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नौकरी का सपना दिखाकर 'गोल्डन ट्रायंगल' में फंसाया, 800 भारतीय युवाओं को साइबर बंधक बनाया गयाभारत
1 जुल॰ 2026, 7:51 pm (41 दिन पहले)· 2

नौकरी का सपना दिखाकर 'गोल्डन ट्रायंगल' में फंसाया, 800 भारतीय युवाओं को साइबर बंधक बनाया गया

सोशल मीडिया पर झूठे जॉब ऑफर के जरिए करीब 800 भारतीय नागरिकों को म्यांमार-थाईलैंड सीमा के 'गोल्डन ट्रायंगल' इलाके में फंसाकर जबरन साइबर ठगी कराई जा रही है। महाराष्ट्र के बीड जिले के एक 24 वर्षीय युवक की मदद की गुहार से यह नेटवर्क सामने आया और अब बीड पुलिस तथा विदेश मंत्रालय बचाव की कोशिशों में जुटे हैं।

सोशल मीडिया पर दिखे एक चमकदार जॉब ऑफर ने सैकड़ों भारतीय युवाओं की जिंदगी तबाह कर दी है। थाईलैंड के बैंकॉक में कंप्यूटर से जुड़ा काम और हर महीने करीब 70 हजार रुपये की सैलरी का वादा करने वाले झूठे विज्ञापनों के जरिए करीब 800 भारतीय नागरिकों को म्यांमार-थाईलैंड सीमा पर बदनाम 'गोल्डन ट्रायंगल' इलाके में फंसा लिया गया है। इन युवाओं को बंधक बनाकर जंगल के बीच बने कैंपों में रखा जा रहा है, जहां उनसे जबरन ऑनलाइन साइबर ठगी का काम करवाया जा रहा है।

बीड के एक युवक ने खोला पूरे नेटवर्क का राज

महाराष्ट्र के बीड जिले के एक 24 वर्षीय युवक के साथ जो हुआ, उसी से यह पूरा मामला सामने आया। इस युवक को सोशल मीडिया पर एक विज्ञापन दिखा जिसमें बैंकॉक में कंप्यूटर से संबंधित नौकरी का ऑफर था। तनख्वाह थी करीब 70 हजार रुपये प्रतिमाह। विज्ञापन में कहा गया कि काम आसान होगा और सभी सुविधाएं मिलेंगी। लालच में आकर युवक ने आवेदन कर दिया और 4 जून को पुणे से बैंकॉक के लिए रवाना हो गया।

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बैंकॉक पहुंचते ही तस्वीर पूरी तरह बदल गई। उसे वहां से म्यांमार की सीमा के पास एक सुनसान इलाके में ले जाया गया। पहुंचते ही उसका पासपोर्ट और सभी जरूरी दस्तावेज छीन लिए गए। उस वक्त उसे समझ आया कि वह किसी वैध नौकरी के लिए नहीं बल्कि एक खतरनाक अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध नेटवर्क के चंगुल में आ चुका है।

'गोल्डन ट्रायंगल' क्या है और क्यों है यह इतना खतरनाक?

'गोल्डन ट्रायंगल' दक्षिण-पूर्व एशिया का वह क्षेत्र है जहां म्यांमार, लाओस और थाईलैंड की सीमाएं आपस में मिलती हैं। यह इलाका बरसों से अवैध गतिविधियों और संगठित अपराध के लिए कुख्यात रहा है। पिछले कुछ सालों में यहां बड़े पैमाने पर ऑनलाइन ठगी करने वाले अंतरराष्ट्रीय गिरोहों ने पांव पसार लिए हैं। ये गिरोह दूसरे देशों के युवाओं को नौकरी का झांसा देकर अपने ठिकानों पर बुलाते हैं और फिर उन्हें साइबर धोखाधड़ी में झोंक देते हैं।

जंगल के कैंपों में 18-18 घंटे काम, मारपीट और मानसिक प्रताड़ना

पीड़ितों के बयानों से सामने आया कि उन्हें जंगलों के बीच बनाए गए कैंपों में रखा जाता है। हर दिन इन युवाओं से 18-18 घंटे तक ऑनलाइन काम करवाया जाता है। उनसे लोगों को फर्जी निवेश योजनाओं में फंसाने, ऑनलाइन दोस्ती का नाटक करके ठगने और तरह-तरह के डिजिटल फ्रॉड के जरिए पैसा ऐंठने का काम लिया जाता है।

