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ऋषिकेश के ये चार कैफे परोस रहे हैं सेहतमंद भोजन, ऑर्गेनिक सलाद से लेकर पारंपरिक पहाड़ी थाली तक सब मौजूदउत्तराखंड
9 अक्तू॰ 2026, 5:25 pm (28 दिन पहले)· 2

ऋषिकेश के ये चार कैफे परोस रहे हैं सेहतमंद भोजन, ऑर्गेनिक सलाद से लेकर पारंपरिक पहाड़ी थाली तक सब मौजूद

ऋषिकेश में जंक फूड के बजाय पौष्टिक और स्वादिष्ट खानपान की तलाश कर रहे सैलानियों के लिए गंगा बीच कैफे, गंगा व्यू कैफे, वैदिक रसोई और लिटिल बुद्धा कैफे बेहतरीन विकल्प बनकर उभरे हैं।

तीर्थनगरी ऋषिकेश पहुंचने वाले सैलानी अक्सर प्राकृतिक नजारों और शांत वातावरण के बीच अच्छे खानपान की तलाश में रहते हैं। आमतौर पर घूमने-फिरने के दौरान लोग फास्ट फूड का रुख करते हैं, मगर ऋषिकेश में ऐसे कई लोकप्रिय ठिकाने मौजूद हैं जहां स्वाद के साथ सेहत का भी पूरा ख्याल रखा जाता है। बहती गंगा की लहरों, ठंडी हवाओं और सुरम्य पहाड़ियों के साए में बैठे ये कैफे सैलानियों को ऑर्गेनिक सलाद, शुगर फ्री पेय पदार्थ, ताजा स्मूदी और पारंपरिक गढ़वाली व्यंजनों का अनूठा अनुभव प्रदान कर रहे हैं। यदि आप अपनी यात्रा के दौरान तले-भुने खाने से परहेज करते हुए पौष्टिक आहार का आनंद लेना चाहते हैं, तो नगर के ये चार प्रमुख कैफे आपकी सूची में जरूर शामिल होने चाहिए।

गंगा बीच कैफे: बजरंग सेतु के पास पौष्टिक व्यंजनों का अनूठा ठिकाना

ऋषिकेश में नवनिर्मित बजरंग सेतु के बेहद नजदीक स्थित गंगा बीच कैफे अपने मनोरम दृश्यों और स्वास्थ्यवर्धक मेन्यू के लिए पर्यटकों के बीच काफी पसंद किया जाता है। यहां आने वाले मेहमान खुली हवा में बैठकर गंगा नदी का कलकल बहता पानी निहार सकते हैं और सुकून भरे पलों का लुत्फ उठा सकते हैं। यह स्थान दोस्तों और परिवार के सदस्यों के साथ शांतिपूर्ण समय बिताने के लिए काफी अनुकूल माना जाता है।

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खानपान के विकल्पों की बात करें तो यहां जंक फूड के स्थान पर सेहत को बढ़ावा देने वाले कई खास विकल्प परोसे जाते हैं। मेन्यू में विशेष रूप से हेल्दी प्लेटर्स, हर्बल चाय, जैविक यानी ऑर्गेनिक सलाद, ताजे फलों के जूस और फ्रेश स्मूदीज को शामिल किया गया है। इसके अतिरिक्त जो लोग मीठे से परहेज करते हैं या अपने स्वास्थ्य को लेकर सजग हैं, उनके लिए कई शुगर फ्री विकल्प भी यहां उपलब्ध कराए गए हैं।

गंगा व्यू कैफे: तेरह मंजिल मंदिर के समीप ग्रीक सलाद और स्मूदी बाउल की धूम

ऋषिकेश के पुराने और सुप्रसिद्ध प्रतिष्ठानों में शुमार गंगा व्यू कैफे गंगा किनारे तेरह मंजिल मंदिर के पास अपनी पहचान बनाए हुए है। इस कैफे की सबसे बड़ी खूबी इसका दो मंजिला सिटिंग अरेंजमेंट है। निचले तल पर बैठने वाले आगंतुक गंगा नदी के पवित्र जल को बिल्कुल करीब से महसूस कर सकते हैं। वहीं ऊपरी मंजिल पर बैठने वाले लोगों को गंगा के प्रवाह के साथ-साथ सामने फैली सुंदर पहाड़ियों और हनुमान सेतु का विहंगम दृश्य देखने को मिलता है।

यह कैफे अपने लाजवाब ग्रीक सलाद के लिए शहर भर में जाना जाता है, जिसे चखने के लिए रोजाना बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंचते हैं। सलाद के अलावा यहां पौष्टिक स्मूदी बाउल की विस्तृत श्रृंखला मिलती है। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय स्वाद पसंद करने वाले मेहमानों के लिए मैक्सिकन, इटैलियन और कई अन्य लोकप्रिय खानपान शैलियों के हेल्दी विकल्प भी मेन्यू में मौजूद हैं।

वैदिक रसोई: रानी मंदिर के सामने पारंपरिक पहाड़ी खानपान का स्वाद

लक्ष्मण झूला क्षेत्र में रानी मंदिर के ठीक सामने स्थित वैदिक रसोई, जिसे कई लोग वैदिक धाम के नाम से भी जानते हैं, अपने ठेठ पारंपरिक व्यंजनों के लिए मशहूर है। इस भोजनालय में कदम रखते ही होटल जैसा औपचारिक माहौल पीछे छूट जाता है और एक आत्मीय, घरेलू अनुभूति होती है। हल्की और सुकूनदेह रोशनी, शांत वातावरण और पृष्ठभूमि में बजता धीमा वाद्य संगीत यहां के माहौल को बेहद मनभावन बना देता है।

