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दिल्ली में मशहूर संगीतकार रवि डे का निधन, पांच दिनों तक कमरे में सड़ता रहा शवभारत
18 अग॰ 2026, 9:21 pm (27 दिन पहले)· 4

दिल्ली में मशहूर संगीतकार रवि डे का निधन, पांच दिनों तक कमरे में सड़ता रहा शव

दिल्ली के गोविंदपुरी एक्सटेंशन में मशहूर संगीतकार रवि डे का शव उनके किराए के मकान से पांच दिन बाद बरामद हुआ। बदबू आने पर पड़ोसियों ने पुलिस को सूचना दी थी।

दिल्ली के कालकाजी थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले गोविंदपुरी एक्सटेंशन इलाके से एक बेहद दुखद और हैरान कर देने वाली खबर सामने आई है। यहां मशहूर संगीतकार रवि डे अपने किराए के मकान में मृत पाए गए। उनका शव करीब पांच दिनों तक उसी कमरे में बंद रहा और किसी को भनक तक नहीं लगी। जब मकान के भीतर से अत्यधिक बदबू फैलने लगी, तब जाकर आसपास के रहवासियों को अनहोनी की आशंका हुई और उन्होंने तुरंत पुलिस को इस बात की जानकारी दी। सूचना मिलते ही पुलिस बल मौके पर पहुंचा और मुख्य दरवाजे का ताला तोड़कर अंदर दाखिल हुआ, जहां से शव को बाहर निकाला गया।

संगीतकार रवि डे इस किराए के आवास में अकेले जीवन गुजार रहे थे। उनके निधन के बाद कई दिनों तक किसी भी सगे-संबंधी या परिजन ने उनकी सुध नहीं ली। अधिक समय बीत जाने के कारण शव अंदर ही डीकंपोज होने लगा था और उसमें कीड़े भी पड़ चुके थे। पड़ोसियों की शिकायत पर 14 अगस्त को पुलिस टीम घटनास्थल पर पहुंची थी और ताला तोड़कर अंदर गई थी। पुलिस ने फौरन शव को अपने कब्जे में लिया और उसे मोर्चरी भिजवा दिया। कानूनी औपचारिकताओं और आवश्यक जांच-पड़ताल के बाद 16 अगस्त को शव का पोस्टमार्टम संपन्न कराया गया।

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पोस्टमार्टम के बाद बेटों को सौंपा गया पार्थिव शरीर

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, जब पुलिस ने बेटों से संपर्क किया तो उन्होंने अपने पिता से किसी भी प्रकार का संबंध न होने की बात कही और शुरुआती दौर में शव को अपने कब्जे में लेने से भी इनकार कर दिया। हालांकि, स्थानीय पुलिस अधिकारियों द्वारा समझाइश दिए जाने के बाद परिवार के लोग आगे आए और औपचारिकताएं पूरी कीं। पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद पार्थिव शरीर उनके बेटों के सुपुर्द कर दिया गया। पुलिस इस पूरे मामले की गहनता से छानबीन कर रही है। शुरुआती तफ्तीश में इसे एक स्वाभाविक मौत का मामला माना जा रहा है, लेकिन मौत के वास्तविक कारणों का खुलासा विसरा और पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगा।

इसी तरह की एक अन्य दिल दहलाने वाली घटना हरियाणा के सोनीपत से भी सामने आ चुकी है। वहां एक आश्रम में रह रहे एक बुजुर्ग की मृत्यु के बाद उनकी तीनों बेटियों में से कोई भी उनके अंतिम संस्कार में शामिल होने नहीं आई थी। बाद में एक बेटी का वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुआ था जिसमें वह वीडियो कॉल के जरिए अपने पिता का अंतिम संस्कार देखती हुई नजर आई थी, जिससे यह मामला देश भर में चर्चा का विषय बन गया था।

