य तब रहा जब बेटे का चेहरा आखिरी बार देखकर पिता नारायण सिंह राणा खुद को संभाल नहीं सके। उनकी आंखों से लगातार आंसू बहते रहे और वे सिसकते हुए अपने पैरों पर भी ठीक से खड़े नहीं हो पा रहे थे। परिवार के दूसरे सदस्य, रिश्तेदार, मित्र और गांववाले भी फफक-फफक कर रो पड़े। जिस गांव ने अपने बेटे को विश्व पटल पर भारत का गौरव बनते देखा था, आज उसी की हर आंख नम थी।

मुख्यमंत्री धामी समेत कई हस्तियों ने दी श्रद्धांजलि

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी उनके घर पहुंचे और स्वजनों से मिलकर शोक संवेदना जताई। उन्होंने जसपाल राणा के निधन को देश और उत्तराखंड के लिए अपूरणीय क्षति करार दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि राणा की उपलब्धियां और उनका जज्बा हमेशा युवाओं को प्रेरित करता रहेगा।

इसके अलावा विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी, कैबिनेट मंत्री खजान दास और विधायक सहदेव सिंह पुंडीर समेत कई जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी और खेल जगत की नामी हस्तियां श्रद्धांजलि देने पहुंचीं।

कोच को अंतिम विदाई देने पहुंचीं मनु भाकर

ओलिंपिक पदक विजेता मनु भाकर शुक्रवार को ही अपने कोच को अंतिम विदाई देने देहरादून पहुंच गई थीं। कोच का पार्थिव शरीर देखकर वे खुद को रोक नहीं पाईं और जसपाल राणा के पिता नारायण सिंह राणा से लिपटकर रो पड़ीं।

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