उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में त्योहारी सीजन के बीच पानी की भारी किल्लत ने स्थानीय नागरिकों की मुश्किलें काफी बढ़ा दी हैं। पिछले 10 दिनों से शहर के बंजारावाला और मथुरावाला क्षेत्रों में नलों में पानी आना बंद हो गया है या फिर बेहद गंदा और मटमैला पानी आ रहा है। त्योहार के इन दिनों में जब घरों में मेहमानों का आना-जाना होता है, तब इस तरह की बुनियादी समस्या ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है। गलियां संकरी होने के कारण पानी के टैंकर भी अंदर तक नहीं पहुंच पा रहे हैं, जिससे प्रभावित परिवारों के सामने संकट और गहरा गया है।
गंदा पानी पीने की मजबूरी और बीमारियों का खतरा
स्थानीय निवासियों का कहना है कि वे बदरंग और गंदा पानी पीने को मजबूर हैं, जिससे उनके बच्चों के बीमार पड़ने का डर लगातार सता रहा है। रामवती नामक स्थानीय निवासी ने बताया कि नलों से आने वाले पानी में कीड़े तक तैरते हुए दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने अपनी आर्थिक लाचारी बयां करते हुए कहा कि उनके पास घरों में वाटर प्यूरीफायर या RO लगवाने के पैसे तक नहीं हैं। वहीं, सुनीता ने बताया कि यह पानी न तो पीने के काम आ सकता है और न ही इससे बर्तन धोए जा सकते हैं। मटमैले पानी से कपड़े धोने पर वे भी खराब हो रहे हैं। उन्होंने सवालिया लहजे में कहा कि यदि इस दूषित पानी की वजह से उनके बच्चे बीमार पड़ गए, तो रोजाना मजदूरी करके पेट पालने वाले लोग महंगे इलाज का खर्च कहां से उठाएंगे।
दिवाली पर रिश्तेदारों को मेहमाननवाज़ी से किया मना
पानी के इस भीषण संकट के कारण लोगों को अपने घरों में त्योहार की खुशियों को छोड़कर बुनियादी जरूरतों के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। निर्मला देवी ने साझा किया कि दिवाली के पावन पर्व पर पानी की यह किल्लत सबसे ज्यादा मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना दे रही है। वह खुद शारीरिक रूप से अस्वस्थ हैं और घुटनों के दर्द से परेशान होने के कारण दूर से पानी ढोकर लाने में असमर्थ हैं। उन्होंने बताया कि पानी की इस गंभीर दिक्कत को देखते हुए उन्हें मजबूरी में अपने उन रिश्तेदारों को भी आने से मना करना पड़ा, जो दिवाली पर उनके घर आने वाले थे। बंजारावाला की पार्षद रुचि रावत ने जानकारी दी कि क्षेत्र में पिछले एक साल से हल्की-फुल्की परेशानी तो चल रही थी, लेकिन पिछले 10 दिनों से नलों के नल पूरी तरह सूखे पड़े हैं। उन्होंने अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब विभाग जनता को पानी की एक बूंद भी नहीं दे पा रहा है, तो फिर उनके घरों में भारी-भरकम पानी के बिल क्यों भेजे जा रहे हैं।
हजारों परिवार प्रभावित, जनप्रतिनिधियों और पार्षदों ने उठाई आवाज
मथुरावाला के पार्षद सोबत सिंह ने स्थिति की गंभीरता को स्पष्ट करते हुए बताया कि वार्ड 84 और वार्ड 85 के साथ-साथ कैंट विधानसभा क्षेत्र से जुड़े कई इलाकों में हजारों परिवार पानी की एक-एक बूंद के लिए तरस रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि हर समस्या का कोई न कोई समाधान जरूर होता है, लेकिन यह तभी संभव है जब जिम्मेदार अधिकारी और उनका पूरा अमला ईमानदारी से काम करे। इसके अलावा, समाजसेवी वीर सिंह पंवार ने बताया कि इस पूरे इलाके में लंबे समय से पानी की किल्लत बनी हुई है और वे गरीब तबके के लोगों को उनका हक दिलाने के लिए लगातार सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं। आम जनता अपनी गरीबी और विवशता के कारण गंदा पानी पीने को मजबूर है, जिसकी सुध लेने वाला कोई नहीं है।
प्रशासन ने स्वीकार किया संकट, नई पाइपलाइन से समाधान का दावा
दूसरी ओर, उत्तराखंड शहरी क्षेत्र विकास एजेंसी के प्रोजेक्ट मैनेजर जतिन सिंह सैनी ने इस विकट स्थिति को स्वीकार किया है। उन्होंने बताया कि इस क्षेत्र में पहले भी पानी की पुरानी समस्याएं रही हैं, जिनके समाधान के लिए हाल ही में पुरानी पाइपलाइनों को काटकर नई लाइनें डाली गई हैं। उन्होंने माना कि कुछ इलाकों में अभी भी समस्या पूरी तरह से बनी हुई है और कुछ एरिया सैचुरेट हो चुके हैं। जिन क्षेत्रों से पानी न आने की शिकायतें मिल रही हैं, वहां के हालात का स्थलीय निरीक्षण किया जा रहा है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जल संस्थान के अधिकारियों के साथ लगातार बातचीत चल रही है और यह सुनिश्चित करने के प्रयास किए जा रहे हैं कि इस त्योहारी सीजन में आम नागरिकों को पानी की समस्या से और अधिक न जूझना पड़े।



