सवाल-जवाब

रवि डे का शव कहां से बरामद हुआ?
रवि डे का शव दिल्ली के कालकाजी थाना क्षेत्र के गोविंदपुरी एक्सटेंशन स्थित उनके किराए के मकान से बरामद हुआ।
घटना का खुलासा कैसे हुआ?
घर के भीतर से तेज बदबू आने पर पड़ोसियों ने पुलिस को सूचना दी, जिसके बाद पुलिस ने ताला तोड़कर शव को बाहर निकाला।
शव कितने दिनों तक घर के अंदर पड़ा रहा?
पुलिस और स्थानीय जानकारी के अनुसार रवि डे का शव करीब पांच दिनों तक घर के अंदर पड़ा रहा।
शव का पोस्टमार्टम कब कराया गया?
आवश्यक जांच और कानूनी प्रक्रिया के बाद 16 अगस्त को शव का पोस्टमार्टम कराया गया।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Sandeep Yadav@sandeep-yadav·26 दिन पहले

यह घटना कला जगत के लिए एक बड़ी क्षति के साथ-साथ आधुनिक समाज के एकाकीपन और पारिवारिक दूरियों की एक बेहद विचलित करने वाली तस्वीर पेश करती है। संगीतकार रवि डे का अपने ही घर में इस तरह लावारिस हालत में मिलना और बेटों द्वारा शुरुआती दौर में शव लेने से इनकार करना इस बात का गंभीर संकेत है कि आज के दौर में व्यक्तिगत और पारिवारिक रिश्ते किस हद तक संवेदनहीन हो चुके हैं। पुलिस की जांच विसरा और पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर टिकी है, जिससे मौत के असली कारणों का पता चलेगा, लेकिन यह मामला हमारी सामाजिक ताने-बाने पर एक गहरा प्रश्नचिह्न जरूर छोड़ गया है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·27 दिन पहले

यह घटना हमारे महानगरों में तेजी से टूटते सामाजिक ताने-बाने और बढ़ती संवेदनहीनता का एक गंभीर प्रशासनिक एवं सामाजिक संकेत है। अकेलेपन की महामारी सिर्फ एक व्यक्तिगत त्रासदी नहीं, बल्कि नीतिगत स्तर पर शहरी बुजुर्गों की सुरक्षा, मानसिक स्वास्थ्य और सामुदायिक जुड़ाव के लिए मजबूत तंत्र विकसित करने की तत्काल मांग करती है।

Ananya Iyer@ananya-iyer·27 दिन पहले

यह घटना न केवल महानगरों के एकांत जीवन की क्रूर सच्चाई को दर्शाती है, बल्कि कला और संगीत जगत से जुड़े उन कलाकारों की उपेक्षा को भी उजागर करती है जो अपने आखिरी दिनों में गुमनामी और वित्तीय संकट के साये में जीने को मजबूर होते हैं। जब एक स्थापित संगीतकार का शव इस तरह लावारिस मिले, तो यह हमारी सांस्कृतिक प्राथमिकताओं और बुजुर्ग कलाकारों की सुरक्षा पर एक बड़ा सवालिया निशान लगाता है। इस तरह के मामलों से यह साफ है कि हमें शहरी आबादी के साथ-साथ अकेले रहने वाले वरिष्ठ नागरिकों के लिए एक मजबूत सामाजिक सुरक्षा और सहायता प्रणाली की सख्त जरूरत है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·27 दिन पहले

एक जाने-माने कलाकार का इस तरह अकेले दम तोड़ना और पांच दिन तक शव का लावारिस पड़े रहना हमारे महानगरीय समाज की गहरी संवेदनहीनता को उजागर करता है। पुलिस अब विसरा और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रही है ताकि मौत के पुख्ता कारणों का पता चल सके, लेकिन बेटों का शुरुआती रुख परिवार और समाज के बीच बढ़ती दूरियों का एक चिंताजनक पहलू है।

Rohan Verma@rohan-verma·27 दिन पहले

यह दुखद घटना केवल एक कलाकार की अकेली मौत नहीं है, बल्कि शहरी अकेलापन और टूटते पारिवारिक ताने-बाने का गंभीर संकेत है। महानगरों में बुजुर्गों और अकेले रहने वाले लोगों की सुरक्षा और सामाजिक जुड़ाव पर नीतिगत स्तर पर विचार करने की जरूरत है, ताकि भविष्य में इस तरह की अमानवीय स्थितियों से बचा जा सके।

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