इंजीनियरिंग और सॉफ्टवेयर विकास के क्षेत्र में कदम रखने वाले ज्यादातर युवाओं की दिली ख्वाहिश दुनिया की दिग्गज टेक कंपनियों में अपनी जगह बनाने की होती है। तकनीक की दुनिया में करियर तलाश रहे छात्रों के बीच अक्सर यह आम धारणा देखने को मिलती है कि गूगल जैसी बहुराष्ट्रीय कंपनी में प्रवेश पाने के लिए केवल प्रमुख आईआईटी या आईआईएम जैसे संस्थानों का ठप्पा होना ही अनिवार्य है। हालांकि, तकनीकी उद्योग का मौजूदा परिदृश्य यह स्पष्ट करता है कि किसी बड़े ब्रांड वाले संस्थान की डिग्री से कहीं अधिक अहमियत व्यावहारिक कौशल, वास्तविक समस्याओं के समाधान की क्षमता और लगातार सीखने की ललक की होती है। कॉलेज जीवन के दौरान विभिन्न प्रोजेक्ट्स का निर्माण, कोडिंग प्रतियोगिताओं में भागीदारी और खुद को आधुनिक तकनीकों के अनुकूल ढालना किसी भी छात्र को वैश्विक स्तर का सॉफ्टवेयर प्रोफेशनल बना सकता है। ट्रिपलआईटी जबलपुर से पढ़ाई पूरी करके गूगल में सॉफ्टवेयर इंजीनियर का पद संभालने वाली समृद्धि शर्मा का करियर सफर इसी सोच की जीवंत मिसाल पेश करता है।
बिना तयशुदा योजना के निरंतर सीखने का नजरिया
समृद्धि शर्मा ने ट्रिपलआईटी जबलपुर से इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग शाखा में बीटेक की डिग्री पूरी की। गैर-कंप्यूटर साइंस बैकग्राउंड से ताल्लुक रखने के बावजूद सॉफ्टवेयर के प्रति उनके स्वाभाविक रुझान और दृढ़ संकल्प ने उन्हें राह की हर चुनौती से पार पाने में मदद की। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत किसी बेहद जटिल या सालों पहले तैयार किए गए पूर्व-नियोजित फॉर्मूले के तहत नहीं की थी। इसके उलट, उनका पूरा ध्यान अपने वर्तमान काम पर शत-प्रतिशत समर्पण देने, सही समय पर सटीक फैसले लेने और नई तकनीकों की बुनियादी समझ को पुख्ता करने पर केंद्रित रहा। कॉलेज के शुरुआती वर्षों से ही उनका झुकाव कठिन तकनीकी उलझनों को सुलझाने और नए सॉफ्टवेयर टूल्स को आजमाने में था। इसी निरंतर अभ्यास के बल पर उन्होंने साल 2024 में गूगल के प्रतिष्ठित स्टेप यानी स्टूडेंट ट्रेनिंग इन इंजीनियरिंग प्रोग्राम के तहत अपनी पहली इंटर्नशिप हासिल की थी।
प्रोजेक्ट्स के अनुभव से फुल टाइम भूमिका तक का सफर
स्टेप इंटर्नशिप के सफल समापन के बाद समृद्धि ने अपने तकनीकी दायरे को और विस्तार दिया। साल 2025 में उन्होंने एक बार फिर गूगल में सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग की दूसरी इंटर्नशिप सफलतापूर्वक पूरी की। इस अहम इंटर्नशिप अवधि के दौरान उन्हें जटिल तकनीकी ढांचे, ऑटोमेटेड डेटा पाइपलाइंस और रियल-टाइम डैशबोर्ड जैसे वास्तविक प्रोजेक्ट्स पर काम करने का अवसर मिला। इन जिम्मेदारियों ने न सिर्फ उनके सिस्टम डिजाइन और कोडिंग कौशल को नई मजबूती दी, बल्कि कॉर्पोरेट कार्यप्रणाली की वास्तविक आवश्यकताओं से भी उन्हें गहराई से परिचित कराया। इसके उपरांत उन्होंने कुछ समय फिनटेक सेक्टर में काम करते हुए वित्तीय तकनीक की बारीकियों को समझा। विभिन्न क्षेत्रों के इस समृद्ध अनुभव के बाद आखिरकार वे फुल-टाइम सॉफ्टवेयर इंजीनियर के तौर पर गूगल से जुड़ गईं।
