फरीदाबाद के सेक्टर 65 में स्थित साहुपुरा गांव की खिल्लू कॉलोनी में उस समय भारी तनाव फैल गया, जब प्रशासनिक दस्ता पुलिस बल के साथ वहां पहुंच गया। इस टीम में महिला और पुरुष दोनों ही विभागों के पुलिसकर्मी शामिल थे। प्रशासन का उद्देश्य कॉलोनी के एक मुख्य रास्ते पर पक्की दीवार खड़ी करके उसे हमेशा के लिए बंद करना था। इस गली में कई परिवार वर्षों से मकान बनाकर रह रहे हैं और उनके आने-जाने का यही एकमात्र जरिया है, जिसके बंद होने से उनके सामने नजरबंदी जैसी स्थिति पैदा हो गई है।
घरों के मुख्य द्वारों के सामने JCB और पुलिस का पहरा
प्रशासन की इस कार्रवाई से पूरी कॉलोनी में दहशत और नाराजगी का माहौल है। मौके पर रास्ते को बंद करने के लिए एक JCB मशीन मंगवाई गई, जिसकी मदद से काम शुरू किया गया। देखते ही देखते स्थानीय निवासियों के घरों के ठीक सामने ईंट-गारे से दीवार खड़ी की जाने लगी। लोगों का कहना है कि उनके घरों के मुख्य दरवाजों के ठीक आगे दीवार उठाना सीधे तौर पर उनका रास्ता रोकना है। पुलिस बल की भारी मौजूदगी के कारण लोग शारीरिक रूप से इस निर्माण को नहीं रोक पा रहे हैं, लेकिन वे लगातार अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं।
दावों का टकराव: HUDA की जमीन बनाम पुश्तैनी अधिकार
इस पूरे विवाद की जड़ में जमीन के मालिकाना हक को लेकर दो अलग-अलग दावे हैं। एक तरफ जहां प्रशासनिक टीम का कहना है कि जिस जमीन पर यह गली बनी है, वह पूरी तरह से HUDA की है। अधिकारियों का तर्क है कि यह सरकारी भूमि है और इस पर किसी भी तरह का रास्ता या आवागमन पूरी तरह से अवैध है। दूसरी तरफ, खिल्लू कॉलोनी के निवासियों का दावा है कि वे यहां दशकों से रह रहे हैं और उनके पास इस जमीन और रास्ते के वैध कागजात मौजूद हैं, जो सरकारी दावों को खारिज करते हैं।
बिना नोटिस कार्रवाई पर भड़के सोहन लाल और जयसिंह
कॉलोनी के बुजुर्ग निवासियों ने अपने पुराने दस्तावेज दिखाते हुए प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। वर्षों से यहां रह रहे सोहन लाल ने अपना पक्ष रखते हुए कहा, "मैं इस कॉलोनी में वर्ष 1974 से रह रहा हूं।" सोहन लाल का कहना है कि जब उन्होंने यह जमीन खरीदी थी, तब उन्हें बाकायदा आने-जाने का रास्ता दिया गया था और उनका मकान मुख्य सड़क पर स्थित है। उनके पास जमीन के सभी पक्के कागजात हैं और उनकी रजिस्ट्री करीब 60 से 70 साल पुरानी है। उन्होंने मांग की कि प्रशासन को इस तरह की कार्रवाई करने से पहले जमीन की पैमाइश करानी चाहिए थी और दस्तावेजों की जांच करनी चाहिए थी।
वहीं, एक अन्य निवासी जयसिंह ने बताया कि प्रशासन ने इस कार्रवाई से पहले उन्हें कोई नोटिस या चेतावनी नहीं दी। जयसिंह की रजिस्ट्री लगभग 65 साल पुरानी है और उनके कागजातों में इस रास्ते को उनके आवागमन के लिए स्पष्ट रूप से दर्शाया गया है। उनका कहना है कि बिना किसी जांच या शिकायत की सत्यता परखे सीधे दीवार खड़ी कर देना पूरी तरह से गलत और अन्यायपूर्ण है।
पीढ़ियों का बसेरा और गरीबों पर कार्रवाई का आरोप
रास्ता बंद होने से प्रभावित परिवारों का रो-रोकर बुरा हाल है। स्थानीय निवासी संध्या ने बताया कि उनके दादा और परदादा के समय से उनका परिवार इसी जगह पर रहता आ रहा है। शुरू से ही उनके परिवार ने इसी रास्ते का इस्तेमाल किया है और इसके अलावा बाहर निकलने का कोई दूसरा विकल्प मौजूद नहीं है। यदि यह दीवार बन जाती है, तो उनका पूरा परिवार अपने ही घर में कैद होकर रह जाएगा।
वहीं, कॉलोनी के निवासी रवि ने सरकार और प्रशासन पर गरीबों को प्रताड़ित करने का आरोप लगाया। रवि का कहना है कि चुनाव के समय गरीब लोग ही सरकार चुनते हैं और उन्हें उम्मीद होती है कि उनके हितों की रक्षा की जाएगी। लेकिन आज स्थिति बिल्कुल उलट है और प्रशासन केवल गरीब लोगों को ही निशाना बना रहा है, जिससे उनका जीना मुहाल हो गया है।
प्रशासनिक अधिकारियों का तर्क: खरीदार खुद जिम्मेदार
इस मामले पर मौके पर मौजूद प्रशासनिक प्रभारी रमेश ने सरकारी कार्रवाई का बचाव किया। रमेश का कहना है कि जिस सीमा पर दीवार बनाई जा रही है, वह HUDA की अधिग्रहित जमीन है। उन्होंने दलील दी कि लोगों ने जिन प्रॉपर्टी डीलरों या विक्रेताओं से ये प्लॉट खरीदे हैं, उन्हें रास्ते की मांग भी उन्हीं से करनी चाहिए थी। रमेश ने कहा, "जिन्होंने प्लॉट बेचे हैं, उन्होंने गलत जगह प्लॉट बेच दिया है।" उन्होंने उदाहरण देकर समझाया कि अगर कोई किसी के निजी घर के अंदर जबरन कब्जा कर ले, तो वह जमीन उसकी नहीं हो जाती। इसलिए लोगों को अपनी समस्या का समाधान खुद निकालना होगा या उन विक्रेताओं से जवाब मांगना होगा जिन्होंने उन्हें धोखा दिया।
तनाव के बीच जारी है दीवार का निर्माण
तमाम विरोध और निवासियों के आक्रोश के बावजूद प्रशासन ने अपनी कार्रवाई को नहीं रोका है। पुलिस की सुरक्षा में JCB मशीन लगातार काम कर रही है और रास्ते को बंद करने के लिए दीवार उठाने का काम तेजी से जारी है। खिल्लू कॉलोनी के लोग अपनी पुरानी रजिस्ट्री और सरकारी फाइलों के बीच खुद को फंसा हुआ महसूस कर रहे हैं, जबकि उनका एकमात्र रास्ता धीरे-धीरे बंद होता जा रहा है।



















