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शिमला टॉय ट्रेन ट्रैक पर कुदरत का कहर, हवा में झूला ऐतिहासिक रेल मार्ग और भारी बारिश से जनजीवन ठपहिमाचल प्रदेश
30 अग॰ 2026, 8:56 pm (2 घंटे पहले)· 2

शिमला टॉय ट्रेन ट्रैक पर कुदरत का कहर, हवा में झूला ऐतिहासिक रेल मार्ग और भारी बारिश से जनजीवन ठप

हिमाचल प्रदेश में मूसलाधार बारिश के चलते यूनेस्को विश्व धरोहर कालका-शिमला रेल रूट का एक हिस्सा हवा में लटक गया है। सुरक्षा के मद्देनजर रेलवे ने इस मार्ग की दस ट्रेनों को रद्द कर दिया है, जबकि पूरे राज्य में दर्जनों सड़कें और बिजली ट्रांसफॉर्मर भी प्रभावित हुए हैं।

हिमाचल प्रदेश में इन दिनों कुदरत का भयंकर रूप देखने को मिल रहा है, जिसकी चपेट में अब यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल कालका-शिमला टॉय ट्रेन मार्ग भी आ गया है। सोलन जिले के भीतर लगातार बरस रहे बादलों और भारी बारिश के कारण रेलवे ट्रैक के ठीक नीचे मौजूद मिट्टी पूरी तरह बह गई। इस वजह से पटरियां किसी सहारे के बिना हवा में झूलती हुई नजर आ रही हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए रेलवे प्रशासन ने इस व्यस्त रूट पर रविवार के दिन आवाजाही करने वाली दस टॉय ट्रेनों को पूरी तरह से रद्द करने का फैसला लिया, जिससे इस सुहावने वीकेंड पर हिमाचल की वादियों में घूमने पहुंचे पर्यटकों को भारी मायूसियों का सामना करना पड़ा।

कोटि और गुम्मन के बीच बिगड़े हालात

रेलवे के जिम्मेदार अधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक, कोटि और गुम्मन स्टेशनों के दरमियान स्थित ब्रिज नंबर 57 के आसपास यह गंभीर स्थिति पैदा हुई है। लगातार हो रही मूसलाधार बारिश की वजह से ट्रैक के नीचे की जमीन का कटाव हो गया और मिट्टी पूरी तरह खिसक गई, जिसके परिणामस्वरूप भारी-भरकम पटरियां हवा में लटकने लगीं। किसी भी बड़े हादसे को टालने और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के मकसद से रेलवे विभाग ने शनिवार की रात को ही इस संवेदनशील हिस्से पर ट्रेनों की आवाजाही एहतियातन रोक दी थी।

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अधिकारियों की ओर से दी गई जानकारी और रूट का इतिहास

शिमला रेलवे स्टेशन के अधीक्षक संजय गेवर ने इस पूरे घटनाक्रम पर बात करते हुए बताया कि कालका और शिमला के बीच आवागमन करने वाली कुल 10 ट्रेनों को फिलहाल बंद कर दिया गया है। जब तक इस ट्रैक की पूरी तरह से मरम्मत का काम पूरा नहीं हो जाता और सुरक्षा से जुड़े सभी पहलुओं की गहन जांच नहीं हो जाती, तब तक रेल सेवाओं को दोबारा शुरू नहीं किया जाएगा। बता दें कि यह ऐतिहासिक रेल मार्ग करीब 96 किलोमीटर लंबा है, जिस पर कुल 102 सुरंगे और लगभग 800 छोटे-बड़े पुल बने हुए हैं। हालांकि, इस मानसून सीजन में बार-बार होने वाले भूस्खलन और भारी बारिश के कारण इस धरोहर मार्ग की रफ्तार बार-बार थम जाती है।

पूरे प्रदेश में बारिश से अस्त-व्यस्त हुआ जनजीवन

कालका-शिमला रेलवे ट्रैक के अलावा हिमाचल प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी मौसम का मिजाज काफी खराब बना हुआ है, जिससे आम जनता का जीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र की रिपोर्ट के अनुसार, रविवार की सुबह तक लगातार हो रही बारिश और भयंकर भूस्खलन के कारण पूरे प्रदेश भर में यातायात के लिए कुल 64 सड़कें पूरी तरह से बंद कर दी गई हैं। इन बंद मार्गों के कारण स्थानीय लोगों के साथ-साथ पर्यटकों को भी भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

