मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने रविवार को विपक्षी गठबंधन के नेताओं के साथ बैठक करने का अनुरोध ठुकरा दिया। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी की ओर से इस मुलाकात का समय मांगा गया था, जिसे सर्वोच्च न्यायालय के कार्यालय द्वारा औपचारिक रूप से अस्वीकार कर दिया गया। इस बीच, राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में स्थिति धीरे-धीरे सामान्य होने की कोशिश कर रही है, लेकिन भारी सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस की सख्ती के बीच तनाव अब भी बरकरार है।
कनॉट प्लेस में सामान्य होती स्थिति और सुरक्षा का कड़ा पहरा
सप्ताहांत के दूसरे दिन रविवार को कनॉट प्लेस के बाजारों में एक बार फिर ग्राहकों और खरीदारों की हलचल देखने को मिली। हालांकि यह वापसी काफी सतर्क और दबी-कुचली थी क्योंकि कई दुकानें और रेस्तरां अब भी बंद थे। मेट्रो सेवाएं बहाल कर दी गई हैं, लेकिन आंतरिक और बाहरी वृत्तों में पुलिस बल की तैनाती, जगह-जगह लगाए गए बैरिकेड्स और पुलिस की गाड़ियां इस बात की गवाही दे रही थीं कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ हो रहे प्रदर्शन अभी थमे नहीं हैं।
सर्वोच्च न्यायालय तक मार्च निकालने का ऐलान
राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने रविवार को दिल्ली चलो का नारा दिया और लोगों से अपील की कि वे सोमवार को सर्वोच्च न्यायालय तक निकाले जाने वाले मार्च में शामिल हों। इस मार्च का उद्देश्य मुख्य न्यायाधीश को ज्ञापन सौंपकर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस की ज्यादती और कथित चुनावी अनियमितताओं के खिलाफ आवाज उठाना है। राहुल गांधी ने भी सोशल मीडिया पर घोषणा की है कि विपक्षी दल, युवा और नागरिक समाज के लोग मिलकर सर्वोच्च न्यायालय तक शांतिपूर्ण मार्च करेंगे।
कॉकट्रेच जनता पार्टी के नेताओं की प्रेस कॉन्फ्रेंस और आरोप
कॉकट्रेच जनता पार्टी के संस्थापकों और नेताओं ने पुलिस कार्रवाई और अपनी हिरासत को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। संगठन के सह-संयोजक सौरभ दास और आशुतोष रांका ने आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस ने उन्हें विमान के अंदर से जबरन हिरासत में लिया और उनके साथ अमानवीय व्यवहार किया। नेताओं ने यह भी कहा कि उन्हें उनके वकीलों से मिलने नहीं दिया गया और उनके फोन बिना जब्ती मेमो के जब्त कर लिए गए। संगठन का कहना है कि वे संसद स्ट्रीट पुलिस स्टेशन जाकर जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने की अनुमति के लिए पुलिस से औपचारिक तारीख मांगेंगे।
विपक्षी दलों और नेताओं की तीखी प्रतिक्रियाएं
तृणमूल कांग्रेस के नेता डेरेक ओब्रायन ने दिल्ली में हो रहे पुलिस एक्शन को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के लिए खतरनाक संकेत बताया है। माकपा के वरिष्ठ नेता और केरल के पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने इसे क्रूर राज्य आतंकवाद करार दिया। वहीं, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने गिरफ्तार किए गए सभी छात्रों और युवाओं को तुरंत रिहा करने की मांग की है। दूसरी ओर, केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने इन प्रदर्शनों को देश में अराजकता फैलाने का प्रयास बताया और सरकार के कदमों का समर्थन किया।
कोलकाता और मुंबई में भी विरोध प्रदर्शनों की गूंज
दिल्ली के अलावा देश के अन्य हिस्सों में भी विरोध प्रदर्शन देखने को मिले हैं। कोलकाता में एसएफआई, एआईएसएफ, एईएसए और एआईडीएसओ जैसे वामपंथी छात्र संगठनों से जुड़े तीन हजार से अधिक छात्रों ने रैली निकालकर मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग की। मुंबई के शिवाजी पार्क और दादर क्षेत्र में भी शिवसेना (यूबीटी) नेता आदित्य ठाकरे, मनसे नेता अमित ठाकरे और कार्यकर्ता अंजलि दमानिया के नेतृत्व में भारी विरोध प्रदर्शन हुए, जहां पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया।


















