भारतीय रेलवे के आधुनिकीकरण में वंदे भारत ट्रेनों ने एक नया अध्याय लिखा है। अपनी प्रीमियम सुविधाओं और उच्च गति के लिए चर्चित यह ट्रेन तकनीक के मामले में भी काफी उन्नत है। वंदे भारत का सबसे महत्वपूर्ण पहलू इसका सुरक्षा और ब्रेकिंग सिस्टम है, जो पारंपरिक ट्रेनों से बिल्कुल अलग है। सामान्य ट्रेनों के विपरीत, इसमें चार पहिया वाहनों यानी कारों की तरह आधुनिक डिस्क ब्रेक और इलेक्ट्रो-न्यूमैटिक तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। यह प्रणाली ट्रेन की गति को तुरंत नियंत्रित करने में मदद करती है और आपातकालीन स्थिति में न्यूनतम दूरी पर ट्रेन को सुरक्षित रोक सकती है। इसके अलावा, ब्रेक लगाते समय यह ट्रेन खुद बिजली भी बनाती है, जिससे ऊर्जा की बड़ी बचत होती है।
इलेक्ट्रो-न्यूमैटिक तकनीक और डिस्क ब्रेक का तालमेल
वंदे भारत एक्सप्रेस में सामान्य ट्रेनों की तरह पहियों के बगल में ब्रेक ब्लॉक नहीं दबाए जाते। इसके बजाय पहियों के साथ ही इलेक्ट्रो-न्यूमैटिक (Electro Pneumatic) डिस्क ब्रेक फिट किए गए हैं। पारंपरिक रेल गाड़ियों में ब्रेकिंग संदेश हवा के दबाव से भेजा जाता है, जिससे पूरी ट्रेन तक ब्रेक का असर पहुंचने में कुछ सेकंड का समय लगता है। वहीं वंदे भारत में ब्रेक कमांड बिजली के सिग्नल के जरिए ट्रांसमिट होती है। जैसे ही लोको पायलट ब्रेक लगाता है, इलेक्ट्रिक सिग्नल पलक झपकते ही पूरी ट्रेन के ब्रेकिंग मैकेनिज्म तक पहुंच जाता है। कार के डिस्क और ड्रम ब्रेक की तर्ज पर तैयार यह व्यवस्था ट्रेन को अत्यधिक स्थिर और सुरक्षित बनाती है।
इमरजेंसी ब्रेकिंग डिस्टेंस (EBD) और सफल ट्रायल
कार की सुरक्षा सुविधाओं की भांति वंदे भारत ट्रेन में इमरजेंसी ब्रेकिंग डिस्टेंस (EBD) सिस्टम भी शामिल किया गया है। इस तकनीक का मुख्य उद्देश्य हाई-स्पीड ट्रेन को किसी भी आपात स्थिति में बिना किसी नुकसान या दुर्घटना के त्वरित रूप से रोकना है। अगस्त की शुरुआत में रेलवे द्वारा इसका गहन परीक्षण पूरा कर लिया गया था। यह ट्रायल सूखी और गीली दोनों प्रकार की रेल पटरियों पर अलग-अलग परिस्थितियों में किया गया, जिसमें ब्रेक सिस्टम का प्रदर्शन पूरी तरह सफल रहा। वर्तमान में इस ईबीडी प्रणाली को मालगाड़ियों में लागू किया गया है, और जल्द ही इसे यात्री ट्रेनों में भी व्यापक रूप से लागू करने की योजना है।
तीन-स्तरीय इमरजेंसी ब्रेकिंग सिस्टम और तेज प्रतिक्रिया
वंदे भारत के फ्रेट यानी मालगाड़ी संस्करण में सुरक्षा के लिए तीन अलग-अलग प्रकार के इमरजेंसी ब्रेक दिए गए हैं। इनमें लोको ब्रेक, ट्रेन ब्रेक और पुश बटन ब्रेक शामिल हैं। परीक्षण के दौरान तीनों ही प्रणालियों ने सटीक और त्वरित प्रतिक्रिया दी। पारंपरिक ट्रेनों में एयर प्रेशर के कारण ब्रेक का असर पूरी ट्रेन में फैलने में देरी होती है, जिससे ट्रेन को रुकने में अधिक दूरी तय करनी पड़ती है। वंदे भारत का इलेक्ट्रिकल सिग्नल सिस्टम इस समय अंतराल को समाप्त कर देता है। इसका सीधा उद्देश्य देश में मालगाड़ियों की औसत रफ्तार बढ़ाना है, जिससे लॉजिस्टिक्स और सामान की ढुलाई तेज और सुगम हो सके।
रीजेनरेटिव ब्रेकिंग: ब्रेक लगाते ही बनती है बिजली
वंदे भारत की सबसे क्रांतिकारी खूबी इसका रीजेनरेटिव ब्रेकिंग (Regenerative Braking) सिस्टम है। जब भी इस ट्रेन में ब्रेक लगाया जाता है, तो ट्रेन की गतिज ऊर्जा (काइनेटिक एनर्जी) नष्ट होने के बजाय सीधे विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित हो जाती है। यह जनरेट हुई बिजली तुरंत ओवरहेड इलेक्ट्रिक सिस्टम में वापस भेज दी जाती है, जिसे ट्रेन अपनी अन्य विद्युत जरूरतों या अन्य ट्रेनों के संचालन में पुनः उपयोग कर लेती है। इस तकनीक की मदद से वंदे भारत ट्रेन अपनी कुल बिजली खपत का लगभग 30 फीसदी हिस्सा स्वयं बचा लेती है। कम दूरी में सुरक्षित ठहराव और ऊर्जा रीसाइक्लिंग के इसी दोहरे उद्देश्य के लिए इसमें कार की तरह विशेष डिस्क ब्रेक लगाए गए हैं।



