कैंपस कम्युनिटी और कोडिंग क्लब में निभाई अहम भूमिका
तकनीकी ज्ञान के साथ-साथ संवाद और टीमवर्क की क्षमता भी किसी सॉफ्टवेयर इंजीनियर की सफलता में निर्णायक साबित होती है। समृद्धि शर्मा ट्रिपलआईटी जबलपुर के प्रोग्रामिंग क्लब बिटबाइट की कोर टीम का एक सक्रिय और महत्वपूर्ण हिस्सा थीं। कैंपस में रहते हुए उन्होंने कई प्रतिस्पर्धी कोडिंग प्रतियोगिताओं के संचालन में प्रमुख भूमिका निभाई। इसके साथ ही उन्होंने अपने से जूनियर बैच के छात्रों के लिए कई उपयोगी कार्यशालाएं आयोजित कीं और संस्थान के भीतर डेवलपर कम्युनिटी के विकास में बड़ा योगदान दिया। एक टीम के भीतर नेतृत्व करने और साथियों के साथ मिलकर काम करने के इस अनुभव ने उन्हें कॉर्पोरेट माहौल की बड़ी जिम्मेदारियों के लिए पूरी तरह मानसिक रूप से तैयार किया। उनका मानना है कि जब कोई व्यक्ति दूसरों को सिखाता है और टीम के साझा विकास पर जोर देता है, तो उसकी अपनी तकनीकी समझ भी पहले से कहीं अधिक मजबूत और स्पष्ट हो जाती है।
हैकथॉन्स और फेलोशिप्स के जरिए मिली राष्ट्रीय स्तर पर पहचान
समृद्धि की तकनीकी क्षमताओं ने उन्हें राष्ट्रीय पटल पर भी खास पहचान दिलाई। उन्होंने जाने-माने हैकथॉन हैकसीबीएस 7.0 में पहला स्थान प्राप्त करते हुए शानदार जीत हासिल की थी। इस हैकथॉन के दौरान उन्होंने एक स्केलेबल पीयर-टू-पीयर रिसोर्स-शेयरिंग प्लेटफॉर्म डिजाइन और डेवलप किया था। इसके अलावा वे गूगल गर्ल हैकाथॉन की फाइनलिस्ट सूची में शामिल रहीं और उन्हें गूगल विमेन टेकमेकर्स इंजीनियरिंग फेलोशिप यानी डब्ल्यूटीईएफ की कॉलर बनने का गौरव भी हासिल हुआ। प्रोग्रामिंग के स्तर पर जावा, पाइथन, सी, रिएक्ट और एमआईआरएन स्टैक जैसी आधुनिक वेब तकनीकों पर उनकी मजबूत पकड़ ने उन्हें उद्योग की आम भीड़ से अलग मुकाम दिलाया।
दीर्घकालिक योजना के दबाव से बचने की व्यावहारिक सलाह
अक्सर इंजीनियरिंग और टेक क्षेत्र में पढ़ाई कर रहे युवा इस बात को लेकर मानसिक तनाव में आ जाते हैं कि अगले 5 या 10 वर्षों में उनका करियर किस मुकाम पर होगा। समृद्धि शर्मा इस सोच को पूरी तरह से अव्यावहारिक मानती हैं और एक बिल्कुल अलग दृष्टिकोण रखने की सलाह देती हैं। उनका स्पष्ट मानना है कि किसी भी छात्र को अपने पूरे करियर का कठोर ब्लूप्रिंट पहले से तैयार करने के फेर में नहीं पड़ना चाहिए। उनके अनुसार जिंदगी और करियर में एक समय पर सिर्फ एक कदम आगे बढ़ाना चाहिए। छात्र वर्तमान में जिस भी प्रोजेक्ट या पढ़ाई में लगे हैं, वहां अपनी पूरी ऊर्जा लगाएं और यह भरोसा रखें कि वर्तमान के अनुभव ही भविष्य की सही दिशा तय करेंगे। असफलता से डरने के बजाय हर अनुभव से नई सीख लेना ही किसी सफल प्रोफेशनल की सबसे बड़ी पूंजी होती है।



















