उत्तर प्रदेश के दो अलग जिलों में मोबाइल टॉवर पर चढ़कर हाई-वोल्टेज ड्रामा करने की घटनाएं सामने आई हैं। पहली घटना सीतापुर जिले की है, जहां आगामी पंचायत चुनाव में वोट देने को लेकर हुए पारिवारिक विवाद के बाद एक युवक मोबाइल टॉवर पर चढ़ गया। वहीं दूसरी घटना राज्य की राजधानी लखनऊ के हजरतगंज इलाके की है, जहां आगरा से आई एक महिला ने रेलवे पुलिस कर्मियों द्वारा अपने 12 वर्षीय बेटे के साथ की गई कथित प्रताड़ना और प्रशासनिक सुनवाई न होने के विरोध में टॉवर पर चढ़कर हंगामा किया। दोनों ही मामलों में स्थानीय पुलिस और आपातकालीन टीमों ने कड़ी मशक्कत के बाद दोनों व्यक्तियों को समझा-बुझाकर सुरक्षित नीचे उतारा।
सीतापुर में चुनावी वोट पर पारिवारिक विवाद और टॉवर पर हंगामा
सीतापुर जिले के पिसावां तहसील अंतर्गत आने वाले चौखड़िया गांव में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की सुगबुगाहट के बीच एक अनोखा पारिवारिक विवाद देखने को मिला। हालांकि अभी राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा पंचायत चुनाव की आधिकारिक तारीखों की घोषणा की जानी बाकी है, लेकिन ग्रामीण इलाकों में प्रधानी के चुनाव को लेकर रणनीतियां और मतभेद उभरने लगे हैं। चौखड़िया गांव निवासी अनुज का अपने परिवार के साथ इस बात को लेकर विवाद हो गया कि आगामी चुनाव में किसे वोट दिया जाना चाहिए।
अनुज मादक पदार्थों के सेवन का आदी बताया जाता है। शुक्रवार की रात अनुज का अपने पिता हरद्वारीलाल से वोट देने के मुद्दे पर बहस हुई, जो देखते ही देखते तीखी कहासुनी में बदल गई। विवाद के बाद अनुज रात में ही अपने घर से बिना बताए कहीं निकल गया। शनिवार की सुबह करीब 6 बजे जब ग्रामीण उठे, तो उन्होंने अनुज को गांव में स्थित एक मोबाइल टॉवर की ऊंचाई पर चढ़ा हुआ देखा। यह दृश्य देखते ही पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई और टॉवर के आसपास ग्रामीणों की भारी भीड़ एकत्रित हो गई।
घटना की जानकारी मिलते ही अनुज के परिजन भी मौके पर पहुंचे और उससे नीचे उतरने की गुहार लगाने लगे। हालांकि, अनुज ने परिजनों की बातों को अनसुना कर दिया और टॉवर से छलांग लगाकर अपनी जीवन लीला समाप्त करने की धमकियां देने लगा। स्थिति बिगड़ती देख ग्रामीणों ने तुरंत पिसावां थाना पुलिस को सूचित किया। मौके पर पहुंचे पुलिसकर्मियों ने अनुज से बातचीत शुरू की, लेकिन वह अपनी मांग पर अड़ा रहा और नीचे आने से इनकार करता रहा।
पुलिस टीम और स्थानीय लोगों ने करीब 3 घंटे तक अनुज को समझाने का प्रयास किया। लंबी मशक्कत और आश्वासन के बाद अनुज आखिरकार टॉवर से सुरक्षित नीचे उतरने के लिए तैयार हुआ। अनुज के नीचे आते ही पुलिस और ग्रामीणों ने राहत की सांस ली। पिसावां के थाना प्रभारी ने बताया कि सार्वजनिक स्थान पर शांति व्यवस्था भंग करने के आरोप में अनुज के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करते हुए उसका शांति भंग की धारा में चालान किया गया है।
लखनऊ के हजरतगंज में आगरा की महिला का हाई-वोल्टेज विरोध
इसी तरह की एक अन्य घटना लखनऊ के हजरतगंज थाना क्षेत्र स्थित पार्क रोड पर देखने को मिली। आगरा जिले की रहने वाली तुलसा देवी शुक्रवार को अचानक लखनऊ पहुंचीं और हजरतगंज पार्क रोड स्थित एक ऊंचे मोबाइल टॉवर पर चढ़ गईं। टॉवर पर चढ़कर महिला जोर-जोर से चिल्लाने लगी, जिससे आसपास के राहगीरों और स्थानीय निवासियों का ध्यान उसकी ओर गया। नागरिकों ने तुरंत इस घटना की सूचना हजरतगंज पुलिस स्टेशन और अग्निशमन विभाग को दी।
