पंजाब नेशनल बैंक के 13,500 करोड़ रुपये के ऋण घोटाले के मुख्य आरोपी भगोड़े कारोबारी मेहुल चोकसी के भारत प्रत्यर्पण की प्रक्रिया अब अंतिम चरण में पहुंच गई है। नई दिल्ली में आयोजित उच्च स्तरीय द्विपक्षीय बैठक के दौरान भारत और बेल्जियम के शीर्ष नेतृत्व के बीच इस मुद्दे पर गहन चर्चा हुई। बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट दे वेवर की भारत यात्रा के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय राजनयिक दल ने चोकसी को भारत सौंपने की मांग को मजबूती से उठाया, जिस पर बेल्जियम सरकार ने पूरा सहयोग देने का आश्वासन दिया है।
द्विपक्षीय बैठक में उठी प्रत्यर्पण की मांग
नई दिल्ली में हुई इस उच्च स्तरीय मुलाकात के दौरान आर्थिक अपराध करके विदेश भागने वाले अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई पर विशेष जोर दिया गया। विदेश मंत्रालय के सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने एक विशेष प्रेस वार्ता में जानकारी दी कि भारत के कड़े रुख और औपचारिक प्रत्यर्पण अनुरोध के बाद बेल्जियम के अधिकारियों ने अप्रैल 2025 में ही मेहुल चोकसी को हिरासत में ले लिया था। अप्रैल 2025 से ही चोकसी बेल्जियम की जेल में बंद है। भारतीय अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि देश के वित्तीय तंत्र को नुकसान पहुंचाकर विदेश में शरण लेने वाले भगोड़ों को भारतीय कानून के दायरे में लाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
बेल्जियम की सर्वोच्च अदालत ने खारिज कीं चोकसी की दलीलें
बेल्जियम की हिरासत में रहते हुए मेहुल चोकसी ने भारत प्रत्यर्पण से बचने के लिए कई कानूनी रास्ते अपनाने की कोशिश की। उसने दावा किया था कि भारत में उसे निष्पक्ष सुनवाई का अवसर नहीं मिलेगा, अपने कथित अपहरण की बात कही और भारतीय जेलों की स्थिति खराब होने का हवाला दिया। हालांकि बेल्जियम की सबसे बड़ी अदालत, कोर्ट ऑफ कैसेशन ने उसकी इन सभी दलीलों को बेबुनियाद और साक्ष्य-विहीन करार देते हुए खारिज कर दिया। सर्वोच्च अदालत ने एंटवर्प कोर्ट ऑफ अपील द्वारा अक्टूबर 2025 में दिए गए फैसले पर अपनी मुहर लगा दी। अदालत ने माना कि भारत का प्रत्यर्पण अनुरोध पूरी तरह से कानूनी प्रक्रिया और मानवाधिकार मानकों के अनुकूल है।
जांच एजेंसियों की कागजी कार्रवाई अंतिम दौर में
बेल्जियम की शीर्ष अदालत से हरी झंडी मिलने और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट दे वेवर के बीच हुई सकारात्मक बातचीत के बाद चोकसी को भारत लाने का मार्ग प्रशस्त हो गया है। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कानूनी टीमें प्रत्यर्पण से जुड़ी कागजी औपचारिकताओं को पूरा करने में जुटी हैं। 13,500 करोड़ रुपये के पीएनबी लोन घोटाले के मामले में चोकसी को भारत लाकर कानूनी प्रक्रिया का सामना कराया जाएगा, जिससे यह संदेश स्पष्ट होता है कि वित्तीय धोखाधड़ी करके विदेश भागने वाले अपराधी कानून की पकड़ से बच नहीं सकते।


















