देश की आर्थिक विकास दर में 7.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी केवल राष्ट्रीय सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका प्रत्यक्ष प्रभाव आम नागरिकों के दैनिक जीवन, यात्रा समय और जेब पर पड़ रहा है। बीते बारह वर्षों के दौरान एक्सप्रेसवे, राजमार्गों, रेलवे लाइनों, मेट्रो, हवाई अड्डों और बंदरगाहों के ढांचागत निर्माण ने एक ऐसी आर्थिक श्रृंखला बनाई है जिसने व्यापार और रोजगार के नए अवसर उत्पन्न किए हैं। जब बुनियादी ढांचे पर सरकारी निवेश बढ़ता है, तब निर्माण श्रमिकों और इंजीनियरों से लेकर स्थानीय दुकानदारों तक धन का प्रवाह होता है। सफर के समय में होने वाली बचत से ईंधन खर्च घटता है और काम-धंधे के लिए अतिरिक्त समय मिलता है, जिससे संपूर्ण अर्थव्यवस्था को नई गति प्राप्त होती है।
भारतीय रेलवे का कायाकल्प और 2.78 लाख करोड़ रुपये का बजट
भारतीय रेल देश की परिवहन प्रणाली की मुख्य धुरी है, जो यात्रियों को गंतव्य तक पहुंचाने के साथ-साथ किसानों की उपज और उद्योगों के सामान को एक छोर से दूसरे छोर तक पहुंचाती है। रेलवे के बुनियादी ढांचे में अभूतपूर्व निवेश किया गया है, जिसके तहत रेल बजट को वित्त वर्ष 2014-15 के 32,000 करोड़ रुपये से बढ़ाकर वित्त वर्ष 2026-27 में 2.78 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया है। इस बजटीय आवंटन का असर धरातल पर दिखाई दे रहा है, जहां नई पटरियों के बिछने से रसद और माल परिवहन की रफ्तार बढ़ी है।
माल ढुलाई के मामले में भारतीय रेल ने नया कीर्तिमान स्थापित किया है। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान रेलवे ने रिकॉर्ड 1.67 अरब टन (167 करोड़ टन) माल का परिवहन किया, जो वित्त वर्ष 2014-15 के 1,098 मिलियन टन के आंकड़े से काफी अधिक है। इसके साथ ही भारतीय रेल माल ढुलाई के मामले में विश्व की दूसरी सबसे बड़ी रेलवे प्रणाली बन गई है। कोयला, सीमेंट, स्टील, उर्वरक और खाद्यान्न जैसे आवश्यक सामानों की निर्बाध आपूर्ति से कारखानों को कच्चा समय पर मिल रहा है, जिससे लॉजिस्टिक्स, पैकेजिंग और लोडिंग क्षेत्र में नए रोजगार पैदा हो रहे हैं।
अमृत भारत स्टेशन योजना से स्थानीय बाजार को बढ़ावा
स्टेशनों के आधुनिकीकरण के लिए केंद्र सरकार अमृत भारत स्टेशन योजना चला रही है। इस योजना के अंतर्गत देश भर के 1,340 रेलवे स्टेशनों को आधुनिक सुविधाओं से युक्त बनाने का लक्ष्य रखा गया है। 18 जुलाई 2026 तक इनमें से 261 स्टेशनों का पुनर्विकास कार्य सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है। स्टेशनों पर यात्री सुविधाएं बढ़ने और कनेक्टिविटी बेहतर होने से स्थानीय अर्थव्यवस्था को सीधा लाभ मिल रहा है। प्लेटफ़ॉर्म पर यात्रियों की आवाजाही बढ़ने से ऑटो चालकों, टैक्सी ड्राइवरों, कुलियों, खान-पान के स्टॉल धारकों और निकटवर्ती होटल व्यवसायियों की दैनिक कमाई में बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है।
उड्डयन क्षेत्र का विस्तार और 165 हवाई अड्डों का जाल
हवाई कनेक्टिविटी का विस्तार देश के आर्थिक विकास का दूसरा प्रमुख इंजन बनकर उभरा है। हवाई अड्डों के निर्माण से सीमेंट, स्टील, कांच, बिजली के उपकरण और भारी मशीनों की मांग में जोरदार वृद्धि होती है। परिचालन शुरू होने के बाद विमानन रखरखाव (एमआरओ), ग्राउंड सपोर्ट और विमान सेवाओं से जुड़े उद्योगों को प्रोत्साहन मिलता है। वर्ष 2014 में देश के भीतर केवल 74 परिचालन योग्य हवाई अड्डे थे, जिनकी संख्या वर्ष 2025 में बढ़कर 164 हुई और जुलाई 2026 तक यह आंकड़ा 165 तक पहुंच गया। बीते एक दशक में हवाई अड्डों की संख्या में 2.2 गुना वृद्धि दर्ज की गई है।
हवाई यात्रियों की संख्या में भी रिकॉर्ड बढ़ोतरी देखी गई है। वित्त वर्ष 2024-25 में देश की घरेलू एयरलाइंस ने 16.55 करोड़ यात्रियों को सेवाएं दीं, जो इससे पिछले वर्ष के 15.37 करोड़ के आंकड़े से अधिक है। इसी अवधि में अंतरराष्ट्रीय हवाई यात्रियों की संख्या बढ़कर 7.41 करोड़ दर्ज की गई। एयर कार्गो और उड़ान योजना के माध्यम से छोटे शहरों को बड़े आर्थिक केंद्रों से जोड़ा जा रहा है, जिससे हवाई अड्डों तक यात्रियों को पहुंचाने वाले कैब चालकों से लेकर गंतव्य शहरों के रेस्तरां और रिटेल स्टोर तक व्यापारिक गतिविधियों का दायरा व्यापक हुआ है।



