सूचना मिलते ही हजरतगंज पुलिस बल और दमकल विभाग की टीम मौके पर पहुंची। पुलिस अधिकारियों ने लाउडस्पीकर और अन्य माध्यमों से महिला को शांत कराने की कोशिश की और उसकी समस्याओं को सुनने का आश्वासन दिया। काफी समझाने-बुझाने के बाद पुलिस कर्मियों ने तुलसा देवी को टॉवर से नीचे उतारने में सफलता हासिल की। नीचे उतरने के बाद महिला को पूछताछ और सुरक्षा के लिए पुलिस कस्टडी में लिया गया, जहां उसने अपने साथ हुई आपबीती सुनाई।
आगरा कैंट रेलवे स्टेशन पर प्रताड़ना और अमानवीय व्यवहार के आरोप
पुलिस द्वारा की गई पूछताछ में तुलसा देवी ने रेलवे पुलिस कर्मियों पर बेहद गंभीर और संवेदनहीन आरोप लगाए। तुलसा देवी ने बताया कि गत 26 जुलाई को वह अपने 12 वर्षीय बेटे के साथ आगरा कैंट रेलवे स्टेशन पर बैठी हुई थीं। यात्रा के दौरान उन्होंने अपने बेटे को पीने का पानी लेने के लिए भेजा था। महिला का आरोप है कि वहां तैनात रेलवे पुलिस कर्मियों ने उनके बेटे को रोक लिया और उस पर बैग चोरी करने का झूठा आरोप लगा दिया।
तुलसा देवी के अनुसार, पुलिसकर्मियों ने उनके नाबालिग बेटे को डराया-धमकाया और उसके साथ मारपीट की। बच्चे को लिफ्ट के चक्कर लगवाए गए और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया। जब महिला को इस बात की भनक लगी और उन्होंने पुलिसकर्मियों के इस कृत्य का विरोध किया, तो अधिकारियों ने बच्चे को झूठे चोरी के मुकदमे में फंसाने की धमकी दी। महिला ने यह भी स्पष्ट किया कि पुलिस द्वारा ली गई उनके बेटे की तलाशी में कोई भी चोरी की वस्तु या संदिग्ध बैग बरामद नहीं हुआ था।
महिला ने आगे आरोप लगाया कि रेलवे पुलिस कर्मियों ने उनके बेटे को अवैध रूप से बंधक बनाकर रखा और उसके साथ अमानवीय बर्ताव करते हुए उसे मूत्र पिलाने तक का प्रयास किया। इसके अतिरिक्त, आरोपी पुलिसकर्मियों ने महिला से 2000 रुपये नकद और उनका मोबाइल फोन भी छीन लिया। घटना के बाद तुलसा देवी ने रेलवे अधिकारियों और स्थानीय पुलिस प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों से शिकायत दर्ज कराई, लेकिन किसी भी स्तर पर आरोपियों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की गई। इसके विपरीत, आरोपी पुलिसकर्मी लगातार महिला और उसके परिवार को धमकियां देते रहे, जिससे तंग आकर वह न्याय की गुहार लगाने लखनऊ में उच्च अधिकारियों से मिलने आई थीं।
प्रशासनिक रुख और आगे की कार्रवाई
हजरतगंज के सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) रजनीश वर्मा ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि शुरुआती जांच में पूरा प्रकरण आगरा जिले से संबंधित पाया गया है। लखनऊ पुलिस ने इस संबंध में आगरा पुलिस प्रशासन और रेलवे पुलिस अधिकारियों को तुरंत सूचित कर दिया है ताकि मामले की निष्पक्ष जांच की जा सके।
एसीपी रजनीश वर्मा ने आगे बताया कि टॉवर से उतारे जाने के बाद तुलसा देवी के परिजनों से संपर्क किया गया और उन्हें लखनऊ बुलाया गया। कानूनी प्रक्रिया और आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने के बाद महिला को उसके परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया है। पुलिस अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि संबंधित विभाग को मामले की विस्तृत रिपोर्ट भेज दी गई है।



