यहां आने वाले अधिकांश लोग स्थानीय पहाड़ी थाली का स्वाद चखना पसंद करते हैं, जो पौष्टिकता से भरपूर होती है। इस थाली में स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभकारी गहत की दाल, कंडाली की सब्जी और कद्दू का रायता विशेष रूप से परोसा जाता है। इसके अलावा पोषक तत्वों से भरपूर रागी की रोटी, रागी इडली और रागी रोल जैसी कई नवीन व स्वादिष्ट डिशेज भी स्वास्थ्य प्रेमियों को खूब भाती हैं।

लिटिल बुद्धा कैफे: बोहो थीम, गंगा का किनारा और मशहूर ओमेगा 3 सलाद

लक्ष्मण झूला क्षेत्र में स्थित लिटिल बुद्धा कैफे अपनी बोहो थीम और आकर्षक बनावट के लिए युवाओं के बीच खासा विख्यात है। गंगा तट पर बने इस खूबसूरत कैफे में मंद रोशनी और पारंपरिक फ्लोर सिटिंग यानी जमीन पर बैठने की व्यवस्था की गई है, जो एक बेहद आरामदायक अनुभव देती है। शाम के वक्त यहां इतनी भारी भीड़ उमड़ती है कि बैठने के लिए खाली जगह मिलना भी मुश्किल हो जाता है, इसलिए यहां आने वाले लोगों को शाम ढलने से थोड़ा पहले पहुंचने का सुझाव दिया जाता है।

इस कैफे का मुख्य आकर्षण यहां तैयार होने वाले विभिन्न प्रकार के सलाद हैं, जिनमें ओमेगा 3 सलाद पर्यटकों की पहली पसंद माना जाता है। इसके साथ ही यहां कई अनोखी फ्यूजन स्मूदी भी परोसी जाती हैं। स्वास्थ्यवर्धक खानपान में रुचि रखने वाले सैलानियों के लिए यहां खास तौर पर तैयार किए गए हेल्दी नूडल्स, पौष्टिक प्लेटर्स और गरमा-गरम सूप के ढेरों विकल्प मौजूद हैं।

सवाल-जवाब

गंगा बीच कैफे ऋषिकेश में किस जगह स्थित है?
यह कैफे ऋषिकेश के नवनिर्मित पुल बजरंग सेतु के नजदीक गंगा नदी के किनारे स्थित है।
गंगा बीच कैफे में स्वास्थ्यवर्धक खानपान के कौन से विकल्प मिलते हैं?
यहां हेल्दी प्लेटर्स, हर्बल चाय, ऑर्गेनिक सलाद, फलों के जूस, फ्रेश स्मूदी और कई शुगर फ्री विकल्प उपलब्ध हैं।
गंगा व्यू कैफे से कौन से प्रमुख दर्शनीय स्थल दिखाई देते हैं?
गंगा किनारे तेरह मंजिल मंदिर के पास स्थित इस कैफे की ऊपरी मंजिल से गंगा नदी, पहाड़ियां और हनुमान सेतु नजर आते हैं।
वैदिक रसोई की पारंपरिक पहाड़ी थाली में क्या परोसा जाता है?
इस थाली में सेहत के लिए फायदेमंद गहत की दाल, कंडाली की सब्जी, कद्दू का रायता और रागी से बनी रोटियां परोसी जाती हैं।
लिटिल बुद्धा कैफे का कौन सा सलाद सबसे अधिक मशहूर है?
लिटिल बुद्धा कैफे का ओमेगा 3 सलाद पर्यटकों के बीच सबसे ज्यादा पसंद किया जाने वाला व्यंजन है।
लिटिल बुद्धा कैफे में शाम के समय जल्दी जाने की सलाह क्यों दी जाती है?
शाम के वक्त इस कैफे में भारी भीड़ रहती है, जिससे देर से पहुंचने पर बैठने की जगह मिलना मुश्किल हो जाता है।
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टिप्पणियाँ 5

Amit Patel@amit-patel·27 दिन पहले

ऋषिकेश में जंक फूड छोड़कर ऑर्गेनिक और पहाड़ी खाने का ट्रेंड वाकई দারুণ है। अगली बार जाना होगा।

Arjun Mehta@arjun-mehta·27 दिन पहले

ऋषिकेश जाने पर हमेशा यही टेंशन रहती है कि बाहर का खा-खाकर पेट खराब न हो जाए। गंगा किनारे बैठकर ऑर्गेनिक खाना सच में एक बढ़िया बदलाव है, लेकिन क्या इन जगहों पर मिलने वाला खाना सच में बजट में होता है या जेब ढीली करनी पड़ती है?

Ravikash Gupta@ravikash·27 दिन पहले

अरे अर्जुन भाई, बिल्कुल सही बात पकड़ी! घूमते वक्त सबसे बड़ा डर पेट खराब होने का ही रहता है। दाम थोड़े ज्यादा होंगे ही, पर सेहत के आगे पैसे की क्या कीमत।

Rohan Verma@rohan-verma·27 दिन पहले

ऋषिकेश जाने पर गंगा किनारे बैठकर ऐसा सात्विक और पौष्टिक खाना मिल जाए, तो ट्रिप का मजा ही दोगुना हो जाता है। अगली बार इन कैफे में जाकर पहाड़ी थाली जरूर ट्राई करनी होगी।

Karan Malhotra@karan-malhotra·27 दिन पहले

रोहन भाई, सही कहा आपने! वैसे भी आजकल सफर में बाहर का तला-भुना खाने से पेट खराब होने के केस बहुत आते हैं, ऐसे में ऐसा सात्विक खाना मिल जाए तो सेहत और ट्रिप दोनों बच जाते हैं।

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