विभिन्न जिलों में सड़कों और बुनियादी ढांचे को नुकसान

प्रशासनिक आंकड़ों के मुताबिक, मंडी जिले में सबसे ज्यादा 24 सड़कें बंद पड़ी हैं, जबकि कुल्लू में 16, कांगड़ा में 7 और सिरमौर जिले में भी 7 सड़कें यातायात के लिए अवरुद्ध हैं। इसके अलावा ऊना में 4, शिमला में 3, चंबा में 2 और लाहुल-स्पीति जिले में 1 सड़क पर आवागमन पूरी तरह से ठप हो चुका है। सड़कों के अलावा बिजली और पानी की व्यवस्था भी चरमरा गई है, जिसके चलते पूरे राज्य में कुल 225 बिजली के ट्रांसफॉर्मर खराब हो गए हैं और 9 जलापूर्ति योजनाएं भी बुरी तरह से प्रभावित हुई हैं, जिससे लोगों को पानी के संकट से भी जूझना पड़ रहा है।

मौसम विभाग का अलर्ट और अब तक का कुल नुकसान

स्थानीय मौसम विज्ञान केंद्र ने आने वाले दिनों के लिए राज्य के कई इलाकों में भारी बारिश का नया अलर्ट जारी किया है, जो 31 अगस्त से लेकर 3 सितंबर तक प्रभावी रहेगा। पिछले चौबीस घंटों के दौरान प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में अच्छी खासी मानसूनी बारिश दर्ज की गई है, जिसमें धौलाकुआं में 38.5 मिलीमीटर, घघास में 30 मिलीमीटर और पालमपुर में 23.8 मिलीमीटर बारिश शामिल है। गौरतलब है कि इस साल मानसून की शुरुआत यानी 30 जून से लेकर अब तक हिमाचल प्रदेश में बारिश और उससे जुड़ी तमाम आपदाओं के कारण कुल 103 लोगों की जान जा चुकी है। इसके साथ ही इस प्राकृतिक आपदा के चलते राज्य के बुनियादी ढांचे को कुल 1,184 करोड़ रुपये का भारी-भरकम आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ा है।

सवाल-जवाब

कालका-शिमला टॉय ट्रेन रूट क्यों बंद किया गया है?
सोलन जिले में भारी बारिश के कारण रेलवे ट्रैक के नीचे की मिट्टी बह जाने से पटरियां हवा में लटक गई हैं, जिसके बाद सुरक्षा के लिए ट्रेनें रद्द की गई हैं।
कितनी टॉय ट्रेनों को रद्द किया गया है?
कालका और शिमला के बीच चलने वाली कुल 10 टॉय ट्रेनों को रेलवे प्रशासन ने पूरी तरह से रद्द कर दिया है।
यह घटना रेलवे ट्रैक के किस हिस्से पर हुई है?
यह घटना कोटि और गुम्मन स्टेशनों के बीच ब्रिज नंबर 57 के पास हुई है।
हिमाचल प्रदेश में कितनी सड़कें बंद हैं?
भारी भूस्खलन और बारिश के कारण प्रदेश भर में कुल 64 सड़कें यातायात के लिए बंद कर दी गई हैं।
इस मानसून सीजन में अब तक कितना नुकसान हुआ है?
30 जून से शुरू हुए मानसून के दौरान अब तक 103 लोगों की जान जा चुकी है और राज्य को कुल 1,184 करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान हुआ है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·57 मिनट पहले

यह खबर दर्शाती है कि पर्वतीय क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे और यूनेस्को धरोहर जैसी संपत्तियों की सुरक्षा के लिए भू-तकनीकी ऑडिट कितना आवश्यक है। भारी बारिश और मिट्टी के कटाव से केवल परिवहन ही नहीं, बल्कि पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी गंभीर असर पड़ता है, जिसके लिए दीर्घकालिक जल निकासी और ढलान सुदृढ़ीकरण की जरूरत है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·57 मिनट पहले

यह घटना महज एक प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि हमारी निवारक निगरानी प्रणालियों की सीमाओं को भी उजागर करती है। जब यूनेस्को धरोहर जैसी संपत्तियों की सुरक्षा का सवाल हो, तो केवल एहतियाती ट्रेन रद्दीकरण काफी नहीं है; बल्कि भू-अस्थिरता वाले संवेदनशील खंडों के लिए वास्तविक समय पर निगरानी तकनीक और सख्त कानूनी-प्रशासनिक जवाबदेही तय करने की आवश्यकता है ताकि सार्वजनिक सुरक्षा से खिलवाड़ न हो सके।

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