जो युवा तय लक्ष्य पूरा नहीं कर पाते, उन्हें शारीरिक मारपीट और मानसिक उत्पीड़न झेलना पड़ता है। सभी के पासपोर्ट और मोबाइल फोन जब्त कर लिए जाते हैं। पीड़ितों का कहना है कि इन कैंपों से भाग निकलना लगभग असंभव है क्योंकि ये सीमावर्ती और दूरदराज के इलाकों में बने हैं।

जान जोखिम में डालकर पत्नी को किया फोन, फिर हुआ खुलासा

बीड के उसी युवक ने बेहद खतरनाक हालात के बावजूद किसी तरह अपनी पत्नी से फोन पर संपर्क किया और अपनी दर्दनाक स्थिति बताई। परिवार ने तुरंत पुलिस से शिकायत की। पूछताछ और जांच में सामने आया कि ऐसे फंसे हुए लोगों की संख्या सिर्फ एक नहीं है बल्कि पूरे भारत से बड़ी तादाद में लोग इस जाल में आ चुके हैं। अब इसे अंतरराष्ट्रीय मानव तस्करी और साइबर अपराध नेटवर्क से जुड़ा मामला माना जा रहा है।

महाराष्ट्र के करीब 25 युवा भी इस जाल में

जांच में यह भी सामने आया है कि महाराष्ट्र के करीब 25 युवाओं के भी इसी नेटवर्क में फंसे होने की आशंका है। बीड पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है और केंद्र सरकार के विदेश मंत्रालय को सूचित किया गया है। पुलिस का कहना है कि फंसे हुए सभी युवाओं की पहचान की जा रही है और उनकी सुरक्षित वापसी के लिए संबंधित एजेंसियों के साथ मिलकर काम किया जा रहा है।

इन गिरोहों का जाल कैसे काम करता है?

जांच एजेंसियों के अनुसार, ये गिरोह सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म को अपना मुख्य हथियार बनाते हैं। उनकी कार्यप्रणाली बेहद सुनियोजित और चरणबद्ध होती है:

  • पहले विदेश में मोटी सैलरी और आसान काम का लालच दिया जाता है।
  • वीजा, हवाई टिकट और रहने की पूरी व्यवस्था का भरोसा दिलाया जाता है ताकि युवा बिना हिचकिचाहट आगे बढ़ें।
  • दूसरे देश में पहुंचने के बाद युवाओं को सुनसान और सीमावर्ती इलाकों में ले जाकर उनके दस्तावेज छीन लिए जाते हैं।
  • इसके बाद उन्हें फर्जी कॉल, ऑनलाइन धोखाधड़ी और डिजिटल फ्रॉड के लिए मजबूर किया जाता है।

सवाल-जवाब

इस जाल में कुल कितने भारतीय फंसे हैं?
करीब 800 भारतीय नागरिक म्यांमार-थाईलैंड सीमा पर 'गोल्डन ट्रायंगल' इलाके में फंसे बताए जा रहे हैं।
'गोल्डन ट्रायंगल' कहां स्थित है?
यह दक्षिण-पूर्व एशिया का वह इलाका है जहां म्यांमार, लाओस और थाईलैंड की सीमाएं एक जगह मिलती हैं।
युवाओं को किस तरह के जॉब ऑफर का झांसा दिया गया था?
उन्हें बैंकॉक, थाईलैंड में कंप्यूटर से जुड़ी नौकरी और हर महीने करीब 70 हजार रुपये वेतन का वादा किया गया था।
बीड का युवक बैंकॉक कब पहुंचा था?
वह 4 जून को पुणे से उड़ान भरकर बैंकॉक पहुंचा था।
पीड़ितों से रोजाना कितने घंटे काम करवाया जाता था?
पीड़ितों से रोजाना 18-18 घंटे तक जबरन ऑनलाइन साइबर ठगी का काम करवाया जाता था।
यह पूरा मामला कैसे सामने आया?
बीड के 24 वर्षीय युवक ने जान जोखिम में डालकर किसी तरह अपनी पत्नी को फोन किया और उसके बाद परिवार ने पुलिस से संपर्क किया।
महाराष्ट्र के कितने युवा इस नेटवर्क में फंसे हैं?
महाराष्ट्र के करीब 25 युवाओं के इस नेटवर्क में फंसे होने की आशंका जताई जा रही है।
फंसे हुए युवाओं को बचाने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं?
बीड पुलिस ने जांच शुरू कर दी है और केंद्र सरकार के विदेश मंत्रालय से संपर्क किया गया है। संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय करके युवाओं की सुरक्षित वापसी की कोशिश की जा रही है।
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