पश्चिम बंगाल में नगर निगमों में हुई कथित भर्ती धांधली की जांच एक बार फिर सत्तारूढ़ खेमे के एक बड़े नाम तक पहुंच गई है। शनिवार को प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीमें तृणमूल कांग्रेस के विधायक और राज्य के पूर्व मंत्री मदन मित्रा से जुड़े आठ अलग-अलग ठिकानों पर एक साथ पहुंचीं और तलाशी अभियान चलाया।
कहां-कहां पहुंची जांच टीम
सूत्रों के अनुसार यह कार्रवाई कोलकाता और उसके आसपास के इलाकों में फैले कुल आठ स्थानों पर की गई, जिनमें खुद विधायक का आवास भी शामिल है। ED के अधिकारी मित्रा के कोलकाता स्थित भवानीपुर के घर, नॉर्थ 24 परगना के कमरहाटी और साउथ 24 परगना के जोका में मौजूद ठिकानों पर पहुंचे। एजेंसी ने साफ किया है कि यह पूरा सर्च ऑपरेशन नगर निगम भर्ती भ्रष्टाचार मामले से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है।
आरोप क्या हैं
जांच से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि अब तक की पड़ताल में सामने आया है कि मदन मित्रा ने कथित तौर पर बिचौलियों के ज़रिए नकद और सोने के रूप में रिश्वत वसूली। यह लेन-देन कमरहाटी म्युनिसिपैलिटी समेत कई अलग-अलग म्युनिसिपैलिटी में विभिन्न पदों पर अयोग्य उम्मीदवारों को नौकरी दिलाने के बदले में हुआ बताया जा रहा है। दूसरे शब्दों में, आरोप यह है कि योग्यता के बजाय पैसे और सोने के दम पर सरकारी नौकरियां बांटी गईं।
125 से ज़्यादा नियुक्तियों पर नज़र
सूत्रों ने दावा किया है कि इस TMC नेता का नाम ऐसी 125 से ज़्यादा कथित गैर-कानूनी नियुक्तियों से जुड़ता दिख रहा है। यानी जांच का दायरा किसी एक-दो मामलों तक सीमित नहीं, बल्कि बड़ी संख्या में हुई भर्तियों तक फैला हुआ है। एजेंसी का कहना है कि यह जांच अभी थमी नहीं है और आगे की कड़ियों व जानकारियों की पड़ताल लगातार जारी है।













